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पत्थरों पर उकेरी रामायण, भगवान शिव का मंदिर, दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में 240 हिंदू मंदिरों वाला प्रम्बानन क्यों मशहूर?

प्रम्बानन मंदिर अपनी ऊंची मीनारों, भगवान शिव को समर्पित भव्य मंदिर और पत्थरों पर उकेरी गई रामायण की अद्भुत नक्काशी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.

prambanan temple
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इंडोनेशिया में 240 हिंदू मंदिरों वाला प्रम्बानन क्यों मशहूर

( Image Source:  instagram-@narendramodi )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 8 July 2026 5:36 PM IST

इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन यहां आज भी हिंदू संस्कृति की कई ऐतिहासिक निशानियां मौजूद हैं. इन्हीं में सबसे खास है प्रम्बानन मंदिर, जिसे इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है. हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया दौरे के दौरान इस मंदिर का दौरा किया, जिससे एक बार फिर यह ऐतिहासिक धरोहर चर्चा में आ गई.

प्रम्बानन इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है, जहां कभी करीब 240 मंदिर हुआ करते थे. यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है और इसकी दीवारों पर रामायण की पूरी कहानी खूबसूरत नक्काशी के जरिए उकेरी गई है.

कहां है प्रम्बानन मंदिर?

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प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के सेंट्रल जावा प्रांत में योग्याकार्ता शहर के पास है. यह दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है. पहले स्थान पर कंबोडिया का प्रसिद्ध अंगकोर वाट है. अपनी ऊंची मीनारों और शानदार नक्काशी के कारण यह मंदिर दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है.

कब और किसने बनवाया था?

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इतिहासकारों के अनुसार, प्रम्बानन मंदिर का निर्माण 9वीं और 10वीं शताब्दी के बीच प्राचीन माताराम साम्राज्य के संजय वंश ने कराया था. यह मंदिर हिंदू धर्म के त्रिमूर्ति यानी भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित है. साल 1991 में इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया.

क्या है इस मंदिर की खासियत?

प्रम्बानन मंदिर की सबसे बड़ी पहचान इसकी ऊंची और नुकीली मीनारें हैं. मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान शिव का मंदिर है, जिसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर है. इसके अंदर भगवान शिव, माता दुर्गा, भगवान गणेश और ऋषि अगस्त्य की मूर्तियां स्थापित हैं. पूरे मंदिर परिसर को हिंदू मान्यताओं के अनुसार विशेष योजना से बनाया गया था. पहले यहां करीब 240 मंदिर थे, जो लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए थे. समय के साथ कई छोटे मंदिर क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन मुख्य मंदिर आज भी अपनी भव्यता बनाए हुए हैं.

पत्थरों पर उकेरी गई रामायण

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प्रम्बानन मंदिर की दीवारों पर बनी सुंदर नक्काशी इसकी सबसे अनोखी पहचान है. यहां पत्थरों पर रामायण की कई घटनाओं को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है. श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर की परिक्रमा करते हुए इन चित्रों के जरिए पूरी रामायण की कहानी देख सकते हैं. आज भी मंदिर परिसर में खुले मंच पर रामायण बैले का आयोजन किया जाता है, जहां नृत्य, संगीत और अभिनय के जरिए से रामायण की कथा प्रस्तुत की जाती है.

रानी रोरो जोंग्रांग की मशहूर कहानी

प्रम्बानन मंदिर से एक लोकप्रिय लोककथा भी जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि राजकुमारी रोरो जोंग्रांग ने एक योद्धा से शादी से बचने के लिए उससे एक ही रात में 1,000 मंदिर बनाने की शर्त रखी थी. योद्धा ने लगभग यह काम पूरा कर लिया, लेकिन राजकुमारी ने चालाकी से सुबह होने का भ्रम पैदा कर दिया. इससे काम अधूरा रह गया. गुस्से में आकर योद्धा ने राजकुमारी को पत्थर की मूर्ति बनने का श्राप दे दिया. हालांकि इतिहासकार इसे केवल लोककथा मानते हैं, लेकिन यह कहानी आज भी इंडोनेशिया की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है.

कैसे बचाया गया यह मंदिर?

समय के साथ ज्वालामुखी विस्फोट, भूकंप और लंबे समय तक देखभाल न होने के कारण मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा. 19वीं शताब्दी में इसे दोबारा खोजा गया, जिसके बाद इसके संरक्षण और मरम्मत का काम शुरू हुआ. साल 2006 में आए भूकंप से भी मंदिर को नुकसान पहुंचा था, लेकिन लगातार चल रहे संरक्षण कार्यों की वजह से इसका मुख्य हिस्सा आज भी सुरक्षित है.

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