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जब हार मानने वाली थी वानर सेना, तब किसने खोला था लंका में मां सीता के होने का राज

जब हनुमान, अंगद और जाम्बवन्त सहित वानर सेना उनकी तलाश में निकली, तब लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला. इसी मुश्किल घड़ी में गिद्धराज संपाती ने वानर सेना को बताया कि माता सीता लंका में हैं.

जब हार मानने वाली थी वानर सेना, तब किसने खोला था लंका में मां सीता के होने का राज
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किसने खोला था लंका में सीता के होने का राज?

( Image Source:  instagram-@rukminishyam.x )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 15 Jun 2026 5:43 PM IST

रावण ने जब मााता सीता का अपहरण किया था, तब वानर सेना मां की खोज में निकली थी. माता सीता की खोज में निकली वानर सेना के सामने एक समय ऐसा भी आया, जब उन्हें हर तरफ निराशा ही दिखाई दे रही थी. कई दिनों की तलाश के बाद भी सीता का कोई सुराग नहीं मिला था. समुद्र तट पर पहुंचे अंगद, हनुमान और उनके साथी समझ नहीं पा रहे थे कि अब आगे किस दिशा में बढ़ा जाए.

तभी एक वृद्ध गिद्ध ने उनकी उम्मीदों को नया सहारा दिया. यह गिद्ध संपाती था, जो जटायु का बड़ा भाई था. संपाती ने अपनी विशेष दृष्टि से वानरों को बताया कि रावण माता सीता को समुद्र पार लंका ले गया है और वे वहां अशोक वाटिका में हैं.

सीता की खोज में भटक रही थी वानर सेना

सुग्रीव के आदेश पर अंगद, हनुमान, जाम्बवन्त और अन्य वानर दक्षिण दिशा में माता सीता की खोज के लिए निकले थे. कई दिनों तक खोजबीन करने के बावजूद उन्हें कोई सफलता नहीं मिली. समय सीमा समाप्त होने लगी तो सभी वानर निराश होकर समुद्र तट पर बैठ गए. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या किया जाए.

किसने बताया था मां सीता का पता?

इसी दौरान उनकी मुलाकात वृद्ध गिद्धराज संपाती से हुई. जब संपाती ने जटायु का नाम सुना तो उसने वानरों से बातचीत की. जटायु उसके छोटे भाई थे, जिन्होंने माता सीता को बचाने की कोशिश में अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. संपाती ने बताया था कि रावण माता सीता को समुद्र पार स्थित लंका ले गया है. उसने वानरों को बताया कि सीता अशोक वाटिका में हैं और वहीं उनकी खोज पूरी हो सकती है.

कौन थे गिद्धराज संपाती?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार संपाती और जटायु सूर्यदेव के सारथी अरुण के पुत्र थे. बचपन में दोनों भाइयों ने सूर्य के निकट उड़ान भरने का प्रयास किया था. उस समय संपाती ने अपने पंख फैलाकर जटायु को तेज धूप से बचाया, लेकिन उसके अपने पंख जल गए.

रामायण में क्यों महत्वपूर्ण है संपाती का योगदान?

यदि संपाती वानरों को माता सीता के लंका में होने की जानकारी नहीं देते, तो खोज अभियान और अधिक कठिन हो सकता था. उनकी बताई दिशा के आधार पर ही हनुमान जी समुद्र पार करके लंका पहुंचे और माता सीता का पता लगा सके. इस प्रकार संपाती रामायण के उन महत्वपूर्ण पात्रों में गिने जाते हैं, जिन्होंने बिना युद्ध किए भी श्रीराम के कार्य में अमूल्य योगदान दिया.

नोट: यह जानकारी पौराणिक कथाओं पर आधारित है. स्टेट मिरर हिंदी इसकी पूर्ण सत्यता या प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है.


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