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ट्विशा थी Schizophrenia का शिकार! अजीब आवाज सुनाई देने से लेकर पीछा करने तक ये हैं इस बीमारी के साइन

नोएडा की ट्विशा केस के बाद Schizophrenia फिर चर्चा में है. इस बीमारी में मरीज को अजीब आवाजें सुनाई देना, हर वक्त डर महसूस होना और किसी के पीछा करने का एहसास जैसे लक्षण हो सकते हैं.

ट्विशा थी Schizophrenia का शिकार! अजीब आवाज सुनाई देने से लेकर पीछा करने तक ये हैं इस बीमारी के साइन
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Schizophrenia बीमारी में इंसान करता है ऐसी हरकतें

हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 23 May 2026 9:39 AM IST

नोएडा की ट्विशा मौत मामले में रोजाना नए खुलासे हो रहे हैं. इस केस में मोड़ तब आया, जब उसकी सास गिरीबाला सिंह ने कहा कि उनकी बहू ट्विशा Schizophrenia जैसी मेंटल बीमारी से जूझ रही थी. इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि आखिर यह बीमारी क्या होती है और इसके लक्षण कैसे पहचाने जा सकते हैं.

दरअसल इस बीमारी में इंसान कई बार ऐसी आवाजें सुनने लगता है, जो असल में होती ही नहीं हैं. कई मरीजों को यह भी महसूस होता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है या उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहता है.

क्या है Schizophrenia?

सिज़ोफ्रेनिया एक मेंटल डिसऑर्डर है है, जिसमें व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता बदलने लगती है. मरीज कई बार कल्पना और वास्तविकता के बीच फर्क नहीं कर पाता. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन अक्सर यंग उम्र में इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं. डॉक्टरों के अनुसार इसके पीछे आनुवंशिक कारण, लंबे समय का तनाव, मानसिक आघात या दिमाग में केमिकल का इंबैलेंस जिम्मेदार हो सकता है.

Schizophrenia के साइन क्या हैं

इस बीमारी का सबसे आम लक्षण है ऐसी आवाजें सुनाई देना, जो असल में होती ही नहीं हैं. मरीज को लग सकता है कि कोई उससे बात कर रहा है, उसका पीछा कर रहा है या उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है. कई बार व्यक्ति डर और शक में जीने लगता है और उसे हर किसी पर शक होने लगता है.

बातों का उलझा हुआ होना

स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति की बातें कई बार समझ से बाहर लग सकती हैं. वह एक बात से दूसरी बात पर अचानक चला जाता है या बिना मतलब की बातें करने लगता है. उसके लिए अपने विचार साफ तरीके से व्यक्त करना मुश्किल हो सकता है.

अकेले रहना पसंद करना

इस बीमारी में व्यक्ति धीरे-धीरे लोगों से दूरी बनाने लगता है. वह दोस्तों, परिवार और सोशली कटने लगता है. कई मरीज घंटों अकेले रहना पसंद करते हैं और किसी से बातचीत करने में इंटरेस्ट नहीं दिखाते.

मूड में अचानक बदलाव

कुछ मरीजों में अचानक गुस्सा, डर, उदासी या बेचैनी बढ़ सकती है. छोटी-छोटी बातों पर उनका बर्ताव बदल सकता है. कई बार व्यक्ति बिना वजह चिड़चिड़ा या इमोशनल हो जाता है.

इलाज और मदद जरूरी

स्किजोफ्रेनिया का असर केवल मानसिक स्थिति तक सीमित नहीं रहता. मरीज का काम, पढ़ाई, रिश्ते और सामान्य जीवन भी प्रभावित होने लगता है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. मानसिक बीमारी को नजरअंदाज करना सही नहीं माना जाता. अगर किसी व्यक्ति में लंबे समय तक ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो मनोचिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है. सही इलाज, दवाइयों और परिवार के सहयोग से कई मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं.

यदि आप चिंता या भावनात्मक दबाव से गुजर रहे हैं, तो भारत सरकार की जीवन आस्था हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें. सुसाइड सामाजिक समस्या है.

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