जन्मदिन से एक दिन पहले 38 साल के अफगान क्रिकेटर शापूर जादरान की मौत, भारत में चल रहा था इस बीमारी का इलाज
अफगानिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान का 38 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. जानिए HLH बीमारी, भारत में इलाज और उनके क्रिकेट करियर की पूरी कहानी.
अफगानिस्तान क्रिकेट की कहानी जब भी लिखी जाएगी, उसमें एक नाम हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा. शापूर जादरान. मैदान पर हवा से बातें करती उनकी तेज गेंदें, कंधों तक लहराते लंबे बाल और विकेट लेने के बाद जश्न मनाने का उनका अंदाज करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों की यादों में हमेशा जिंदा रहेगा. लेकिन अब यह सफर थम गया है.
महज 38 साल की उम्र में शापूर जादरान ने दुनिया को अलविदा कह दिया. वहीं आपको जानकारी के लिए बता दे कि कल 8 जुलाई को अफगान क्रिकेटर शापूर जादरान का जन्मदिन यानी अपने बर्थडे के एक दिन पहले उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है.
दिल्ली के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. वे पिछले कई महीनों से एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा बीमारी हेमोफैगोसिटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) से जूझ रहे थे. यह ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम ही अपने अंगों पर हमला करने लगता है.
अक्टूबर से बीमारी से लड़ रहे थे शापूर
शापूर के छोटे भाई घमई जादरान के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी. अफगानिस्तान में शुरुआती इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए भारत भेजने की सलाह दी. उन्हें ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान उनकी हालत में कुछ सुधार भी हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई. लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई.
शुरुआत में डॉक्टरों को लगा कि उन्हें सामान्य संक्रमण या पेट की समस्या है, लेकिन जल्द ही तेज बुखार, डेंगू संक्रमण और तेजी से गिरती रेड ब्लड सेल्स ने मामला गंभीर बना दिया. बोन मैरो जांच के बाद पता चला कि वे स्टेज-4 HLH जैसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं.
जब अस्पताल पहुंचे थे राशिद खान और मोहम्मद नबी
इस साल मई में अफगानिस्तान के दो सबसे बड़े क्रिकेट सितारे राशिद खान और मोहम्मद नबी अपने पुराने साथी से मिलने अस्पताल पहुंचे थे. मोहम्मद नबी ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा था कि अस्पताल के बिस्तर पर शापूर को उस हालत में देखना बेहद दर्दनाक था. पूरी टीम उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रही थी, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था.
जिसने अफगानिस्तान क्रिकेट की नींव रखी
आज अफगानिस्तान दुनिया की बड़ी क्रिकेट टीमों को चुनौती देता है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इस टीम को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था. उसी दौर में शापूर जादरान उन खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्होंने अफगानिस्तान क्रिकेट की मजबूत नींव रखी. उन्होंने 2009 से 2020 के बीच देश के लिए 44 वनडे और 36 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और कुल 80 विकेट अपने नाम किए. वे सिर्फ विकेट लेने वाले गेंदबाज नहीं थे, बल्कि नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए उम्मीद का चेहरा भी थे.
2015 वर्ल्ड कप की वह जीत, जिसे कोई नहीं भूल सकता
अगर शापूर जादरान के करियर का सबसे यादगार पल चुनना हो तो वह 2015 वनडे वर्ल्ड कप में स्कॉटलैंड के खिलाफ मैच होगा. उस मुकाबले में उन्होंने 4 विकेट झटके और फिर आखिरी समय में नाबाद रन बनाकर अफगानिस्तान को ऐतिहासिक जीत दिलाई. जीत के बाद मैदान पर उनके लंबे बालों के साथ दौड़ते हुए जश्न की तस्वीर आज भी अफगानिस्तान क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित यादों में गिनी जाती है. पूरे टूर्नामेंट में वे अफगानिस्तान के सबसे सफल गेंदबाज रहे.
शोएब अख्तर से मिली थी प्रेरणा
बहुत कम लोग जानते हैं कि शापूर जादरान पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज शोएब अख्तर को अपना आदर्श मानते थे. क्रिकेटर बनने का सपना पूरा करने के लिए वे कुछ समय पाकिस्तान भी गए, जहां उन्होंने अपने खेल को निखारा. बाद में अफगानिस्तान लौटकर उन्होंने उसी देश का प्रतिनिधित्व किया और दुनिया को दिखाया कि संघर्ष से निकलकर भी इतिहास लिखा जा सकता है.
अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने दी भावुक श्रद्धांजलि
शापूर जादरान के निधन पर अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने उन्हें देश के क्रिकेट का आधार स्तंभ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने समर्पण, जुनून और संघर्ष से अफगानिस्तान क्रिकेट को नई पहचान दिलाई. बोर्ड ने कहा कि उनकी उपलब्धियां और योगदान हमेशा अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास का अहम हिस्सा रहेंगे और आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा लेती रहेंगी.
एक खिलाड़ी चला गया, लेकिन कहानी हमेशा जिंदा रहेगी
शापूर जादरान अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी हर उस खिलाड़ी को प्रेरित करती रहेगी, जो मुश्किल हालात से निकलकर अपने देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देखता है. उनकी तेज गेंदें अब मैदान पर नहीं दिखेंगी, लेकिन अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम हमेशा उसी रफ्तार और उसी जुनून के साथ याद किया जाएगा.




