प्रेशर... वो क्या होता है! पहले अंडर-19 WC, अब ट्राई नेशन A सीरीज का फाइनल! क्या Vaibhav Sooryavanshi बड़े मैचों के प्लेयर है?
15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मुकाबले उन्हें डराते नहीं, बल्कि और खतरनाक बना देते हैं. श्रीलंका A के खिलाफ ट्राई-नेशन सीरीज फाइनल में उन्होंने सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन ठोककर रिकॉर्ड तोड़ दिया और भारत A को मजबूत स्थिति में पहुंचाया.
Vaibhav Sooryavnashi: क्रिकेट में कहा जाता है कि दबाव अच्छे-अच्छे खिलाड़ियों को बदल देता है. बड़े मुकाबले, बड़ा स्कोरबोर्ड और करोड़ों उम्मीदों का भार कई बार बल्लेबाजों को सुरक्षित खेलने पर मजबूर कर देता है, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो दबाव में दबते नहीं, बल्कि उसी दबाव को अपनी ताकत बना लेते हैं. 15 साल के वैभव सूर्यवंशी फिलहाल ऐसे ही खिलाड़ी नजर आ रहे हैं. रविवार को श्रीलंका के दांबुला में खेले गए ट्राई-नेशन वनडे सीरीज के फाइनल में उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मंच पर उनका खेल और भी खतरनाक हो जाता है.
भारत ए और श्रीलंका ए के बीच फाइनल मुकाबले में वैभव जब मैदान पर उतरे तो उनके सामने सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि कई सवाल भी थे. इससे पहले सीरीज के चार मुकाबलों में उनका बल्ला शांत रहा था. इसके अलावा श्रीलंका ए के खिलाफ ही हुए एक पिछले मुकाबले में मैदान पर हुई बहस के कारण भी वह चर्चा में थे. ऐसी स्थिति में कई युवा खिलाड़ी दबाव में आकर अपनी स्वाभाविक आक्रामकता खो देते हैं... लेकिन वैभव ने अलग रास्ता चुना. उन्होंने दबाव को महसूस नहीं किया, बल्कि उसे अपने अंदाज में जवाब दिया.
श्रीलंका ए ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया. वैभव ने पहली ही गेंद से अपना इरादा साफ कर दिया. उन्होंने मोहम्मद शिराज की गेंद पर चौका लगाकर शुरुआत की और फिर ऐसा हमला बोला कि श्रीलंकाई गेंदबाजों के पास जवाब नहीं बचा. एक ही ओवर में शिराज के खिलाफ उन्होंने 26 रन ठोक दिए.
और टूट गया 20 साल पुराना रिकॉर्ड
देखते ही देखते 15 साल के इस बल्लेबाज ने सिर्फ 11 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया. इसके साथ ही उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक के 20 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया. इससे पहले यह रिकॉर्ड श्रीलंका के कौशल्या वीररत्ने के नाम था, जिन्होंने 12 गेंदों में अर्धशतक बनाया था। वैभव ने सिर्फ 11 गेंदों में यह कारनामा कर दिखाया.
हालांकि वह शतक से चूक गए, लेकिन उनकी पारी किसी शतक से कम नहीं थी. उन्होंने सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन बनाए और भारतीय पारी को ऐसी शुरुआत दी जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया.
वैभव के लिए बड़े मुकाबले क्यों बन जाते हैं खास?
इस साल वैभव सूर्यवंशी बार-बार साबित कर चुके हैं कि जितना बड़ा मुकाबला होता है, उनका आत्मविश्वास उतना ही बढ़ जाता है. फरवरी में अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 80 गेंदों में 175 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई थी. वह पारी इसलिए खास थी क्योंकि वह खिताबी मुकाबला था और पूरी दुनिया की नजरें उस पर थीं.
इसके बाद IPL 2026 के एलिमिनेटर मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एक तूफानी पारी की जरूरत थी. वैभव ने वहां भी दबाव को पीछे छोड़ते हुए सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन बना दिए. अब श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई-सीरीज फाइनल में 29 गेंदों पर 94 रन की पारी ने उनकी बड़ी मैचों के खिलाड़ी वाली छवि और मजबूत कर दी.
वैभव का सबसे बड़ा हथियार- डर के बिना खेलना
आमतौर पर खिलाड़ियों को सलाह दी जाती है कि बड़े मैचों में जोखिम कम लें और परिस्थिति के हिसाब से खेलें, लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने अपना अलग तरीका बनाया है. वह उसी अंदाज में खेलते हैं जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया है. उनके लिए सामने कौन गेंदबाज है, मैच कितना बड़ा है या स्थिति कितनी मुश्किल है, इससे ज्यादा मायने रखता है उनका अपना खेल. उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास दिखता है. वह गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं और अपनी टाइमिंग व ताकत पर भरोसा रखते हैं.
हालांकि यह तरीका जोखिम भरा भी है आक्रामक बल्लेबाजों के साथ खराब दिन भी आते हैं. इस सीरीज के शुरुआती चार मैचों में उनका शांत रहना इसका उदाहरण था. लेकिन खास बात यह है कि खराब प्रदर्शन उनके अंदाज को नहीं बदलता। वह डरकर खेलने नहीं लगते.
विराट की बात और वैभव की कहानी
IPL 2026 के दौरान विराट कोहली ने कहा था- 'Pressure is privilege' यानी दबाव एक सम्मान है. यह लाइन सुनने में आसान लगती है, लेकिन इसे मैदान पर साबित करना मुश्किल होता है. वैभव सूर्यवंशी फिलहाल इसी सोच को जीते हुए नजर आ रहे हैं. बड़ा मुकाबला, बड़ी उम्मीदें और बड़ी चुनौती... वैभव इन चीजों से घबराते नहीं हैं. बल्कि यही मौके उन्हें और बेहतर बनाते हैं. सिर्फ 15 साल की उम्र में उन्होंने यह दिखा दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. आने वाले समय में उनके सामने कई चुनौतियां होंगी, कई बार असफलताएं भी आएंगी, लेकिन फिलहाल एक बात साफ है- जब दबाव बढ़ता है, तब वैभव सूर्यवंशी और खतरनाक हो जाते हैं.




