भूखे पेट ट्रेनिंग, छेड़खानी के बाद मां ने कराया जूडो में दाखिला... एशियाई खेलों में इतिहास रचने वाली सुचिका तारियाल कौन?
एशियन खेलों में भारत की 36 वर्षीय सुचिका तारियाल ने देश के लिए पहला मेडल पक्का कर दिया है. मिश्रित मार्शल आर्ट के 60 किलोग्राम वर्ग के क्वार्टर फाइनल को जीतकर सुचिका ने सेमीफाइनल में जगह बना लगी है.
Suchika Tariyal
भारत की सुचिका तारियाल ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए पहला पदक पक्का कर दिया है. महिलाओं की मिश्रित मार्शल आर्ट के 60 किलोग्राम वर्ग के क्वार्टर फाइनल में सुचिका ने मंगोलिया की अल्तांचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली. 36 वर्षीय सुचिका सोमवार को अंतिम चार के मुकाबले में उतरेंगी.
सेमीफाइनल में हारने वाली दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक मिलने के नियम के कारण सुचिका का सेमीफाइनल तक पहुंचना ही भारत का पदक पक्का करता है. सुचिका तारियाल की इस उपलब्धि के पीछे संघर्ष और दृढ़ संकल्प की लंबी कहानी है.
कौन हैं सुचिका तारियाल?
16 अगस्त 1990 को जन्मीं सुचिका ने अपने खेल करियर की शुरुआत जूडो से की थी. बाद में उन्होंने कुराश और जिउ-जित्सु में भी अपनी पहचान बनाई और अब मिश्रित मार्शल आर्ट्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. उनके खेल सफर में परिवार, खासकर उनकी मां की भूमिका बेहद अहम रही है. सुचिका जब महज 12 साल की थीं, तब उनके साथ छेड़खानी की एक घटना हुई.
इस घटना के बाद उनके भीतर काफी गुस्सा था. उनकी मां ने इस गुस्से को गलत दिशा में जाने देने के बजाय खेल के जरिए सकारात्मक रूप देने का फैसला किया. समाज की परवाह किए बिना उन्होंने सुचिका का दाखिला जूडो क्लास में करा दिया. यहीं से मार्शल आर्ट्स की दुनिया में उनके सफर की शुरुआत हुई और आगे चलकर यही खेल उनके जीवन की पहचान बन गया.
कैसे रहे ट्रेनिंग के मुश्किल दिन?
सुचिका के शुरुआती दिनों का सफर आसान नहीं था. कई बार ट्रेनिंग या प्रतियोगिताओं के लिए यात्रा करने तक के पैसे जुटाना मुश्किल होता था. उन्होंने खुद बताया है कि आर्थिक परेशानियों के बावजूद उनके माता-पिता ने उनका हौसला कम नहीं होने दिया. कई मौकों पर उन्हें भूखे पेट भी रहना पड़ा, लेकिन परिवार ने उनकी खेल यात्रा में बाधा नहीं आने दी. माता-पिता के इसी समर्थन ने सुचिका को लगातार मेहनत करने और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की ताकत दी.
कैसा रहा जूडो से MMA तक का सफर?
सुचिका ने खेल की शुरुआत जूडो से की और इसके बाद उन्होंने कुराश, जिउ-जित्सु और मिश्रित मार्शल आर्ट्स (MMA) में भी अपनी प्रतिभा दिखाई. अलग-अलग मार्शल आर्ट्स में अनुभव हासिल करने के कारण उनके खेल में विविधता आई. साल 2024 में वह जिउ-जित्सु की विश्व चैंपियन बनीं. इससे पहले वह 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो और 2023 हांगझोऊ एशियाई खेलों में कुराश में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.
सुचिका तारियाल एशियाई MMA चैंपियनशिप में दो बार कांस्य पदक अपने नाम कर चुकी हैं. इसके अलावा वह पांच बार की राष्ट्रीय चैंपियन भी रह चुकी हैं. उनका खेल सफर सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं रहा. वह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में हेड कांस्टेबल के रूप में भी सेवा दे चुकी हैं.
टीवी शो में आजमाया हाथ
सुचिका तारियाल ने खेल के मैदान के बाहर भी अपनी पहचान बनाई है. वह टीवी रियलिटी शो MTV Roadies में कंटेस्टेंट के रूप में नजर आ चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने Amazon Prime Video के शो 'इंडियाज अल्टीमेट वॉरियर' में भी हिस्सा लिया. इस वजह से उन्हें खेल प्रेमियों के साथ-साथ मनोरंजन जगत के दर्शकों के बीच भी पहचान मिली.




