Asian Games 2026: China का गुरूर चकनाचूर, कहानी गोल्ड से बोल्ड करने वाली बेटियों की
Asian Games 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने हॉकी, शूटिंग, तीरंदाजी और एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन कर कई गोल्ड मेडल जीते और चीन को धूल चटा दी. जानिए इन देश की बेटियों की कहानी.
Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है. हॉकी से लेकर शूटिंग, तीरंदाजी और एथलेटिक्स तक भारतीय बेटियों ने अपने दमदार खेल से कई मुकाबलों में जीत हासिल की और गोल्ड मेडल अपने नाम किए.
भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद एशियन गेम्स में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता. शूटिंग में नीरू धांडा ने चीन की सुन युनोंग को हराकर महिला ट्रैप कॉम्पीटीशन का इंडीवीजुअल गोल्ड मेडल हासिल किया. तीरंदाजी में भारतीय महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर गोल्ड जीता. वहीं 17 साल की कुमकुम मोहोड़ ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में भी दक्षिण कोरिया की ओह येजिन को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया.
एथलेटिक्स में भारतीय महिला 4x400 मीटर रिले टीम ने 3 मिनट 29.69 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीतकर इस सफर को और खास बना दिया. इन मेडल्स के पीछे सिर्फ जीत की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, सीमित साधनों, परिवार के सहयोग और सालों की मेहनत की भी कहानी है.
महिला हॉकी टीम ने चीन को हराकर 44 साल बाद जीता गोल्ड?
भारतीय महिला हॉकी टीम ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता. इस जीत के साथ टीम ने 44 साल से चला आ रहा स्वर्ण पदक का इंतजार खत्म कर दिया. 1982 के दिल्ली एशियन गेम्स के बाद यह पहला मौका है, जब भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है. इससे पहले 1982 में ही टीम ने गोल्ड मेडल हासिल किया था.
इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधा कोटा भी हासिल कर लिया है. इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद हॉकी इंडिया ने हर एक खिलाड़ी को 11 लाख रुपये और सपोर्ट स्टाफ को 5.5 लाख रुपये की सम्मान राशि देने का एलान किया गया है.
भारतीय महिला हॉकी टीम में कौन-कौन?
गोलकीपर:
सविता पूनिया
बिचू देवी खरीबाम
डिफेंडर:
ईशिका चौधरी
सुशीला चानू पुखरंबाम
लालथांतलुआंगी
ज्योति
शिल्पी डबास
मिडफील्डर:
निक्की प्रधान
साक्षी राणा
सुनेलिता टोप्पो
सलिमा टेटे (कप्तान)
नेहा
दीपिका सोरेंग
फॉरवर्ड:
लालरेम्सियामी
रुतुजा दादासो पिसाल
नवनीत कौर
दीपिका
इशिका
बलजीत कौर
ब्यूटी डुंगडुंग
शूटिंग में नीरू ढांडा ने क्या किया कमाल?
शूटिंग में नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप स्पर्धा में चीन की सुन युनोंग को हराकर व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीता. नीरू ने मिक्स्ड ट्रैप टीम इवेंट में भी गोल्ड मेडल हासिल किया. इस इवेंट में उन्होंने साझेदारी में गोल्ड हासिल किया. नीरू की इस उपलब्धि की खास बात उनकी संघर्ष भरी शुरुआत भी है. कुछ साल पहले तक उनके पास शूटिंग के महंगे उपकरण नहीं थे. शुरुआती दौर में उन्होंने परिवार की पुरानी दोनाली बंदूक से टीन के डिब्बों पर निशाना साधकर अभ्यास किया. आज वही नीरू भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं और आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में ट्रेनिंग करती हैं. जुलाई 2026 में वह लोनाटो में ISSF वर्ल्ड कप में महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं.
तीरंदाजी में भारतीय महिला टीम ने क्या किया कमाल?
भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर ऐतिहासिक गोल्ड मेडल हासिल किया. भारतीय टीम में अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ शामिल थीं.
कौन हैं अंकिता भकत?
अंकिता भकत का जन्म 17 जून 1998 को हुआ. वह भारतीय राष्ट्रीय रिकर्व टीम की सदस्य हैं और महिला व्यक्तिगत, महिला टीम और मिश्रित टीम रिकर्व श्रेणियों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती हैं. उन्होंने अर्जेंटीना के रोसारियो में आयोजित 2017 विश्व तीरंदाजी युवा चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था. यहां उन्होंने अपने पार्टनर जेमसन सिंह निंगथौजम के साथ रिकर्व जूनियर मिश्रित टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था.
कोलकाता में जन्मी और पली-बढ़ी अंकिता ने 10 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू की थी. इसके बाद उन्होंने शुरुआती प्रशिक्षण के लिए कलकत्ता तीरंदाजी क्लब में हिस्सा लिया. बाद में 2014 में वह जमशेदपुर की टाटा तीरंदाजी अकादमी गईं. एशियन गेम्स 2026 में अंकिता ने महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में हिस्सा लिया और गोल्ड मेडल जीता.
कौन हैं कीर्ति शर्मा?
हरियाणा के जींद जिले के रिटौली गांव में पली-बढ़ी कीर्ति शर्मा की पहली प्राथमिकता पढ़ाई थी. जब वह चौथी कक्षा में थीं, तब उनके पिता ने उनका दाखिला जींद के पास एक निजी स्कूल में कराया था. आठवीं कक्षा तक कीर्ति का खेलों से जुड़ा अनुभव केवल कभी-कभार होने वाली दौड़ प्रतियोगिताओं तक ही सीमित था. इसके बाद उनके स्कूल ने तीरंदाजी शुरू करने का फैसला किया.
कैसे शुरू की तरअंदाजी?
उन्होंने 2019-2020 के आसपास अपने स्कूल के दिनों में तीरंदाजी की शुरुआत की थी. कीर्ति को इस खेल से परिचित कराने में उनके स्कूल की अहम भूमिका रही, क्योंकि स्कूल परिसर में ही तीरंदाजी का मैदान था. शुरुआत में वह उन सीनियर छात्रों से प्रभावित हुईं, जो पहले से तीरंदाजी की प्रैक्टिस कर रहे थे. इसके बाद उनकी भी इस खेल में रुचि बढ़ी और उन्होंने तीरंदाजी को अपना लिया.
लवलीना बोरगोहेन
भारतीय बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. जापान के नगोया में खेले गए फाइनल मुकाबले में लवलीना ने चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता. लवलीना के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही, क्योंकि उन्होंने 2 अक्टूबर 2026 को अपने 29वें जन्मदिन के मौके पर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की.
इस जीत के साथ लवलीना एशियन गेम्स में बॉक्सिंग का गोल्ड मेडल जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बन गई हैं. उनसे पहले यह उपलब्धि एमसी मेरीकॉम ने हासिल की थी. लवलीना के शानदार खेल को देखते हुए उन्हें पहले भी देश के बड़े खेल सम्मानों से नवाजा जा चुका है. भारत सरकार ने उन्हें 2020 में अर्जुन पुरस्कार और 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया था. जन्मदिन के दिन एशियन गेम्स का स्वर्ण जीतकर लवलीना ने अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी.
17 साल की कुमकुम मोहोड़ ने भी रचा इतिहास?
17 वर्षीय भारतीय तीरंदाज कुमकुम मोहोड़ ने एशियन गेम्स 2026 में महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा के फाइनल में दक्षिण कोरिया की ओह येजिन को हराकर गोल्ड मेडल जीता. कुमकुम मोहोड़ अमरावती की रहने वाली हैं. उनके पिता मिठाई के डिब्बे बनाते हैं. कुमकुम के लिए तीरंदाजी का सफर एक साधारण शुरुआत से शुरू हुआ था. परिवार के पास महंगा धनुष खरीदने के लिए ज्यादा पैसे नहीं थे. ऐसे में उनकी मां ने अपनी बचत से बेटी के लिए धनुष का इंतजाम किया.
कुमकुम ने भी सीमित साधनों को अपनी राह में रुकावट नहीं बनने दिया और लगातार अभ्यास करती रहीं. एशियन गेम्स में उनका सफर हर मुकाबले के साथ और खास होता गया. क्वार्टरफाइनल में उन्होंने साउथ कोरिया की मौजूदा विश्व चैंपियन कांग चाएयंग को हराकर बड़ा उलटफेर किया.
इसके बाद सेमीफाइनल में उनका मुकाबला चीन की झू जिंगयी से हुआ. कुमकुम ने इस मुकाबले में 6-2 से शानदार जीत दर्ज कर फाइनल में जगह बनाई. इसके बाद फाइनल में उन्होंने दक्षिण कोरिया की ओह येजिन को हराकर महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया.
एथलेटिक्स में 4x400 मीटर रिले टीम का गोल्ड?
एथलेटिक्स में भारतीय महिला 4x400 मीटर रिले टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता. भारतीय टीम ने यह रेस 3 मिनट 29.69 सेकंड में पूरी की. टीम में किरण पहल, एम.आर. पूवम्मा, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज शामिल हैं.
कौन हैं किरण पहल?
किरण पहल का जन्म 5 अगस्त 2000 को हुआ. वह हरियाणा की भारतीय एथलीट हैं और 400 मीटर दौड़ में विशेषज्ञता रखती हैं. 2024 में वह 51 सेकंड से कम समय में 400 मीटर दौड़ पूरी करने वाली भारत की दूसरी एथलीट बनी थीं. उन्होंने पेरिस में होने वाले 2024 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 400 मीटर दौड़ के लिए क्वालिफाई किया था. ओलंपिक में उन्होंने हीट में 52.51 सेकंड का समय लिया था.
कौन हैं एम.आर. पूवम्मा?
एम.आर. पूवम्मा एक भारतीय एथलीट और स्प्रिंटर हैं, जो मुख्य रूप से 400 मीटर दौड़ और 4x400 मीटर रिले में हिस्सा लेती हैं. उनका जन्म 5 जून 1990 को कर्नाटक में हुआ था. उनके पति जिथिन पॉल भी एथलीट हैं. उन्होंने 2008 बीजिंग, 2016 रियो और 2024 ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है.
प्राची चौधरी की गोल्ड के पीछे की क्या है कहानी?
प्राची चौधरी का जन्म 20 दिसंबर 1996 को हुआ. वह भारतीय ट्रैक एथलीट हैं. उन्होंने 2019 एशियाई चैंपियनशिप और 2022 एशियाई खेलों में 4x400 मीटर रिले स्पर्धा में रजत पदक जीते हैं. पिछली बार रजत पदक मिलने की वजह से वह नियमों के मुताबिक DSP नहीं बन पाई थीं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्पोर्ट्स पॉलिसी के तहत गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी को सीधे DSP पद मिलता है. तब प्राची ने अपनी मां से वादा किया था कि वह हर हाल में गोल्ड लेकर आएंगी, ताकि वह अपनी उस वर्दी को हासिल कर सकें.
कौन हैं विथ्या रामराज?
विथ्या रामराज का जन्म 20 सितंबर 1998 को हुआ. वह भारतीय धावक हैं और 400 मीटर बाधा दौड़, 400 मीटर और 4x400 मीटर रिले में हिस्सा लेती हैं. 2022 एशियाई खेलों में उन्होंने 400 मीटर बाधा दौड़ में पी.टी. उषा द्वारा 1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में बनाए गए 55.42 सेकंड के राष्ट्रीय रिकॉर्ड की बराबरी की थी. उन्होंने 2024 पेरिस ओलंपिक में महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में भारत का प्रतिनिधित्व किया था.
संघर्ष से गोल्ड तक पहुंची भारतीय बेटियां..
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों की इन जीतों की कहानी अलग-अलग है, लेकिन इनके बीच एक चीज समान है- लगातार मेहनत. महिला हॉकी टीम ने चीन को हराकर 44 साल बाद स्वर्ण पदक जीता और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधा कोटा हासिल किया. नीरू धांडा ने सीमित संसाधनों से शुरू करके शूटिंग में चीन की खिलाड़ी को हराया. भारतीय महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड जीता. वहीं 17 साल की कुमकुम मोहोड़ ने व्यक्तिगत स्पर्धा में फाइनल जीतकर गोल्ड मेडल हासिल किया. एथलेटिक्स की महिला 4x400 मीटर रिले टीम ने भी गोल्ड जीतकर भारत की सफलता में एक और चैप्टर जोड़ दिया.




