टैटू इंक का रंग 36 साल के शख्स के लिया बना काल! पसीना आना हुआ बंद और झड़ गए सारे बाल
आज के समय में टैटू सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि अपनी पहचान दिखाने का जरिया बन चुका है. लेकिन पोलैंड से सामने आया एक मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हर टैटू सुरक्षित होता है? एक 36 वर्षीय शख्स की कहानी बताती है कि एक छोटा-सा लाल फूल का टैटू कैसे पूरे शरीर की गंभीर बीमारी में बदल गया.
आजकल टैटू बनवाना फैशन और सेल्फ-एक्सप्रेशन का बड़ा ट्रेंड बन चुका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि टैटू की इंक आपकी सेहत के लिए खतरा भी बन सकती है? हाल ही में सामने आया एक चौंकाने वाला मामला इसी ओर इशारा करता है, जहां 36 साल के एक शख्स को टैटू इंक से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा.
धीरे-धीरे उसके सिर के बाल झड़ गए, वह पूरी तरह गंजा हो गया और हैरानी की बात यह रही कि उसके शरीर में पसीना आना भी बंद हो गया. इस मामले ने डॉक्टरों से लेकर आम लोगों तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि टैटू बनवाते समय इस्तेमाल होने वाले रंग और केमिकल्स कितने सुरक्षित हैं.
2020 में बनवाया था टैटू
द सन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में उस व्यक्ति ने अपने हाथ (फोरआर्म) पर लाल रंग का फूल गुदवाया. शुरुआत में सब ठीक लगा, लेकिन करीब चार महीने बाद टैटू वाली जगह पर तेज़ खुजली, त्वचा का छिलना और छोटे-छोटे दाने निकलने लगे. धीरे-धीरे यह परेशानी हाथ से छाती तक पहुंची और फिर पूरे शरीर में फैल गई. कुछ ही समय में दाने बड़े-बड़े लाल पैच में बदल गए. डॉक्टरों के मुताबिक यह स्थिति एरिथ्रोडर्मा में बदल गई, जिसमें सिर से पैर तक त्वचा लाल, सूजी हुई और लगातार छिलती रहती है. हालत इतनी बिगड़ गई कि मरीज का सामान्य जीवन प्रभावित होने लगा.
बाल झड़ना और पसीना आना बंद
बीमारी यहीं नहीं रुकी. कुछ समय बाद व्यक्ति के सिर, चेहरे और पूरे शरीर के बाल झड़ने लगे, जिसे मेडिकल भाषा में एलोपेसिया यूनिवर्सलिस कहा जाता है. इसके बाद सबसे खतरनाक समस्या सामने आई कि उसके शरीर ने पसीना बनाना ही बंद कर दिया. पहले पसीना कम हुआ (हाइपोहाइड्रोसिस), फिर पूरी तरह बंद हो गया (एनहाइड्रोसिस). इसका मतलब था कि शरीर अब खुद को ठंडा नहीं कर पा रहा था.
हीट स्ट्रोक का लगातार खतरा
डॉक्टरों के अनुसार, वह व्यक्ति अब न तो ठीक से काम कर पा रहा था और न ही एक्सरसाइज, क्योंकि हीट स्ट्रोक का खतरा हर वक्त बना रहता था. आज भी वह खुद को ठंडा रखने के लिए स्प्रे बोतल से पानी छिड़ककर शरीर को ठंडा करता है.
जांच में सामने आई असली वजह
पोलैंड की व्रोक्लॉ मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने जांच के बाद पाया कि यह सब लाल टैटू इंक से हुई इम्यून रिएक्शन की वजह से हुआ. त्वचा परीक्षण में साफ हुआ कि शरीर की इम्यून सिस्टम ने टैटू की स्याही को दुश्मन समझ लिया और खुद के अंगों पर हमला शुरू कर दिया.
इलाज भी पूरी तरह काम नहीं आया
डॉक्टरों ने महीनों तक स्टेरॉयड दवाएं दीं, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ. आखिरकार टैटू के सूजे हुए हिस्सों को सर्जरी से निकालना पड़ा. इसके बाद बाल दोबारा उगने लगे और बीमारी आगे नहीं बढ़ी, लेकिन एक नई समस्या सामने आई-विटिलिगो, जिसमें त्वचा के कुछ हिस्सों का रंग सफेद हो जाता है. सबसे गंभीर बात यह रही कि पसीना लौटकर नहीं आया.
स्वेट ग्लैंड हमेशा के लिए खराब
जांच में पता चला कि व्यक्ति की स्वेद ग्रंथियां (Sweat Glands) पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं और उनकी जगह स्कार टिशू बन गया है. डॉक्टरों का मानना है कि अब पसीना वापस आने की संभावना लगभग ना के बराबर है. डॉक्टरों के मुताबिक, टैटू से जुड़ी एलर्जी सबसे ज्यादा लाल स्याही में देखी जाती है. पहले लाल इंक में मरकरी, कैडमियम और आर्सेनिक जैसे जहरीले तत्व पाए जाते थे. यूरोपियन यूनियन ने 2022 में टैटू इंक पर सख्त नियम बनाए, लेकिन यह व्यक्ति उससे दो साल पहले टैटू करवा चुका था.
क्या टैटू से पूरे शरीर पर असर हो सकता है?
शोधकर्ताओं का कहना है कि टैटू से होने वाली इम्यून रिएक्शन सिर्फ उसी जगह तक सीमित नहीं रहती. यह पूरे शरीर में फैलकर स्किन, बाल और पसीने के प्रोसेस तक को नुकसान पहुंचा सकती है.





