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कहीं केश तो कहीं भुजाओं की पूजा, कौन-कौन से मंदिर हैं पंच केदार, यात्रा-दर्शन से लेकर सबका महत्व तक जानें

पंच केदारनाथ के पांचों मंदिर भगवान शिव के अलग-अलग स्वरूपों से जुड़े माने जाते हैं. कहीं उनकी भुजाओं की पूजा होती है तो कहीं केशों और मुख का दर्शन किया जाता है. इनमें केदारनाथ से लेकर तुंगनाथ मंदिर शामिल है.

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पंच केदार में कौन-कौन से मंदिर शामिल हैं

हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत5 Mins Read

Updated on: 22 May 2026 1:56 PM IST

पंच केदार यात्रा को उत्तराखंड की सबसे पवित्र यात्राओं में गिना जाता है. कठिन पहाड़ी रास्तों और प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित ये पांचों धाम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं. मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज में निकले थे.

शिव उनसे नाराज होकर बैल का रूप धारण कर हिमालय में छिप गए. जब पांडवों ने उन्हें पहचान लिया, तब भगवान शिव के शरीर के अलग-अलग अंग पांच स्थानों पर प्रकट हुए. इन्हीं स्थानों को आज पंच केदार कहा जाता है. आइए जानते हैं पंच केदारनाथ के सभी मंदिरों का धार्मिक महत्व, उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं और यात्रा से जुड़े खास तथ्य.

केदारनाथ मंदिर कहां है?

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पंच केदार में सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिर केदारनाथ माना जाता है. यहां भगवान शिव की पीठ या कूबड़ की पूजा की जाती है. केदारनाथ मंदिर के कपाट हर साल अप्रैल या मई महीने में अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर खुलते हैं और और अक्टूबर या नवंबर में बंद हो जाते हैं.समुद्र तल से लगभग 11,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर चारधाम यात्रा का भी हिस्सा है. माना जाता है कि यहां दर्शन करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और मन को शांति मिलती है.

मध्यमहेश्वर मंदिर

मध्यमहेश्वर मंदिर में भगवान शिव की नाभि और मध्य भाग की पूजा होती है. आप इस मंदिर के दर्शन मई से लेकर नवंबर महीने तक कर सकते हैं. यह मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में है. यह मंदिर हरे-भरे पहाड़ों और प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है. यह मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में है.

तुंगनाथ मंदिर की क्या है खासियत?

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तुंगनाथ दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है. यहां भगवान शिव की भुजाओं की पूजा होती है. यह मंदिर उत्तराखंड के चोपता के पास स्थित है. इस मंदिर के कपाट हर साल गर्मियों में अप्रैल/मई से लेकर सर्दियों अक्टूबर/नवंबर तक लगभग 6 महीने के लिए खुलते हैं. कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर व्यक्ति को साहस और शक्ति मिलती है.

रुद्रनाथ मंदिर कहां है?

रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के मुख की पूजा की जाती है. यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में है. रुद्रनाथ मंदिर के कपाट हर साल मई से अक्टूबर-नवंबर तक लगभग 6 महीने के लिए खुलते हैं घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर बेहद शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. यहां पहुंचने के लिए कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन श्रद्धालु इसे आध्यात्मिक अनुभव मानते हैं.

कल्पेश्वर मंदिर में किसकी पूजा होती है?

कल्पेश्वर पंच केदार का आखिरी मंदिर माना जाता है. यहां भगवान शिव की जटाओं यानी केशों की पूजा होती है. यह एकमात्र पंच केदार मंदिर है, जहां सालभर दर्शन किए जा सकते हैं. गुफानुमा इस मंदिर का वातावरण भक्तों को अलग आध्यात्मिक अनुभव देता है.

पंच केदार यात्रा का क्या है महत्व?

पंच केदार यात्रा को बेहद पुण्यदायी माना गया है. कहा जाता है कि जो श्रद्धालु इन पांचों धामों के दर्शन करता है, उसे भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. कल्पेश्वर मंदिर को छोड़कर पंच केदार के बाकि चार मंदिर के कपाट मई में खुलते हैं और नवंबर में बंद होते हैं. कठिन पहाड़ी रास्तों के बावजूद हर साल हजारों श्रद्धालु इस यात्रा पर निकलते हैं और इसे जीवन का यादगार अनुभव मानते हैं.

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