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Explainer: असम में बाढ़ ने क्यों मचाई भीषण तबाही? अब तक 5 लोगों की मौत, 57 हजार से ज्यादा प्रभावित- जानिए क्या है 'ऑपरेशन जल राहत'

असम में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है. अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 57 हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं. सेना ने 'ऑपरेशन जल राहत' शुरू कर दिया है. नदियों का जलस्तर, तटबंध टूटना और रेल-फेरी सेवाएं ठप होने से हालात और चुनौतीपूर्ण बन गए हैं.

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असम में बाढ़ से भीषण तबाही

Assam Flood 2026 Explained: पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले असम में एक बार फिर मानसून ने तबाही मचा दी है. इस बार बाढ़ केवल नदी किनारे के गांवों तक सीमित नहीं रही, बल्कि रेलवे नेटवर्क, सड़क संपर्क, कृषि, पशुपालन और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर असर पड़ा है. राज्य के सात से आठ जिलों में 57 हजार से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं और पांच लोगों की मौत हो चुकी है.

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना को स्टैंडबाय पर रखने का अनुरोध करना पड़ा. इसके बाद सेना ने 'ऑपरेशन जल राहत' शुरू कर दिया... लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस बार असम में बाढ़ इतनी तेजी से क्यों बढ़ी? इसका असर किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा पड़ा? और आगे क्या चुनौतियां सामने हैं?

आखिर असम में इतनी भीषण बाढ़ क्यों आई?

इस बार बाढ़ की सबसे बड़ी वजह नागालैंड और ऊपरी असम में लगातार हुई भारी बारिश है. असम की अधिकांश नदियां अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के पहाड़ी इलाकों से निकलती हैं. जब वहां अत्यधिक वर्षा होती है तो कुछ ही घंटों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है.

क्या बोले जल संसाधन मंत्री?

जल संसाधन मंत्री सुशांत बोर्गोहाईं के मुताबिक, इस बार नागालैंड में रिकॉर्ड बारिश हुई, जिसके कारण भोगदोई, बुरहीदिहिंग और दिकहौ जैसी नदियां उफान पर आ गईं. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इस इलाके में इतनी भीषण बाढ़ नहीं देखी. उनके अनुसार पूरी सरकारी मशीनरी लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी है.

किन जिलों में पड़ा बाढ़ का सबसे ज्यादा असर?

  • चराइदेव
  • धेमाजी
  • डिब्रूगढ़
  • शिवसागर
  • जोरहाट
  • तिनसुकिया
  • उदलगुड़ी
  • लखीमपुर

इनमें चराइदेव और धेमाजी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां हजारों लोग बाढ़ के पानी में घिर गए. करीब 298 गांव जलमग्न हो चुके हैं जबकि लगभग 3,875 हेक्टेयर कृषि भूमि बर्बाद हो गई है.

भोगदोई नदी का तटबंध टूटने से संकट और बढ़ा

सोमवार तड़के जोरहाट में भोगदोई नदी ने कई स्थानों पर तटबंध तोड़ दिए. इसका सबसे ज्यादा असर अलेनगमोरा, सोनारी गांव, खुतीयापतिया, माजियाभेड़ी और कटियामोर चुक जैसे इलाकों में देखने को मिला. स्थानीय लोगों का कहना है कि 1988 के बाद पहली बार उन्होंने नदी का इतना भयावह रूप देखा.

तटबंध टूटने का मतलब सिर्फ पानी भरना नहीं होता. इसके बाद तेज बहाव सीधे गांवों में प्रवेश करता है, जिससे लोगों को सामान समेटने तक का समय नहीं मिलता.

ऑपरेशन जल राहत क्या है?

स्थिति गंभीर होने पर असम सरकार ने सेना की मदद मांगी. इसके बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन जल राहत' शुरू किया. इस अभियान के तहत;

  • फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.
  • नावों और विशेष उपकरणों से रेस्क्यू किया जा रहा है.
  • राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है.
  • स्थानीय प्रशासन के साथ संयुक्त अभियान चल रहा है.
  • भारतीय वायुसेना को भी जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट और हवाई राहत अभियान के लिए तैयार रखा गया है.

राहत शिविरों में कैसी स्थिति है?

प्रशासन ने कई राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र बनाए हैं. अब तक;

  • सैकड़ों विस्थापित लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं.
  • चावल, दाल, नमक और सरसों तेल का वितरण किया गया है.
  • पशुओं के लिए भी सहायता शुरू की गई है.
  • हालांकि प्रभावित गांवों में पीने के पानी की भारी कमी सामने आ रही है.

रेलवे नेटवर्क क्यों ठप हो गया?

बाढ़ का सबसे बड़ा असर रेलवे नेटवर्क पर भी पड़ा. दिकहौ नदी के उफान के बाद सिमालुगुड़ी रेलवे यार्ड पूरी तरह पानी में डूब गया. इसके कारण कई इंटरसिटी ट्रेनें रद्द हुईं और लंबी दूरी की ट्रेनों का रूट बदला गया, जिससे सैकड़ों यात्री लुमडिंग जंक्शन पर फंस गए. इससे नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने सुरक्षा कारणों से अगले आदेश तक सिमालुगुरी-नामटियाली और सिमालुगुरी-सेलेनघाट सेक्शन के बीच ट्रेनों की आवाजाही रोक दी.

लोगों ने क्या शिकायत की और NRF ने क्या कहा?

  • कई लोगों ने आरोप लगाया कि रेलवे अधिकारियों ने उनकी बहुत कम मदद की. इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनें रद्द होने के बावजूद उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया.
  • भीड़ कम करने के लिए, NFR ने ऊपरी असम की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए लुमडिंग जंक्शन से जोरहाट तक एक स्पेशल ट्रेन चलाई. हालांकि, यह भी यात्रियों की बड़ी संख्या के लिए नाकाफ़ी साबित हुई.
  • बाद में लुमडिंग डिवीज़न ने स्टेशन पर यात्रियों की मदद के लिए एक हेल्प बूथ बनाया गया, ताकि उन्हें ट्रेनों के समय के बारे में जानकारी दी जा सके, अपडेट दिए जा सकें और यात्रा के वैकल्पिक इंतज़ामों के बारे में बताया जा सके.
  • बाढ़ के कारण 55914 तिनसुकिया-जोरहाट टाउन पैसेंजर, 75602 तिनसुकिया-लुमडिंग डेमू, 15604 लेडो-गुवाहाटी इंटरसिटी एक्सप्रेस, 15968 लेडो-रंगिया इंटरसिटी एक्सप्रेस और 55910 डिब्रूगढ़-सिमालुगुरी पैसेंजर ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं.
  • इनके अलावा, NFR ने जोरहाट टाउन–तिनसुकिया पैसेंजर, लुमडिंग–तिनसुकिया DEMU, रंगिया–न्यू तिनसुकिया इंटरसिटी एक्सप्रेस, सिमालुगुरी–डिब्रूगढ़ पैसेंजर और गुवाहाटी–लेडो इंटरसिटी एक्सप्रेस को भी रद्द कर दिया.
  • कई राजधानी, विवेक एक्सप्रेस और दूसरी लंबी दूरी की ट्रेनों का रूट बदलकर उन्हें रंगिया–रंगापारा–डिब्रूगढ़ रूट से चलाया गया.
  • बाढ़ की वजह से कई ट्रेनों की यात्रा बीच में ही रोक दी गई या उन्हें वहीं से शुरू किया गया.
  • रूट बदली गई ट्रेनों में फंसे यात्रियों की मदद के लिए रेलवे ने खाने के पैकेट, पीने का पानी, टिकट रिफंड और स्टेशनों पर हेल्प डेस्क का इंतज़ाम किया.
  • यात्रियों को सिबसागर टाउन स्टेशन तक ले जाने के लिए नामटियाली में ASTC बसें और लोकल गाड़ियां लगाई गईं, जहां से डिब्रूगढ़ और न्यू तिनसुकिया के लिए एक स्पेशल ट्रेन चलाने की योजना थी.
  • NFR ने उन यात्रियों के लिए आगे की यात्रा का इंतज़ाम भी किया जो सेलेनघाट और मारियानी में रोकी गई ट्रेनों में फंसे हुए थे.

रेलवे अधिकारियों ने कहा कि सर्विस फिर से शुरू करने से पहले प्रभावित ट्रैक सेक्शन की लगातार निगरानी और जांच की जा रही है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले ट्रेन की ताज़ा स्थिति देख लें. रेलवे ने विशेष ट्रेन, हेल्प डेस्क, भोजन और पानी की व्यवस्था की, लेकिन यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा. यह घटना दिखाती है कि मानसून के दौरान ऊपरी असम का रेल नेटवर्क कितना संवेदनशील है.

माजुली का संपर्क क्यों टूटा?

ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर बढ़ने से निमाटी-माजुली फेरी सेवा अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई. इसका असर मरीजों, छात्रों, व्यापारियों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ा. कई मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच सके क्योंकि फेरी घाट पानी में डूब गए.

बाढ़ का कृषि और पशुपालन पर असर

असम की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है. इस बार हजारों हेक्टेयर धान के खेत डूब गए. हजारों पशु और पोल्ट्री प्रभावित हुए और ग्रामीणों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया. विशेषज्ञों का मानना है कि पानी उतरने के बाद भी किसानों को सामान्य स्थिति में लौटने में कई महीने लग सकते हैं.

सरकार क्या कर रही है?

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने चार कैबिनेट मंत्रियों को प्रभावित जिलों में भेजा. सांसदों और विधायकों को क्षेत्र में रहने के निर्देश दिए. सेना और एयरफोर्स को तैयार रहने को कहा. राहत और पुनर्वास कार्य तेज करने के आदेश दिए.

आगे सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

मौसम विभाग के अनुसार यदि ऊपरी कैचमेंट क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है तो जलस्तर और बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तीन चुनौतियां सबसे बड़ी होंगी,

  • नए इलाकों में बाढ़ फैलने से रोकना.
  • राहत शिविरों में स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना.
  • सड़क और रेलवे संपर्क जल्द बहाल करना.

असम की मौजूदा बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नदी प्रबंधन, तटबंधों की मजबूती, परिवहन नेटवर्क और आपदा तैयारी की भी बड़ी परीक्षा बन गई है. सेना के ऑपरेशन जल राहत और राज्य सरकार की राहत कार्रवाई ने हालात संभालने की कोशिश जरूर शुरू कर दी है, लेकिन लगातार बारिश के बीच आने वाले कुछ दिन असम के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं.

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