अगर बार-बार मिल रही है असफलता, तो अपनाइए Virat Kohli का ये फॉर्मूला; पीवी सिंधु ने आजमाया और बन गईं चैंपियन
लगातार हार और खराब फॉर्म से जूझ रहीं पीवी सिंधु ने जब विराट कोहली से मुश्किल दौर से बाहर निकलने का राज पूछा, तो उन्होंने कहा कि खेल के इन्ज़ॉयमेंट को फिर से फील करो और नतीजों को भूल जाओ.
सक्सेस के लिए विराट कोहली का फॉर्मूला
जिंदगी में कई बार ऐसा समय आता है, जब मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिलती. धीरे-धीरे आत्मविश्वास कम होने लगता है और मन हार मानने लगता है. ऐसे समय में कभी-कभी किसी की एक छोटी-सी सलाह पूरी सोच बदल देती है. भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. लंबे समय तक खराब फॉर्म, चोट और लगातार आलोचना झेलने के बाद उन्होंने जापान ओपन 2026 जीतकर शानदार वापसी की. इस वापसी के पीछे कड़ी मेहनत के साथ विराट कोहली की एक ऐसी एडवाइज भी थी, जिसने दोबारा उन्हें चैंपियन बना दिया.
दरअसल विराट कोहली की सलाह जितनी आसान थी, उतनी ही असरदार भी. क्रिकेटर ने सिर्फ एक लाइन में जवाब दिया. उन्होंने कहा 'अपने काम की खुशी दोबारा खोजो, सिर्फ नतीजों के पीछे मत भागो.' सिंधु ने इस बात को दिल से अपनाया, खेल के प्रति अपना खोया हुआ प्यार वापस पाया और फिर जापान ओपन 2026 का खिताब जीतकर शानदार वापसी की. अगर आप भी बार-बार मिल रही असफलता से परेशान हैं, तो कोहली का यह फॉर्मूला आपकी सोच बदल सकता है.
विराट कोहली ने पीवी सिंधु से क्या कहा था?
instagram-@virat.kohli
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लगातार खराब परफॉर्मेंस से परेशान पीवी सिंधु ने एक समय विराट कोहली से पूछा कि उन्होंने अपने करियर के उस दौर से कैसे बाहर निकलने का रास्ता निकाला, जब वह शतक नहीं जड़ पा रहे थे. विराट कोहली का जवाब बहुत आसान था. उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ इस बात पर ध्यान दिया कि उन्हें फिर से रन बनाने में खुशी महसूस हो. यानी गोल सिर्फ रिकॉर्ड बनाना नहीं था, बल्कि खेल को दोबारा दिल से खेलना था. यही बात सिंधु के मन में बैठ गई. उन्होंने समझा कि अगर खेल का आनंद ही खत्म हो जाएगा, तो अच्छे नतीजे भी नहीं आएंगे.
पीवी सिंधु ने इस सलाह पर कैसे काम किया?
instagram-@pvsindhu1
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कुछ समय बाद सिंधु के पैर की उंगली का लिगामेंट फट गया. डॉक्टरों ने उन्हें तीन महीने आराम करने की सलाह दी. इस दौरान उनके पति वेंकट दत्ता साई उन्हें अमेरिका के अटलांटा लेकर गए. वहां उनका फोकस सिर्फ शरीर को ठीक करना नहीं था, बल्कि मेंटली मजबूत बनाना था. परिवार के बीच रहकर उन्होंने बिना किसी दबाव के खुद को फिर से तैयार किया. वहां सिंधु को स्टार खिलाड़ी की तरह नहीं, बल्कि एक नॉर्मल इंसान की तरह रहने का मौका मिला. यही माहौल उनके अंदर बैडमिंटन के लिए खोई हुई एक्साइटमेंट वापस लेकर आया.
क्या सिर्फ मेहनत से मिली जीत?
नहीं. इस बार सिंधु की पूरी टीम ने मिलकर हर छोटी चीज पर काम किया. उनके खेल का डेटा निकाला गया और पता चला कि पहले की तुलना में उनका आक्रामक खेल कम हो गया था. पहले जहां वह कम शॉट्स में नंबर जीत लेती थीं, वहीं अब उन्हें एक ही रैली में कई बार हमला करना पड़ रहा था. इससे गलतियां भी बढ़ रही थीं. इसके अलावा लाइन जजमेंट में भी पहले से ज्यादा गलत फैसले होने लगे थे. यानी आसान नंबर लेने की कोशिश उनके खेल को नुकसान पहुंचा रही थी. इन सभी कमियों पर एक-एक करके काम किया गया.
क्या आम लोगों के भी काम आ सकती है सलाह?
यह सलाह सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं है. अगर आप पढ़ाई, नौकरी, बिजनेस या किसी भी काम में लगातार असफलता का सामना कर रहे हैं, तो केवल नतीजों के पीछे भागने के बजाय उस काम से जुड़ने की कोशिश करें, जिसे कभी आपने खुशी से शुरू किया था. जब इंसान सिर्फ सफलता का दबाव लेकर चलता है, तो तनाव बढ़ता है. लेकिन जब वह अपने काम का आनंद लेना शुरू करता है, तो आत्मविश्वास धीरे-धीरे वापस आने लगता है. यही आत्मविश्वास आगे चलकर बेहतर परफॉर्में, की नींव बनता है. अगर आप भी इन दिनों आत्मविश्वास की कमी महसूस कर रहे हैं, तो शायद यह सलाह आपके लिए भी उतनी ही काम की साबित हो सकती है. कई बार मंजिल तक पहुंचने का रास्ता सिर्फ मेहनत बढ़ाने में नहीं, बल्कि अपने काम से दोबारा प्यार करने में छिपा होता है.




