कौन सी उंगली से माथे पर लगाना चाहिए तिलक? जानें दिन अनुसार तिलक लगाने का महत्व
तिलक लगाना सिर्फ धार्मिक प्रथा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा से भी जुड़ा माना जाता है. जानिए कौन सी उंगली से माथे पर तिलक लगाना चाहिए और किस दिन किस उंगली का प्रयोग शुभ माना जाता है, ताकि आपकी पूजा और दिन की शुरुआत दोनों सही ऊर्जा के साथ हो.
हिंदू धर्म में माथे पर तिलक का विशेष स्थान है. किसी भी तरह के मांगलिक, धार्मिक अनुष्ठानों और प्रतिदिन के धार्मिक पूजा-पाठ के अलावा त्योहारों, व्रत, विवाह, यज्ञ या शुभ संस्कार बिना तिलक के अधूरा माना जाता है. तिलक न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि हिंदू धर्म की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न अंग भी है. आपने हमेशा हिंदू देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों, योगियों और संत-महात्माओं के मस्तक पर तिलक सुशोभित होते देखा होगा.
इसके अलावा आम जीवन में भी लोग विशेष अवसरों पर तिलक लगाकर शुभता और पवित्रता का भाव प्रकट करते हैं. तिलक सम्मान, श्रद्धा और मंगल भावना का प्रतीक माना जाता है. जब हम किसी को तिलक लगाते हैं, तो यह उसके प्रति आदर और शुभकामना व्यक्त करने का माध्यम होता है. आज हम आपको इस लेख हिंदू धर्म में माथे पर तिलक लगाने का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं.
तिलक लगाने का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, तिलक लगाने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. तिलक लगाने से व्यक्ति की कुंडली में स्थित अशुभ ग्रह शांत होते हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है. इसके अलावा माथे पर तिलक लगाने के कई और भी फायदे हैं. तिलक लगाने से घर में धन, अन्न और सुख-समृद्धि बनी रहती है. व्यक्ति के जीवन में यश, मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है. पापों का नाश होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. मन में शुभ विचार उत्पन्न होते हैं और कार्य करने की क्षमता बढ़ती है. आत्मबल और आत्मविश्वास मजबूत होता है. तिलक व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और उसे ईश्वर से जोड़ता है.
किस उंगली से तिलक लगाने का क्या फल?
अनामिका शांतिदा प्रोक्ता मध्यमायुष्करी भवेत्।
अंगुष्ठः पुष्टिदः प्रोक्ता तर्जनी मोक्षदायिनी।।
धार्मिक ग्रंथों में तिलक लगाने की विधि का भी विशेष उल्लेख मिलता है. स्कंद पुराण में बताया गया है कि अलग-अलग उंगलियों से तिलक लगाने से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं. अनामिका से तिलक करने पर शांति की प्राप्ति होती है. मध्यमा से तिलक करने पर आयु में वृद्धि होती है. अंगूठे से तिलक करने पर स्वास्थ्य और बल मिलता है. तर्जनी से तिलक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है.
दिन के अनुसार तिलक का महत्व
हिंदू परंपरा में सप्ताह के दिनों के अनुसार तिलक लगाने का भी विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा कहा जाता है कि इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है. सोमवार के दिन सफेद चंदन का तिलक लगाने से मन को शांति मिलती है. मंगलवार के दिन चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर तिलक लगाने से साहस और शक्ति बढ़ती है. बुधवार के दिन सूखा सिंदूर लगाने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है. गुरुवार के दिन पीला चंदन या हल्दी का तिलक लगाने से सुख-समृद्धि आती है. शुक्रवार के दिन लाल चंदन या कुमकुम लगाने से घर में खुशहाली बनी रहती है. शनिवार के दिन भस्म का तिलक लगाने से कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं. रविवार के दिन लाल चंदन का तिलक लगाने से मान-सम्मान और धन की प्राप्ति होती है.
तिलक लगाने का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
माथे पर तिलक लगाने का महत्व न सिर्फ धार्मिक है बल्कि इसका वैज्ञानिक नजरिया भी है. शरीर विज्ञान की दृष्टि से हमारी दोनों भौंहों के बीच का स्थान मस्तिष्क एक अत्यंत संवेदनशील भाग होता है. यहां पर सुषुम्ना, इड़ा और पिंगला नाड़ियों का संगम माना जाता है, जिसे आज्ञा चक्र या तृतीय नेत्र कहा जाता है. माथे पर तिलक लगाने से मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है. मानसिक तनाव कम होता है. मन शांत और स्थिर रहता है. चंदन, कुमकुम या भस्म जैसे पदार्थ ठंडक प्रदान करते हैं, जिससे ललाट में शीतलता और ताजगी बनी रहती है.




