150 की बेडशीट 450 में, 10 लाख की मशीन 33 लाख में- क्या है 600 करोड़ का दिल्ली हेल्थ स्कैम? 10 पॉइंट में समझें पूरा मामला और अब तक के एक्शन
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल सामान खरीद से जुड़े कथित ₹600 करोड़ का घोटाला सामने आया है. जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ सामान बाजार कीमत से कई गुना ज्यादा में खरीदे गए.
दिल्ली में ₹600 करोड़ का हुआ हेल्थ प्रोक्योरमेंट स्कैम
Delhi Rs 600 Crore Health Procurement Scam: दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल सामानों की खरीद को लेकर सामने आए कथित ₹600 करोड़ के प्रोक्योरमेंट स्कैम ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की FIR में आरोप लगाया गया है कि मेडिकल उपकरणों, दवाओं और अस्पताल की जरूरत के सामानों की खरीद में कीमत में भारी बढ़ोतरी हुई है. FIR के मुताबिक, कुछ सामानों में कीमतें सामान्य बाजार दरों से 200% से लेकर 500% तक ज्यादा दिखाई गई हैं.
जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, फर्जी कंपनियों के जरिए बोली लगाने और चुनिंदा सप्लायर को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई. मामले में DGHS (Directorate General of Health Services) से जुड़े अधिकारियों और सप्लायरों की भूमिका की जांच चल रही है. ACB ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है और अब दस्तावेजों व डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है.
पूरा मामला आसान भाषा में समझें
1. क्या है पूरा मामला?
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाली Central Procurement Agency (CPA) के जरिए अस्पतालों के लिए मेडिकल उपकरण, दवाएं और अन्य सामान खरीदे जाते हैं. FIR में आरोप लगाया गया है कि करीब ₹600 करोड़ की खरीद में नियमों की अनदेखी कर कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया.
2. किन सामानों में ज्यादा कीमत का आरोप?
Portable X-Ray Machine
- कीमत में बढ़ोतरी: करीब 230 फीसदी
- आरोप है कि मशीन करीब ₹10 लाख की जगह लगभग ₹33 लाख में खरीदी गई.
Bed Sheets और Linen
- कीमत में बढ़ोतरी: करीब 200 फीसदी
- आरोप है कि ₹150 वाली चादरें करीब ₹450 में खरीदी गईं.
C-Arm Radiology Equipment
- कीमत में बढ़ोतरी: करीब 340 फीसदी
- आरोप है कि ₹25 लाख की मशीन करीब ₹1.10 करोड़ में खरीदी गई.
ORS Sachets
- कीमत में बढ़ोतरी: करीब 500 फीसदी
- आरोप है कि ₹2.5 वाला ORS करीब ₹15 में खरीदा गया.
3. फर्जी कंपनियों और टेंडर में हेरफेर के आरोप
FIR में आरोप लगाया गया है कि कुछ फर्जी कंपनियां बनाई गईं और उन्हें अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर दिखाया गया. जांच एजेंसी का दावा है कि,
- टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई गईं कि दूसरे प्रतियोगी बाहर हो जाएं
- कुछ कंपनियां कम अनुभव के बावजूद योग्य घोषित की गईं
- तकनीकी दस्तावेजों को तेजी से मंजूरी दी गई
- ऑर्डर देने और भुगतान में असामान्य तेजी दिखाई गई
4. Portable X-Ray मशीन खरीद में क्या आरोप?
FIR के अनुसार शुरुआत में सिर्फ 2 मशीनों का टेंडर निकाला गया ताकि कम कंपनियां हिस्सा लें. बाद में कथित तौर पर 448 मशीनों का ऑर्डर एक कंपनी को दिया गया. ACB का आरोप है कि मशीनों की कीमत वास्तविक मूल्य से काफी ज्यादा दिखाई गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ.
5. ORS और मेडिकल सामान में गड़बड़ी का आरोप
FIR में आरोप है कि 50 लाख ORS पैकेट खरीदे गए. सामान्य कीमत ₹2.5 प्रति पैकेट है, लेकिन इसे ₹15 प्रति पैकेट के हिसाब से खरीदा गया. जांच एजेंसी के अनुसार, इससे करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ.
6. Local Chemist Tender पर सवाल
FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि राज्य स्तर पर सस्ते रेट में खरीद करने के बजाय Local Chemist Tender का इस्तेमाल ज्यादा किया गया. जांच एजेंसी के अनुसार, इससे अस्पतालों को महंगे दामों पर सामान खरीदना पड़ा और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ.
7. अब तक कौन-कौन जांच के घेरे में?
ACB ने मामले में कई अधिकारियों और सप्लायरों की भूमिका की जांच शुरू की है. गिरफ्तार किए गए लोगों में DGHS और CPA से जुड़े अधिकारी, सप्लायर और कथित बिचौलिए शामिल हैं.
8. ACB अब क्या जांच कर रही है?
जांच एजेंसी की नजर टेंडर दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड, ईमेल और डिजिटल रिकॉर्ड, कंपनियों के संबंधों और गायब रिकॉर्ड की तलाश पर है.
9- किसे किया गया गिरफ्तार?
दिल्ली की एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने गुरुवार को डॉ विनोद रंगा को गिरफ़्तार किया है. रंगा GNCTD के DGHS में सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के पूर्व हेड ऑफ़ ऑफिस थे. जांच एजेंसी ने घोटाले में DGHS अधिकारियों के अलावा रंगा और राजीव रंगीला (सप्लायर/लियाज़ोनर) का नाम शामिल किया है. इसके अलावा, ACB ने इस मामले में स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल और लेखा उप नियंत्रक नीरज चोपड़ा को भी गिरफ्तार किया है.
10- रंगीला पर क्या-क्या आरोप हैं?
- FIR के मुताबिक, रंगीला ने कथित तौर पर फर्जी मालिकों के नाम पर कई कंपनियां बनाई, जिनमें F Med Devices, Technocrats, Raj Shree, Ashi Surgical and Pharmaceuticals और M Sahib and Sons Pvt Ltd जैसी कंपनियों का नाम शामिल है. इन कंपनियों को पहले से तय मैन्युफैक्चरर कंपनियों की ओर से अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर पेश किया गया.
- इसके बाद रंगीला ने कथित तौर पर मैन्युफैक्चरर कंपनियों के साथ मिलकर टेंडर की शर्तें और तकनीकी स्पेसिफिकेशन इस तरह तैयार किए, जिससे चुनिंदा कंपनियों को फायदा मिल सके. ये दस्तावेज DGHS के अधिकारियों तक पहुंचाए गए और फिर टेंडर प्रक्रिया में शामिल किए गए.
- FIR के अनुसार, टेंडर कमेटी पर दबाव बनाए जाने का भी आरोप है. जांच एजेंसी का दावा है कि अधिकारियों को कार्रवाई की धमकी देकर कुछ शर्तों को मंजूरी दिलाने की कोशिश की गई, ताकि टेंडर में किसी तरह की रुकावट न आए.
- आरोप है कि जब टेंडर ई-प्रोक्योरमेंट और GeM पोर्टल पर डाले गए तो रंगीला से जुड़ी कंपनियों ने बोली लगाई. योग्यता की शर्तें इतनी सख्त रखी गईं कि अन्य कंपनियां बाहर हो गईं, जबकि रंगीला से जुड़ी कंपनियां कथित तौर पर कम अनुभव और कम योग्यता के बावजूद चयनित हो गईं.
- रंगीला द्वारा तैयार तकनीकी दस्तावेजों को बहुत कम समय में मंजूरी मिल गई. बोलियां खोले जाने के बाद कुछ मामलों में उसी दिन मैन्युअल तरीके से ऑर्डर जारी किए गए. इसके अलावा, कई टेंडर पूरे होने और भुगतान जारी होने के बाद भी GeM या ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर उन्हें ‘Active’ या ‘Process में’ दिखाया जाता रहा, जिससे टेंडर की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पाई.
- जांच एजेंसी का दावा है कि जहां पुराने सप्लायरों के भुगतान लंबे समय से लंबित थे, वहीं रंगीला से जुड़े टेंडरों में भुगतान तेजी से किया गया. हालांकि, ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.




