Valentine Day पर पहली मुलाकात में बिगड़ सकता है मामला, भूलकर भी न करें ये काम
वैलेंटाइन डे पर पहली मुलाकात खास जरूर होती है, लेकिन जरा-सी गलती पूरा मूड बिगाड़ सकती है. इंप्रेस करने की कोशिश में लोग अक्सर ऐसी बातें कर बैठते हैं, जो सामने वाले को अनकंफर्टेबल कर देती हैं.
पहली मुलाकात का अपना अलग जादू होता है. दिल तेज धड़कता है, दिमाग में हजारों सवाल घूमते हैं. कैसे मिलेंगे, क्या बात करेंगे, इंप्रेशन कैसा रहेगा? ऊपर से मौका हो वैलेंटाइन डे का, तो उम्मीदें और भी बढ़ जाती हैं. ऐसे में छोटी-सी चूक भी लंबे समय तक याद रह सकती है.
कई बार लोग इंप्रेस करने के चक्कर में कुछ ऐसा कर बैठते हैं, जो सामने वाले को उल्टा परेशान कर देता है. इसलिए पहली मीटिंग के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.
परफेक्ट बनने की कोशिश
पहली मुलाकात में अक्सर लोगों को लगता है कि उन्हें बिल्कुल फिल्मों जैसा परफेक्ट दिखना है. डायलॉग भी खास, एंट्री भी खास, हर रिएक्शन भी खास. लेकिन इस कोशिश में इंसान अपनी असली पर्सनैलिटी पीछे छोड़ देता है. जब आप हर शब्द सोच-समझकर, असर जमाने के दबाव में बोलते हैं, तो बातचीत नैचुरल नहीं रह पाती और सामने वाला दूरी महसूस करने लगता है. सच यह है कि बनावटी व्यवहार ज्यादा देर छिपता नहीं. सामने वाला समझ जाता है कि आप एक्टिंग कर रहे हैं. इसलिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि जैसे हैं, वैसे ही रहें.
देर से पहुंचना
पहली मुलाकात अपने आप में एक साइन होता है कि आप सामने वाले को कितनी अहमियत देते हैं. अगर आप शुरुआत में ही देर से पहुंचते हैं, तो अनजाने में यह मैसेज जाता है कि उनका समय आपके लिए उतना मायने नहीं रखता. इंतजार करवाना एक्साइटमेंट को कम कर सकता है और मिलने से पहले ही हल्की नाराज़गी पैदा कर देता है. इसके उलट, तय समय पर पहुंचना बहुत नॉर्मल लेकिन असरदार तरीका है.
सिर्फ खुद की बातें करते रहना
पहली मुलाकात दो लोगों के बीच तालमेल बनाने का मौका होती है. यह तभी बनता है जब दोनों को बोलने और सुने जाने का बराबर मौका मिले. अगर आप लगातार अपनी ही बातें, एक्सपीरियंस या किस्से सुनाता रहे, तो बातचीत बैलेंस नहीं रह पाती और सामने वाला खुद को अलग-थलग महसूस करने लगता है. इसलिए सामने वाले की भी कहानियां सुनें.
फोन से चिपके रहना
टेबल पर बैठकर अगर ध्यान स्क्रीन में है, तो फिर मिलने का मतलब ही क्या रह गया? आंखों में देखकर बात करना ज्यादा कीमती होता है.
ओवर एक्सपेक्टेशन
पहली मुलाकात में ही सब कुछ तय हो जाएगा. ऐसा सोच लेना दबाव बढ़ा देता है. इसे बस एक खूबसूरत शुरुआत की तरह लें.
तुलना करना
पहली मुलाकात में तुलना करना अक्सर अनजाने में बड़ी गलती बन जाता है. जब आप किसी पुराने रिश्ते, दोस्त की पार्टनर या पहले के एक्सपीरियंस का जिक्र करते हैं, तो सामने वाले को लग सकता है कि आप उसे किसी पैमाने पर तौल रहे हैं. इससे असहजता पैदा होती है और वह खुलकर अपने जैसा रह ही नहीं पाता. हर नया रिश्ता अपनी अलग पहचान और रफ्तार लेकर आता है. उसे बीते हुए लोगों या किस्सों की छाया में रखने के बजाय अपनी जगह और समय देना ज्यादा जरूरी है.
दिखावे में बह जाना
पहली मुलाकात को खास बनाने के लिए अक्सर लोग सोचते हैं कि महंगा रेस्टोरेंट, बड़े-बड़े सरप्राइज या भारी खर्च ही असर डालेंगे. लेकिन सच यह है कि रिश्ते की नींव पैसों से नहीं, एहसास से बनती है. जरूरत से ज्यादा दिखावा कई बार सामने वाले को दबाव में डाल देता है. इसलिए दिखावा न करें.





