क्या है Article 21, जिसका सुप्रीम कोर्ट ने किया जिक्र, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर क्या दिल्ली पुलिस को दे दी खुली छूट?
अनुच्छेद 21 क्या है और सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों से गैंगरेप के मामलों की सुनवाई के दौरान इसका जिक्र क्यों किया? जानकार इसे पुलिस को एक इशारे के तौर पर देख रहे हैं.
दिल्ली-NCR में नाबालिग लड़कियों से गैंगरेप के हालिया मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि यह भारत जैसा देश है और सिर्फ कागजों पर कार्रवाई दिखाना काफी नहीं है. पुलिस को जमीन पर कार्रवाई करनी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को थोड़ा सख्त रुख अपनाना पड़े तो उसे इससे पीछे नहीं हटना चाहिए.
कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ लोग सख्ती के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दे सकते हैं, लेकिन पुलिस को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पिछले करीब दो महीनों में नाबालिगों से गैंगरेप के तीन मामलों पर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है. ये तीन मामले ग्रेटर नोएडा-दिल्ली बस, दिल्ली के आस्था कुंज पार्क और स्वरूप नगर से जुड़े हैं.
क्या है संविधान का अनुच्छेद 21?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है. यह संविधान के भाग-3 में शामिल मौलिक अधिकारों का हिस्सा है. अनुच्छेद 21 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को उसकी जिंदगी या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से कानून के जरिए तय प्रक्रिया के अलावा किसी अन्य तरीके से वंचित नहीं किया जा सकता. जब भी पुलिस एनकाउंटर करती है तो अकसर इसी अनुच्छेद का हवाला दिया जाता है. यह अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशियों यानी गैर-नागरिकों को भी प्राप्त है.
अनुच्छेद 21 के अंतर्गत और किन अधिकारों को माना गया है?
- निजता का अधिकार
- विदेश जाने का अधिकार
- आश्रय का अधिकार
- एकांत परिरोध के खिलाफ अधिकार
- सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तीकरण का अधिकार
- हथकड़ी लगाए जाने के खिलाफ अधिकार
- हिरासत में होने वाली मौत से सुरक्षा का अधिकार
- न्याय में देरी से जुड़े मामलों में अधिकार
- डॉक्टरों की सहायता का अधिकार
- सार्वजनिक रूप से फांसी के खिलाफ अधिकार
- सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का अधिकार
- प्रदूषण मुक्त जल और वायु का अधिकार
- प्रत्येक बच्चे के पूर्ण विकास का अधिकार
- स्वास्थ्य और चिकित्सा सहायता का अधिकार
- शिक्षा का अधिकार
- विचाराधीन कैदियों की सुरक्षा का अधिकार
पिछले दो महीनों में कितने आए रेप के मामले?
4 अगस्त: चलती बस में 16 साल की नाबालिग से गैंगरेप: दिल्ली में एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ चलती बस में गैंगरेप का मामला सामने आया था. लड़की ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में सवार हुई थी. आरोप है कि उसे कश्मीरी गेट पर बस से उतारा गया. इस दौरान बस ने करीब 47 किलोमीटर की दूरी तय की. बस की खिड़कियों पर पर्दे भी लगे हुए थे.
12 सितंबर: नाबालिग से गैंगरेप के बाद हत्या: 12 सितंबर को दिल्ली के स्वरूप नगर में एक 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप और हत्या का मामला सामने आया. अगले दिन उसका शव खेत के पास एक खुले इलाके में मिला था. इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार आरोपियों में तीन नाबालिग बताए गए हैं.
21 सितंबर: आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से गैंगरेप: 21 सितंबर को दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास स्थित आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की अपने दोस्त के साथ बैठी थी. आरोप है कि तीन युवक खुद को पुलिसकर्मी बताकर वहां पहुंचे और छात्रा के साथ गैंगरेप किया. पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या की टिप्पणी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खराब रोशनी, पर्याप्त निगरानी की कमी और पुलिस की कम गश्त जैसी वजहों से सार्वजनिक जगहों को 'हाई रिस्क जोन' नहीं बनने दिया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पीड़ितों के प्रति सहानुभूति जताना समाधान नहीं है. अपराधों को रोकने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की है, उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए. अदालत ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों और महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाओं पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है.
आस्था कुंज मामले पर कोर्ट ने क्या कहा?
आस्था कुंज पार्क में हुई घटना का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लेडी श्रीराम कॉलेज यानी LSR कॉलेज की छात्राओं ने पहले भी वहां यौन उत्पीड़न की शिकायतें की थीं. कोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार नहीं किए गए. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सम्मान के साथ और हिंसा से मुक्त होकर जीना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है.




