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घूमने का है मन? तो पहुंच जाइए 'वैली ऑफ फ्लावर'! ट्रैकिंग से लेकर उठाएं गढ़वाली खाने का लुत्‍फ, ऐसे पहुंचे फूलों की घाटी

फूलों की घाटी में हर ओर फैली हरियाली और रंग-बिरंगे फूल इसे अद्भुत बनाते हैं. ऑर्किड, प्रिमुला, खसखस, डेज़ी, मैरीगोल्ड और उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्म कमल यहां खिलते हैं। जुलाई से सितंबर तक घाटी रंगों की चादर ओढ़ लेती है.

घूमने का है मन? तो पहुंच जाइए वैली ऑफ फ्लावर! ट्रैकिंग से लेकर उठाएं गढ़वाली खाने का लुत्‍फ, ऐसे पहुंचे फूलों की घाटी
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( Image Source:  META AI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Updated on: 3 Dec 2025 6:27 PM IST

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी नेशनल पार्क हर साल की तरह इस बार भी पर्यटकों के लिए अपने दरवाज़े खोल चुका है. 1 जून से लेकर 31 अक्टूबर तक खुली रहने वाली यह घाटी यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है. पहले ही दिन यहां 62 पर्यटक पहुंचे, जिनका वन विभाग की टीम ने पारंपरिक गर्मजोशी के साथ स्वागत किया.

ऑल इंडिया रेडियो द्वारा एक्स हैंडल पर शेयर किए पोस्ट में फ्लावर ऑफ़ वैली में पहुंचे पर्यटकों की खास तस्वीरें पोस्ट की गई है. जिसके कैप्शन में लिखा है, 'उत्तराखंड के चमोली जिले की उच्च हिमालयी घाटियों में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल #ValleyOfFlowers राष्ट्रीय उद्यान आज से पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए खोल दिया गया है.'

कहां है फूलों की घाटी?

यह घाटी नंदा देवी बायोस्फीयर रिज़र्व के अंदर स्थित है और समुद्र तल से करीब 3,600 मीटर की ऊंचाई पर फैली हुई है. इसका क्षेत्रफल लगभग 87 वर्ग किलोमीटर है. ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं। यहां हर साल लाखों लोग दूर दूर से आते हैं यहां कि वादियों में एक अलग ही सुकून महसूस करते हैं.

यहां की खासियत क्या है?

फ्लावर ऑफ वैली में 300 से ज्यादा प्रजातियों वाले फूल पाए जाते हैं जिनके बारें में आपने जानकारी जुटाते हुए शायद थक जाएं. लेकिन फूलों की खूबसूरती निहारते हुए आपको अलग ही एहसास होगा, पर्यटकों को यहां ऐसे फूल देखने को मिलते हैं जो उन्होंने पहले कहीं नहीं देखा. फूलों की घाटी में हर ओर फैली हरियाली और रंग-बिरंगे फूल इसे अद्भुत बनाते हैं. ऑर्किड, प्रिमुला, खसखस, डेज़ी, मैरीगोल्ड और उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्म कमल यहां खिलते हैं. जुलाई से सितंबर तक घाटी रंगों की चादर ओढ़ लेती है.

दुर्लभ जीव-जंतुओं की झलक

यहां आपको हिमालयी काला भालू, लाल लोमड़ी, हिम तेंदुआ जैसे वन्यजीव देखने को मिल सकते हैं. साथ ही कई उच्च हिमालयी पक्षी प्रजातियां भी यहां देखी जा सकती हैं.

फूलों की घाटी तक कैसे पहुँचें?

-गोविंदघाट से यात्रा शुरू होती है

-वहां से आप 13 किलोमीटर ट्रेक कर के घांघरिया पहुंचते हैं

-फिर 3 किलोमीटर की चढ़ाई आपको फूलों की घाटी तक ले जाती है

-अब आप ऑनलाइन प्रवेश परमिट भी ले सकते हैं, जिससे यात्रा और भी आसान हो गई है

घूमने का सबसे अच्छा समय?

जुलाई से सितंबर का महीना सबसे बढ़िया है, इस समय मानसून की वजह से घाटी पूरी तरह खिली होती है और फूलों की खूबसूरती चरम पर होती है.

यहां क्या करें?

-घांघरिया से फूलों की घाटी तक का रास्ता बेहद खूबसूरत यहां पर्यटक ट्रैकिंग का आनंद ले सकते हैं

-खासतौर पर सुबह और दोपहर बाद की रोशनी फोटोग्राफर्स के लिए आदर्श मानी जाती है

-अगर किस्मत साथ दे तो आप दुर्लभ हिम तेंदुआ या काले भालू की झलक पा सकते हैं

-घांघरिया से लगभग 6 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई के बाद आप 4,329 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र सिख स्थल हेमकुंड साहिब तक पहुंच सकते हैं

-घांघरिया में रुककर आप गढ़वाली व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं और पहाड़ी जीवनशैली को महसूस कर सकते हैं

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