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32 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, कौन थे Appy Raja? 'टूरा भोको लोलो' से बने थे छत्तीसगढ़ी रैप के सुपरस्टार

Appy Raja Death News: जानिए छत्तीसगढ़ी रैपर चेतन चांडक उर्फ Appy Raja की पूरी कहानी, संघर्ष, करियर, हिट गाने और सफलता का सफर.

32 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, कौन थे Appy Raja? टूरा भोको लोलो से बने थे छत्तीसगढ़ी रैप के सुपरस्टार
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( Image Source:  @TarunaaSahu08-X )

छत्तीसगढ़ी संगीत जगत को बड़ा झटका तब लगा जब लोकप्रिय रैपर और सिंगर एप्पी राजा उर्फ चेतन चांडक के निधन की खबर सामने आई. महज 32 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. पिछले कुछ महीनों से वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और रायपुर में उनका इलाज चल रहा था.

उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों, कलाकारों और संगीत प्रेमियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. लेकिन एप्पी राजा सिर्फ एक रैपर नहीं थे. वे उस नई पीढ़ी की आवाज थे जिसने छत्तीसगढ़ी भाषा को रैप और हिप-हॉप के मंच पर पहचान दिलाने का काम किया.

बस्तर के छोटे कस्बे से शुरू हुआ सफर

एप्पी राजा का असली नाम चेतन चांडक था. उनका जन्म छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में हुआ था. नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र से निकलकर संगीत की दुनिया में पहचान बनाना आसान नहीं था, लेकिन चेतन ने कम उम्र में ही तय कर लिया था कि उन्हें कुछ अलग करना है. महज 13-14 साल की उम्र से ही वे रैप लिखने लगे थे. उस दौर में जब छत्तीसगढ़ी रैप का कोई बड़ा मंच नहीं था, तब उन्होंने अपनी भाषा और अपने अंदाज को पहचान दिलाने का सपना देखा.

आर्थिक तंगी ने रोका, लेकिन जुनून नहीं टूटा

एप्पी राजा की जिंदगी संघर्षों से भरी रही. जब वह 11वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी उनके पिता को हार्ट अटैक आया. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी. घर चलाने के लिए उनकी मां ने सिलाई का काम शुरू किया. परिवार की मदद के लिए एप्पी गुजरात के सूरत चले गए, जहां उन्होंने कपड़ों की दुकान में नौकरी की. कुछ हजार रुपये की नौकरी से घर का खर्च तो चल रहा था, लेकिन उनका मन संगीत में ही बसता था. आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ दी और वापस छत्तीसगढ़ लौट आए.

पंजाब से मिला पहला बड़ा ब्रेक

साल 2015 उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. पंजाब की एक म्यूजिक कंपनी ने उनका रैप सुनने के बाद रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया. यह मौका उनके लिए सपने जैसा था. पंजाब पहुंचने के बाद उन्होंने अपना पहला प्रोफेशनल रैप रिकॉर्ड किया. वहां उनकी मुलाकात कई संगीतकारों से हुई, जिन्होंने उनके हुनर को पहचाना. पंजाबी म्यूजिक डायरेक्टर सरजीत शानू ने उन्हें अपने स्टूडियो में रहने तक की जगह दी. यहीं से एप्पी राजा के करियर ने रफ्तार पकड़नी शुरू की.

'टूरा भोको लोलो' ने रातों-रात बना दिया स्टार

एप्पी राजा को सबसे बड़ी पहचान उनके सुपरहिट रैप सॉन्ग 'टूरा भोको लोलो' से मिली. दिलचस्प बात यह है कि यह गाना उन्होंने काफी पहले लिख लिया था, लेकिन रिकॉर्डिंग के लिए उनके पास पैसे और संसाधन नहीं थे. जब यह गीत रिलीज हुआ तो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. युवाओं ने इसे हाथों-हाथ लिया और देखते ही देखते एप्पी राजा छत्तीसगढ़ी संगीत की नई सनसनी बन गए.

सिर्फ मनोरंजन नहीं, सामाजिक विषयों पर भी बनाए गीत

एप्पी राजा केवल पार्टी या मनोरंजन वाले गानों तक सीमित नहीं रहे. उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पर 'ट्रिब्यूट टू डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम' नाम से रैप तैयार किया. इसके अलावा उन्होंने शहीद भगत सिंह, स्वतंत्रता दिवस और सामाजिक विषयों पर भी कई गीत बनाए. यही वजह थी कि उन्हें सिर्फ रैपर नहीं, बल्कि युवा सोच की आवाज भी माना जाता था.

सोशल मीडिया पर था जबरदस्त क्रेज

एप्पी राजा की लोकप्रियता केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं थी. इंस्टाग्राम पर उनके करीब 2 लाख फॉलोअर्स थे, जबकि यूट्यूब पर लगभग 6 लाख सब्सक्राइबर्स उनसे जुड़े हुए थे. उनके चैनल पर करोड़ों व्यूज आ चुके थे और देश-विदेश में रहने वाले छत्तीसगढ़ी समुदाय के बीच उनके गीत बेहद लोकप्रिय थे.

छत्तीसगढ़ी रैप की पहचान बन गए थे एप्पी राजा

जिस समय छत्तीसगढ़ी संगीत मुख्य रूप से लोकगीतों और पारंपरिक शैली तक सीमित था, उस समय एप्पी राजा ने रैप को स्थानीय भाषा और संस्कृति से जोड़कर एक नई पहचान दी. उन्होंने साबित किया कि क्षेत्रीय भाषा में भी आधुनिक संगीत का बड़ा बाजार तैयार किया जा सकता है. आज भले ही एप्पी राजा हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत, उनकी आवाज और संघर्ष से भरी उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर हमेशा जीवित रहेगी.

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