बाढ़ ने फिर डुबोया असम, जानिए कितने लोग प्रभावित, कितनी हुई मौतें, हर साल क्यों आता है ऐसा संकट?
सम एक बार फिर भीषण बाढ़ की चपेट में है. लगातार हुई भारी बारिश और नदियों के उफान ने राज्य के कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. बाढ़ से अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है.
हर साल असम में क्यों आती है बाढ़
असम एक बार फिर भीषण बाढ़ की चपेट में है. राज्य में बाढ़ से अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2.3 लाख लोग 16 जिलों में इस आपदा से प्रभावित हैं. हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है और बड़ी संख्या में खेती की जमीन भी पानी में डूब गई है.
हर साल मानसून के दौरान असम में बाढ़ एक बड़ी समस्या बन जाती है. इसकी सबसे बड़ी वजह ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का उफान, पहाड़ी इलाकों से आने वाला भारी पानी, लगातार बारिश और नदियों में गाद (सिल्ट) का जमा होना है. यही कारण है कि हर साल बारिश के मौसम में असम के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं.
असम में अभी क्या हैं बाढ़ के हालात?
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है. मंगलवार को अकेले 21 लोगों की मौत दर्ज की गई. इनमें सबसे ज्यादा मौतें शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट और जोरहाट जिलों में हुई हैं. हालांकि अच्छी बात यह है कि पिछले कुछ दिनों के मुकाबले बारिश कम हुई है, जिससे कई इलाकों में पानी धीरे-धीरे उतरना शुरू हुआ है. फिर भी हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं.
कितने लोग हुए प्रभावित?
बाढ़ का असर अब भी 16 जिलों में देखा जा रहा है. करीब 2.3 लाख लोग इस आपदा से प्रभावित हैं. करीब 12,700 लोग 52 राहत शिविरों में रह रहे हैं. अकेले शिवसागर जिले में लगभग 5,000 लोग राहत कैंपों में हैं. बाढ़ की वजह से लगभग 14,400 हेक्टेयर कृषि भूमि भी पानी में डूबी हुई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है.
राहत और बचाव का काम कैसे चल रहा है?
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेजी से जारी है. भारतीय वायुसेना (IAF) के Mi-17 हेलीकॉप्टर फंसे हुए लोगों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं. हाल ही में हेलीकॉप्टर के जरिए 600 किलोग्राम से ज्यादा राहत सामग्री पहुंचाई गई. इसके अलावा प्रभावित इलाकों का सही आकलन करने के लिए ड्रोन की मदद से सर्वे किया जा रहा है, ताकि नुकसान का पता लगाकर आगे की कार्रवाई की जा सके.
किन नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर?
असम की कई नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. इनमें ब्रह्मपुत्र, देसांग, बुरीदिहिंग, दिखौ और धनसिरी शामिल है. देसांग नदी का जलस्तर इस बार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया, हालांकि अब इसमें धीरे-धीरे कमी आने लगी है.
रेल और सड़क सेवाओं पर भी असर
बाढ़ का असर केवल गांवों तक सीमित नहीं है. कई सड़कों को नुकसान पहुंचा है और कुछ तटबंध भी टूट गए हैं. रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं. कई ट्रेनों का रास्ता बदला गया है, कुछ ट्रेनें रद्द की गई हैं, जबकि यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं.
हर साल असम में बाढ़ क्यों आती है?
- मानसून के दौरान असम और आसपास के पहाड़ी इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश होती है. इससे नदियों में अचानक पानी बढ़ जाता है.
- असम से होकर बहने वाली ब्रह्मपुत्र और उसकी कई सहायक नदियां तेज बहाव के साथ मैदानों में आती हैं. ज्यादा पानी होने पर ये नदियां आसानी से किनारे तोड़ देती हैं.
- अरुणाचल प्रदेश, भूटान और आसपास के पहाड़ी इलाकों में होने वाली बारिश का पानी भी असम की नदियों में आ जाता है, जिससे बाढ़ और गंभीर हो जाती है.
- हर साल नदियों में गाद (सिल्ट) जमा होती रहती है. इससे नदी की गहराई कम हो जाती है और पानी जल्दी बाहर फैल जाता है.
- विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम और कम समय में होने वाली अत्यधिक बारिश भी बाढ़ की घटनाओं को और गंभीर बना रही है.
आगे क्या है उम्मीद?
मौसम विभाग ने अगले दो-तीन दिनों में बहुत भारी बारिश की संभावना कम बताई है. अगर मौसम इसी तरह बना रहा, तो उम्मीद है कि धीरे-धीरे जलस्तर घटेगा और बाढ़ की स्थिति में सुधार आएगा. हालांकि प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति लौटने और लोगों की जिंदगी पटरी पर आने में अभी कुछ समय लग सकता है.




