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पटना में 'डॉग बाबू' को मिला निवास प्रमाण पत्र! सर्टिफिकेट जारी करने वाले पर जानें क्या हुआ एक्शन

हाल ही में बिहार के प्रशासनिक सिस्टम में लापरवाही इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है जिससे प्रशासन दंग रह गया है. दरअसल एक कुत्ते के नाम पर आवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया है. जिसमें कुत्ते के माता पिता का भी जिक्र है. सोशल मीडिया पर यह आवास प्रमाण पत्र तेजी से वायरल हो रहा है.

पटना में डॉग बाबू को मिला निवास प्रमाण पत्र! सर्टिफिकेट जारी करने वाले पर जानें क्या हुआ एक्शन
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( Image Source:  META AI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय2 Mins Read

Updated on: 4 Dec 2025 1:30 PM IST

बिहार की राजधानी पटना में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मसौढ़ी अंचल में 'डॉग बाबू' के नाम से निवास प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया, जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया. इस डिजिटल फर्जीवाड़े के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों पर गाज गिरा दी है.

यह मामला न केवल डिजिटल वेरिफिकेशन की कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अब सरकार ऐसे मामलों में सख्त रवैया अपना रही है. पटना डीएम त्यागराजन एसएम को इस पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है, जबकि दोषी अधिकारियों पर निलंबन और सेवा समाप्ति जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं.

कैसे हुआ ‘डॉग बाबू’ को प्रमाण-पत्र जारी?

जांच में यह बात सामने आई है कि 15 जुलाई 2025 को दिल्ली की एक महिला के आधार कार्ड का उपयोग कर ऑनलाइन आवेदन किया गया था. आवेदन के साथ संलग्न दस्तावेजों का बिना उचित सत्यापन किए ही निवास प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया. राजस्व अधिकारी और आईटी सहायक द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया में लापरवाही की गई, जिससे यह फर्जीवाड़ा संभव हुआ.

सस्पेंशन और सेवा समाप्ति की कार्रवाई

जैसे ही मामला उजागर हुआ, जिला प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई की. राजस्व अधिकारी मुरारी चौहान को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, जबकि आईटी सहायक की सेवा तुरंत समाप्त कर दी गई है. साथ ही, अज्ञात आवेदक सहित दोनों अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत एफआईआर भी दर्ज कर दी गई है.

प्रमाण-पत्र रद्द, अब होगी AI निगरानी

'डॉग बाबू' के नाम से जारी किया गया निवास प्रमाण-पत्र अब रद्द कर दिया गया है. बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि NIC के सर्विस प्लस पोर्टल पर दस्तावेजों के सत्यापन में सख्ती बरती जाए. जल्द ही पोर्टल पर AI आधारित वेरिफिकेशन की भी शुरुआत की जाएगी, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके.

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