SIR क्या है, नहीं पता... फिर भी जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में पहुंचा JNU का LGBTQ छात्र, Crop Top लिबास से लेकर बयान तक चर्चा में- Exclusive
SIR की पूरी जानकारी नहीं होने के बावजूद JNU का छात्र जंतर-मंतर प्रदर्शन में पहुंचा. क्रॉप टॉप और उसके बयान ने सबका ध्यान खींचा, जानिए उसने क्या कहा.
देशभर में धरना प्रदर्शन के लिए चर्चित सबसे ज्यादा हॉट स्पॉट 'जंतर-मंतर' पर 2 अक्टूबर को SIR के खिलाफ प्रदर्शन में नारे खूब लगे, पोस्टर भी खूब दिखे, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान खींचा एक JNU छात्र ने. वजह थी उसका अलग पहनावा और उससे भी ज्यादा अलग जवाब. क्रॉप टॉप (Crop Top) पहनकर प्रदर्शन में पहुंचे LGBTQ स्टूडेंट प्रवीण कुमार से जब पूछा गया कि आखिर वह यहां क्यों आए हैं, तो जवाब आया- 'उन्हें खुद नहीं पता.' फिर सवाल हुआ कि जब मुद्दा ही पूरी तरह नहीं पता तो विरोध किस बात का? इस पर भी जवाब लगभग साफ था- 'मन कहता है कि विरोध करना चाहिए.' यानी मुद्दा समझने के लिए आंदोलन में आए और आंदोलन का समर्थन भी करते रहे.
जब मुद्दा ही नहीं पता तो प्रदर्शन में आए क्यों?
प्रवीण ने स्टेट मिरर से बातचीत में बताया कि वह प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे हैं. लेकिन जब उनसे पूछा गया कि वह प्रदर्शन का समर्थन क्यों कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि इसकी वजह वह खुद भी समझना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि वह यह देखने आए हैं कि यहां क्या हो रहा है, कैसे हो रहा है और क्यों हो रहा है. यानी प्रदर्शन में मौजूद जरूर हैं, लेकिन जिस मुद्दे को लेकर आंदोलन चल रहा है, उसे समझने की कोशिश अभी जारी है.
Credit: State Mirror
SIR का विरोध करते हैं, लेकिन SIR पता कितना है?
जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें SIR के बारे में पूरी जानकारी नहीं है तो फिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने वालों के समर्थन में खड़े होने का फैसला कैसे किया, तो प्रवीण ने कहा कि यह वह नहीं जानते. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि वह SIR का विरोध करते हैं. उन्होंने अपनी भागीदारी को सॉलिडेरिटी यानी समर्थन के तौर पर बताया. उनका कहना था कि जिस बात की पूरी समझ नहीं है, उसका समर्थन क्यों कर रहे हैं, इसका सही जवाब वह नहीं दे सकते. लेकिन उनका मन कहता है कि इसका विरोध होना चाहिए और इसलिए प्रदर्शन का हिस्सा बना हूं.
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पहले समर्थन, फिर मुद्दे को समझने की कोशिश क्यों?
प्रवीण का जवाब अपने आप में एक अलग सवाल खड़ा करता है. आम तौर पर किसी आंदोलन में शामिल होने वाले व्यक्ति से यह उम्मीद की जाती है कि उसे उस मुद्दे और मांगों की जानकारी होगी, जिसके लिए वह सड़क पर उतरा है. लेकिन यहां तस्वीर थोड़ी अलग है. प्रवीण खुद कह रहे हैं कि उन्हें अभी पूरा मामला समझना है और इसी समझ के लिए वह प्रदर्शन में मौजूद हैं. यानी समर्थन पहले है और मुद्दे की पूरी जानकारी हासिल करने की प्रक्रिया बाद में चल रही है.
'लड़का हूं', क्रॉप टॉप क्यों पहनते हो?
प्रवीण के पहनावे ने भी जंतर-मंतर पर उनका ध्यान खींचा. जब उनसे पूछा गया कि लड़का होने के बावजूद वह लड़कियों वाला ड्रेस क्यों पहनते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा पहनना पसंद है. उन्होंने बताया कि कॉलेज में भी इसी तरह के कपड़े पहनता हूं. रोजमर्रा की जिंदगी में भी यह उनके लिए सामान्य है. कॉलेज के दोस्त इस पर क्या कहते हैं, यह पूछने पर उन्होंने बताया कि कोई खास प्रतिक्रिया नहीं होती और सभी सामान्य व्यवहार करते हैं.
क्या पहनावे से किसी की पहचान तय की जा सकती है?
बातचीत के दौरान जब प्रवीण से LGBTQ+ समुदाय से जुड़े होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने हां में जवाब दिया. लेकिन जब उनसे उनकी खास पहचान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उल्टा सवाल किया कि यह सब क्यों पूछा जा रहा है. जब उन्हें बताया गया कि उनके प्रदर्शन को लेकर स्टोरी बनाई जाएगी, तो उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के बारे में आगे जानकारी देने से इनकार कर दिया. उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम आईडी साझा करने की बात जरूर कही और कहा कि स्टोरी में इसे शेयर किया जा सकता है.
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प्रवीण की बातचीत में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यही विरोधाभास रहा. एक तरफ वह कहते हैं कि उन्हें SIR के मुद्दे की पूरी जानकारी नहीं है, दूसरी तरफ वह SIR के विरोध में प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए जंतर-मंतर पर सुबह से शाम तक मौजूद रहे. उनका कहना है कि उन्हें अभी पूरी बात समझनी है, लेकिन फिलहाल उनका मन कहता है कि इसका विरोध होना चाहिए. सवाल यही है कि किसी आंदोलन के समर्थन के लिए मुद्दे की पूरी जानकारी जरूरी है या सिर्फ सॉलिडेरिटी जताना भी किसी को उसके साथ खड़ा कर सकता है?




