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मई महीने का पहला गुरु प्रदोष व्रत कब? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा की संपूर्ण विधि

मई महीने का पहला गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शुभ अवसर है, जो भक्तों के लिए सुख, शांति और समृद्धि का वरदान लेकर आता है. इस दिन सही शुभ मुहूर्त में पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मनोकामनाओं की पूर्ति का विशेष फल मिलता है.

मई महीने का पहला गुरु प्रदोष व्रत कब? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा की संपूर्ण विधि
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( Image Source:  chatgpt )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 13 May 2026 6:30 AM IST

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. प्रत्येक माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. जब यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने पर जीवन के दुख, बाधाएं और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं.

साथ ही व्यक्ति को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. मई 2026 का पहला गुरु प्रदोष व्रत 14 मई, गुरुवार को रखा जाएगा. इस दिन शिव आराधना और व्रत का विशेष महत्व रहेगा. कहा जाता है कि प्रदोष काल में महादेव और माता पार्वती की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

गुरु प्रदोष व्रत 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 मई 2026 को दोपहर 11 बजकर 32 मिनट से आरंभ होगी और 15 मई को सुबह 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है, इसलिए यह व्रत 14 मई को रखा जाएगा.

  • त्रयोदशी तिथि आरंभ- 14 मई 2026, दोपहर 11:32 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त-15 मई 2026, सुबह 8:32 बजे
  • प्रदोष पूजा मुहूर्त- शाम 5:22 बजे से 7:04 बजे तक

गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

गुरु प्रदोष व्रत को शिव कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियां कम होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है. विशेष रूप से गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत गुरु ग्रह से संबंधित दोषों को शांत करने वाला माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर होता है, उन्हें यह व्रत लाभकारी माना गया है. इस दिन भगवान शिव की पूजा और मंत्र जाप करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और शिक्षा, विवाह, संतान तथा करियर से जुड़े कार्यों में शुभ परिणाम मिलने लगते हैं. साथ ही शत्रुओं से मुक्ति और सम्मान में वृद्धि होने की भी मान्यता है.

पूजा विधि

  • व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें.
  • इसके बाद घर के मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें तथा व्रत का संकल्प लें.
  • पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं और शिव मंत्रों का जाप करें.
  • दिनभर सात्विकता बनाए रखें और मन में किसी के प्रति गलत भावना न रखें.
  • प्रदोष काल में शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें.
  • भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत और सफेद पुष्प अर्पित करें.
  • इसके बाद प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
  • अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती कर भोग अर्पित करें.
  • पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें और फिर व्रत का पारण करें.
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