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Juice नहीं चीनी का घोल पी रहे आप और हम, पैकेट में मिलने वाले जूस पर संसद में उठी आवाज

पैकेटबंद जूस को लेकर अब बड़ा खुलासा सामने आया है. संसद में Raghav Chadha ने सवाल उठाते हुए कहा कि लोग जिसे हेल्दी जूस समझकर पी रहे हैं, वह असल में चीनी से भरा ड्रिंक हो सकता है.

Juice नहीं चीनी का घोल पी रहे आप और हम, पैकेट में मिलने वाले जूस पर संसद में उठी आवाज
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( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 24 March 2026 5:45 PM IST

बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद जूस को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं. जिसे लोग हेल्दी और पौष्टिक समझकर रोजाना पी रहे हैं, वह असल में चीनी से भरे ड्रिंक हैं. संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए सांसद राघव चड्ढा ने साफ कहा कि भारत का कंज्यूमर बाजार एक बड़ी बीमारी का शिकार है, जिसे मीसलीडिंग, ब्रांडिंग और फॉल्स एडवर्टाइजमेंट के नाम से जाना जाता है.

कंज्यूमर को अट्रैक्टिव पैकेजिंग और भ्रामक दावों के जरिए गुमराह किया जा रहा है. ऐसे में कंज्यूमर यह समझ ही नहीं पाते कि वे जूस नहीं, बल्कि चीनी और प्रिजर्वेटिव से भरा ड्रिंक पी रहे हैं, जिससे कई तरह की बीमारियां भी हो रही हैं.

पैकेट के पीछे छिपा होता है सच

राघव चड्ढा ने बताया कि आजकल बाजार में मिलने वाले कई जूस पैकेट्स के सामने ताजे फलों की अट्रैक्टिव तस्वीरें छपी होती हैं, जिससे कंज्यूमर को लगता है कि वे शुद्ध और न्यूट्रिशन से भरपूर जूस खरीद रहे हैं. लेकिन जब पैकेट को ध्यान से पढ़ा जाता है, तो पीछे छोटे अक्षरों में लिखा होता है कि 'ये तस्वीरें केवल मार्केटिंग के मकसद से हैं.' असल में इन प्रोडक्ट्स में फल की मात्रा बहुत कम और चीनी, कॉन्संट्रेट व प्रिजर्वेटिव ज्यादा होते हैं.

इन ड्रिंक्स से होने वाली बीमारियां

राघव चड्ढा ने बताया कि इस तरह की ब्रांडिंग का सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ रहा है. वे इन ड्रिंक्स को हेल्दी समझकर रोजाना पीते हैं, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि वे ज्यादा मात्रा में चीनी ले रहे हैं. इससे मोटापा, डायबिटीज और अन्य हेल्थ समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

सरकार से उठाए गए बड़े सवाल

संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए राघव चड्ढा ने सरकार से कई अहम सवाल पूछे. उन्होंने जानना चाहा कि भ्रामक तस्वीरों और विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रोडक्ट के पैकेट के सामने ही ज्यादा चीनी की साफ जानकारी देने का कोई नियम बनाया जा रहा है.

साफ लेबलिंग की मांग

राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को यह साफ तौर से बताया जाना चाहिए कि वे जो खरीद रहे हैं, वह असली फ्रूट जूस है या फिर फ्लेवर, चीनी और प्रिजर्वेटिव से बना ड्रिंक. इस मुद्दे के उठने के बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में पैकेजिंग और लेबलिंग को लेकर सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं.

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