Begin typing your search...

पैसे के दम पर कोई रोड में राक्षस बनकर नहीं दौड़ सकता, साहिल की मां की चीत्कार- मेरे पास अब खोने को कुछ नहीं

तेज रफ्तार कार की टक्कर से बेटे को खोने वाली साहिल की मां ने समझौते की कोशिशों को ठुकराते हुए कहा कि पैसा इंसाफ से बड़ा नहीं हो सकता. उनका कहना है कि सड़क रेस ट्रैक नहीं और दोषियों को सजा मिलनी ही चाहिए.

पैसे के दम पर कोई रोड में राक्षस बनकर नहीं दौड़ सकता, साहिल की मां की चीत्कार- मेरे पास अब खोने को कुछ नहीं
X
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Updated on: 17 Feb 2026 12:56 PM IST

साहिल की मां की आंखों में आंसू नहीं हैं, सिर्फ़ आग है. उन्होंने कांपती आवाज़ में नहीं, बल्कि पत्थर जैसी दृढ़ आवाज़ में कहा- मुझे कोई नहीं डरा सकता. मेरे पास अब खोने को कुछ भी नहीं बचा.

साहिल इनका इकलौता बेटा था. एक चैनल से बातचीत में वो कहती हैं कि मेरा बच्चा ऑर्डिनरी बच्चा नहीं था. एक दिन में 2 मेडल लाता था मेरा बच्चा. स्कूल की हर प्रतियोगिता में उसका नाम होता. खेल हो, पढ़ाई हो, डिबेट हो- वो सब में परफेक्ट था. उसकी अलमारी में सजे मेडल सिर्फ़ धातु के टुकड़े नहीं, वो उसकी मेहनत, उसके सपनों और उसकी मां के गर्व की चमक हैं.

उस दिन भी वो सुबह घर से निकला था तो मां ने उसके माथे को चूमा था. उन्हें क्या पता था कि वही आख़िरी बार होगा. कुछ समय बाद खबर आई कि सड़क पर रेस लगाते हुए कुछ लड़कों की तेज़ रफ्तार कार ने साहिल को टक्कर मार दी. लोग कहते हैं कि कार की स्पीड इतनी थी कि टक्कर के बाद साहिल लगभग 25 फीट ऊपर उछला था.

सोशल मीडिया पर उनकी खुद की रील में इतनी स्पीड दिख रही थी… जैसे सड़क कोई खेल का मैदान हो. हंसी, शोर, गाड़ी की चीखती आवाज़ और फिर सन्नाटा. मैंने वो रील देखी है. आंखें सूख चुकी थीं. उन्होंने बस इतना कहा- मुझे जस्टिस चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई पैरेंट्स अपने बच्चों को पैसे के दम पर रोड में राक्षस बनाकर दौड़ा सकता है. पैसा गाड़ी खरीद सकता है, पर समझ नहीं. पैसा ताकत दे सकता है, पर ज़िम्मेदारी नहीं.

लोग डराने आए. समझौते की बात हुई. वो पैसे वाला होगा अपने घर का…” साहिल की बेबस मां ने कहा- मेरा बेटा भी मेरे घर का सब कुछ था. फर्क बस इतना है कि उसने कभी किसी की जान नहीं ली. आज भी साहिल का कमरा वैसा ही है. मेज पर उसकी ट्रॉफियां रखी हैं. दीवार पर मेडल टंगे हैं. और मां हर सुबह उनके सामने खड़ी होकर कहती हैं- मेरे बेटे की मौत जाया नहीं जायेगी.

उनकी आवाज़ अब सिर्फ़ एक मां की आवाज़ नहीं रही. वो हर उस मां की आवाज़ है, जो अपने बच्चे को सुरक्षित घर लौटते देखना चाहती है. वो हर उस सड़क के लिए पुकार है, जो रेस ट्रैक नहीं है. वो हर उस सिस्टम के लिए चुनौती है, जहां पैसा इंसाफ से बड़ा समझ लिया जाता है.

साहिल चला गया…

पर उसकी मां का साहस ज़िंदा है.

और जब तक न्याय नहीं मिलेगा,

वो डरेंगी नहीं- क्योंकि सच में…

अब उनके पास खोने को कुछ भी नहीं बचा.

DELHI NEWS
अगला लेख