Begin typing your search...

क्यों चर्चा में है केरल में गुलाबी रंग का पीने का पानी? लकड़ी और मिट्टी जैसा देता है स्वाद

केरल में पीया जाने वाला गुलाबी रंग का पानी पथिमुघम लकड़ी से बनता है, जो पूरी तरह प्राकृतिक और आयुर्वेदिक है. यह पानी न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ भी देता है.

kerala pink drinking water pathimugham benefits
X
( Image Source:  Create By AI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 4 Feb 2026 8:42 AM

केरल में गुलाबी रंग का पीने का पानी देखकर बहुत से लोगों को हैरानी होती है. हाल ही में एक इंस्टाग्राम यूजर ने ऐसा ही एक वीडियो शेयर किया, जिसमें पानी हल्का गुलाबी रंग का दिख रहा था. कई लोगों ने सोचा कि शायद यह कोई फिल्टर है, या कोई केमिकल मिलाया गया है, या फिर कोई फैशनेबल ड्रिंक है. लेकिन सच तो यह है कि यह बिल्कुल नेचुरल है और केरल की पुरानी परंपरा का हिस्सा है.

यह गुलाबी पानी पथिमुघम (या पथिमुकम) नाम की एक खास लकड़ी से बनता है. इसे अंग्रेजी में सैपन वुड या ईस्ट इंडियन रेडवुड भी कहते हैं. इसका वैज्ञानिक नाम Biancaea sappan या Caesalpinia sappan है. यह एक छोटा-सा पेड़ है, जो इंडो-मलेशियाई इलाके का मूल निवासी है. केरल की गर्म और नम जलवायु में यह बहुत आसानी से उग जाता है, इसलिए यहां के घरों में यह बहुत आम है.

कैसे बदल रहा है पानी रंग

जब आप इस लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े या बुरादे को पानी में डालकर उबालते हैं, तो पानी से एक प्राकृतिक गुलाबी-लाल रंग निकलता है. यह रंग ब्राजिलिन नामक एक नेचुरल पिगमेंट्स से आता है. इसीलिए पानी हल्का गुलाबी हो जाता है. केरल में इसे केरल आयुर्वेदिक वॉटर या पथिमुघम जल कहते हैं. यह सिर्फ सुंदर दिखने के लिए नहीं पीया जाता, बल्कि इसके कई स्वास्थ्य फायदे भी हैं. केरल के घरों, खासकर गांवों में, यह पीने का पानी बहुत आम है. लोग इसे रोजाना उबालकर पीते हैं. मंदिरों में, पारंपरिक होटलों में, और यहां तक कि ओणम सद्या जैसे बड़े भोजनों में भी यह पानी परोसा जाता है. यह कार्बोनेटेड ड्रिंक्स या मीठे पेय की जगह एक स्वस्थ विकल्प है.

इसके मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?

आयुर्वेद और लोक परंपरा के अनुसार, पथिमुघम जल कई तरह से फायदेमंद है: यह खून साफ करता है (ब्लड प्यूरीफायर).

शरीर को ठंडक देता है, गर्मी कम करता है – खासकर गर्मियों में

प्यास बुझाने में बहुत असरदार है

पाचन सुधारता है, गैस और पेट की समस्याओं में राहत देता है

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो शरीर की रक्षा करता है

त्वचा के लिए अच्छा – मुंहासे कम करने और चमक लाने में मदद करता है

कुछ लोग कहते हैं कि यह किडनी, कोलेस्ट्रॉल, बवासीर, और डायबिटीज जैसी समस्याओं में भी सहायक है

इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो पानी को शुद्ध करने और कुछ बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते हैं

कुछ रिसर्च में यह भी कहा गया है कि यह कैंसर जैसी बीमारियों में संभावित फायदा दे सकता है, लेकिन इसके लिए और ज्यादा अध्ययन की जरूरत है. कुल मिलाकर, यह एक पुरानी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल पीढ़ियों से होता आ रहा है.

स्वाद कैसा होता है?

इसका स्वाद बहुत हल्का होता है थोड़ा लकड़ी जैसा, मिट्टी जैसा या हल्का कड़वा. बोरिंग नहीं लगता, लेकिन मीठा भी नहीं. कई लोग इसमें अदरक, इलायची, जीरा या सौंफ डालकर स्वाद बढ़ा लेते हैं. गर्म करके पीना सबसे अच्छा लगता है, खासकर सुबह खाली पेट. मेहमानों को भी अक्सर यही परोसा जाता है. एक इंस्टाग्राम यूजर prajktsworld ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि यह पानी केरल के घरों, मंदिरों और पारंपरिक भोजनालयों में बहुत आम है. उन्होंने स्वाद को 'बहुत हल्का, मिट्टी जैसा' बताया.

घर पर पथिमुघम जल कैसे बनाएं?

बनाना बहुत आसान है: एक लीटर (या जितना चाहें) पानी लें और उसे उबाल लें. इसमें 1-2 छोटे चम्मच (या आधा चम्मच प्रति 4-5 लीटर) सूखे पथिमुघम लकड़ी के बुरादे या छोटे टुकड़े डालें. यह बाजार में आसानी से मिल जाता है, पाउडर या क्रश्ड फॉर्म में. धीमी आंच पर 5 से 10 मिनट तक उबालें, जब तक पानी हल्का गुलाबी न हो जाए. जितना ज्यादा उबालेंगे, रंग उतना गहरा होगा. आंच बंद करके ठंडा होने दें, फिर छान लें. गर्म या ठंडा करके पी सकते हैं.

हेल्‍थ
अगला लेख