क्या है दिल्ली जिमखाना क्लब, जिसे कब्जे में लेगी सरकार? 37 साल से वेटिंग में लोग, जानें कितनी है मेंबरशिप फीस
दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे रसूखदार और एलीट क्लबों में गिना जाता है, जहां सदस्य बनने के लिए लोग 35-37 साल तक इंतजार करते हैं. अब केंद्र सरकार इस क्लब की जमीन अपने कब्जे में लेने जा रही है, क्योंकि यह प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब स्थित है. और सुरक्षा एजेंसियां इसे संवेदनशील इलाका मानती हैं.
Delhi Gymkhana Club
Delhi Gymkhana Club Explained: दिल्ली जिमखाना क्लब इस समय सुर्खियों में है. केंद्र सरकार ने इसकी 27.3 एकड़ जमीन को वापस लेने का आदेश दिया है. सरकार का कहना है कि इसका मकसद रक्षा अवसंरचना को मजबूत करना है. इस क्लब के रुतबे का अंदाजा आप इस बात से लगा कि यहां एंट्री लेने के लिए बड़े-बड़े धन्नासेठों की पूरी उमर बीत जाती है. यहां तक कि लाखों रुपये देने के बावजूद लोग वेटिंग लिस्ट में पड़े रहते हैं. फिर भी सदस्यता मिलेगी या नहीं, यह कन्फर्म नहीं होता. इस क्लब को दिल्ली की शान समझा जाता है.
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) ने यह आदेश जारी है. इसमें साफ शब्दों में कहा गया है कि वह 5 जून को इस क्लब को अपने कब्जे में ले लेगी. अगर इसमें कोई भी अड़चन आती है तो कानून के जरिए कार्रवाई की जाएगी.
दिल्ली जिमखाना क्लब क्या है?
दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने क्लबों में से एक है. इसकी शुरुआत ब्रिटिश काल के दौरान 3 जुलाई 1913 को हुई थी. शुरुआत में इसे 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' कहा जाता था, लेकिन देश को आजादी मिलने के बाद इसके नाम से 'इंपीरियल' शब्द हटा दिया गया. यह नई दिल्ली के सबसे महंगे और सुरक्षित इलाके 2, सफदरजंग रोड पर स्थित है. यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित और संभ्रांत (Elite) क्लबों में गिना जाता है. इसके सदस्यों में देश के शीर्ष राजनेता, नौकरशाह (आईएएस/आईपीएस), सैन्य अधिकारी और जाने-माने उद्योगपति शामिल रहे हैं.
वित्तीय गड़बड़ियों, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद वर्ष 2021 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के आदेश पर कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने क्लब के बोर्ड को निलंबित कर इसके प्रबंधन को अपने हाथ में ले लिया था. ट्रिब्यूनल ने क्लब की 'शाही मानसिकता' पर टिप्पणी करते हुए निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नई मेंबरशिप और वेटिंग लिस्ट पर रोक लगा दी थी. इस क्लब की सदस्यता पाना बेहद कठिन माना जाता रहा है, जहां गैर-सरकारी श्रेणी के लिए फीस लाखों में है. वेटिंग पीरियड भी 35 से 37 साल तक का होता था.
जिम खाना क्लब की कितनी है मेंबरशिप फीस?
जिम खाना क्लब की सदस्यता पाना बेहद मुश्किल और खर्चीला, लेकिन प्रतिष्ठित माना जाता है. सरकारी और गैर-सरकारी (Corporate/Private) आवेदकों के लिए इसकी फीस अलग-अलग होती है.
- सरकारी अधिकारी: आईएएस, आईपीएस और सैन्य अधिकारियों के लिए एंट्री फीस करीब 1.5 लाख से 2 लाख रुपये के बीच होती है.
- गैर-सरकारी/कॉर्पोरेट: आम नागरिकों या कॉर्पोरेट दिग्गजों के लिए यह फीस 7.5 लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये या उससे अधिक तक जा सकती है (समय-समय पर इसमें बदलाव होता रहता है).
- मासिक शुल्क: सदस्यता मिलने के बाद क्लब की सुविधाओं का उपयोग करने के लिए नियमित मेंटेनेंस और मंथली सब्सक्रिप्शन चार्ज भी देना होता है.
दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता के लिए कितना इंतजार करना पड़ता है?
- दिल्ली जिमखाना क्लब अपनी सख्त चयन प्रक्रिया और सीमित सीटों के लिए जाना जाता है. यदि कोई आम नागरिक (गैर-सरकारी श्रेणी) आज सदस्यता के लिए आवेदन करता है, तो उसका नंबर आने में 35 से 37 वर्ष तक का समय लग जाता है. कई बार लोग अपने बच्चों के जन्म के समय ही आवेदन कर देते हैं, ताकि वे युवा होने पर सदस्य बन सकें.
- क्लब के मौजूदा सदस्यों के बच्चों (जिन्हें 'U-Form' आवेदक कहा जाता है) को प्राथमिकता मिलती है, जिससे आम लोगों के लिए वेटिंग और लंबी हो जाती है.
- क्लब में कुल सदस्यों की संख्या निश्चित है. नया सदस्य तभी बन सकता है जब किसी पुराने सदस्य की मृत्यु हो जाए या वह सदस्यता छोड़ दे.
आखिर लोग दिल्ली जिम खाना क्लब की सदस्यता क्यों लेना चाहते हैं?
लोग दिल्ली जिमखाना क्लब (DGC) की सदस्यता पाने के लिए दशकों तक इंतजार इसलिए करते हैं, क्योंकि यह सिर्फ एक क्लब नहीं, बल्कि भारत के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली लोगों का एक बंद नेटवर्क है. इसकी सदस्यता हासिल करने के पीछे कई वजहें हैं;
- यहां देश के प्रधानमंत्री के सलाहकार, सुप्रीम कोर्ट के जज, कैबिनेट सचिव (IAS), सेनाध्यक्ष, और बड़े उद्योगपति शाम को कॉफी या ड्रिंक पर मिलते हैं. आम तौर पर जिन अधिकारियों या नेताओं से मिलने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है, वे यहां बेहद अनौपचारिक (informal) माहौल में मिल जाते हैं. यहाँ की नेटवर्किंग से बड़े-बड़े प्रशासनिक और व्यावसायिक काम आसान हो जाते हैं.
- लुटियंस दिल्ली के इस क्लब का मेंबर होने का मतलब है कि आप समाज के सबसे ऊपरी पायदान (Cream de la cream) पर हैं. समाज में इस मेंबरशिप को एक बहुत बड़ा स्टेटस सिंबल माना जाता है.
- चूंकि यहां आम लोगों की एंट्री नहीं है और वेटिंग लिस्ट 37 साल की है, इसलिए जिसके पास भी इसकी मेंबरशिप होती है, उसे बेहद 'खास' माना जाता है.
- यह क्लब नई दिल्ली के सबसे महंगे और सुरक्षित 'सफदरजंग रोड' पर स्थित है. चारों तरफ वीवीआईपी (VVIP) सुरक्षा और शांति है. इसके अलावा, 27 एकड़ का हरा-भरा परिसर लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है.
- यहां देश के सबसे बेहतरीन ग्रास टेनिस कोर्ट्स (Grass Tennis Courts), विश्वस्तरीय स्विमिंग पूल, स्क्वैश कोर्ट्स, कार्ड रूम्स और एक बेहद समृद्ध लाइब्रेरी है.
- क्लब के अंदर मिलने वाला खाना, शराब और ठहरने के लिए लक्जरी कमरे (Cottages) देश के किसी भी फाइव-स्टार होटल के टक्कर के होते हैं, लेकिन इनकी कीमत बाजार से बेहद कम (सब्सिडाइज्ड रेट पर) होती है.
- यहां आज भी अंग्रेजों के जमाने का शिष्टाचार (Dress Code), लाइव बैंड, और पुरानी वास्तुकला (Architecture) का अनुभव मिलता है, जो लोगों को आकर्षित करता है.
- क्लब के नियम ऐसे हैं कि मौजूदा सदस्यों के बच्चों (U-Form applicants) को मेंबरशिप मिलने में प्राथमिकता मिलती है. इसलिए माता-पिता चाहते हैं कि वे सदस्य बन जाएं, ताकि उनकी आने वाली पीढ़ी को भी यह रसूखदार माहौल और नेटवर्क विरासत में मिल सके.
सरकार क्यों जिम खाना क्लब को कब्जे में ले रही है?
दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने का फैसला केवल लीज खत्म होने या प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे बड़े रणनीतिक और सुरक्षा कारण बताए जा रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने वीवीआईपी इलाकों, खासकर प्रधानमंत्री आवास और उसके आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर विशेष फोकस किया है.
जिमखाना क्लब प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब स्थित है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में सदस्य, मेहमानों और विदेशी नागरिकों की आवाजाही होती है. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस पूरे क्षेत्र को ज्यादा नियंत्रित और पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही थीं. माना जा रहा है कि भविष्य में इस जमीन का इस्तेमाल रक्षा मंत्रालय से जुड़े संवेदनशील दफ्तरों या राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित विशेष इकाइयों के विस्तार के लिए किया जा सकता है.




