क्यों चुनाव आयोग ने मोहम्मद शमी को किया तलब? 9 से 11 जनवरी के बीच होगी सुनवाई, जानें पूरा मामला
Mohammed Shami: भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह क्रिकेट नहीं बल्कि चुनाव आयोग की कार्रवाई है. चुनाव आयोग ने शमी और उनके भाई मोहम्मद कैफ को नोटिस जारी कर SIR प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए तलब किया है.
Mohammed Shami: भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है. लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे शमी कभी अपनी पत्नी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं तो कभी सेलेक्टर्स पर दिए गए बयानों को लेकर. हाल ही में बीसीसीआई ने न्यूजीलैंड वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया के स्क्वाड का एलान किया था. फैंस को उम्मीद थी कि इस बार शमी की टीम इंडिया में वापसी हो सकती है, लेकिन इस बार भी शमी और फैंस के हाथों निराशा हाथ लगी.
शमी को फिर से नजरअंदाज करते हुए टीम इंडिया से बाहर रखा गया है. इस बीच अब चुनाव आयोग ने शमी और उनके भाई मोहम्मद कैफ को नोटिस जारी कर SIR प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए तलब किया है. यह नोटिस सोमवार को जारी किए गए हैं. मामला मतदाता सूची से जुड़ा है, जिसमें कथित दस्तावेजों की गलतियों चलते दोनों भाइयों के नाम सुनवाई सूची में शामिल किए गए हैं. अब शमी और उनके भाई को चुनाव आयोग के सामने पेश होना है.
चुनाव आयोग ने क्यों भेजा नोटिस?
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, मोहम्मद शमी और उनके भाई मोहम्मद कैफ के नाम जनगणना प्रपत्रों से जुड़ी कुछ जटिलताओं के कारण विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत सामने आए हैं. यह प्रक्रिया पिछले साल 16 दिसंबर से शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करना है.
AERO के सामने पेश होने का निर्देश
दोनों भाइयों को सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है. गेंदबाज मोहम्मद शमी का नाम कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड नंबर 93 में मतदाता के रूप में दर्ज है, जो राशबेहारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है.
9 से 11 जनवरी के बीच होगी सुनवाई
चुनाव आयोग की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद शमी की सुनवाई 9 से 11 जनवरी के बीच निर्धारित की गई है. इस दौरान उनसे संबंधित दस्तावेजों और विवरणों की जांच की जाएगी. इस विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर पहले ही राजनीतिक बहस तेज हो चुकी है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा था.
उन्होंने अपने पत्र में कहा था “हालांकि इस प्रक्रिया को समयबद्ध बताया जा रहा है, लेकिन कोई स्पष्ट, पारदर्शी या समान रूप से लागू होने वाली समयसीमा नहीं है. अलग-अलग राज्य अलग-अलग मानदंडों का पालन कर रहे हैं और समयसीमा में मनमाने ढंग से बदलाव किए जा रहे हैं, जो स्पष्टता, तैयारी और प्रक्रियात्मक समझ की घोर कमी को दर्शाता है.”





