सुबह उठने के लिए लगाने पड़ते हैं कई अलार्म? तो हो जाएं सावधान, इस आदत से हो सकती हैं कई बीमारियां
सुबह उठने के लिए एक नहीं, बल्कि कई-कई अलार्म लगाना आजकल बहुत से लोगों की आदत बन चुकी है. पहला अलार्म बंद किया, फिर स्नूज़, फिर दूसरा और तीसरा अलार्म-लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपकी नींद और सेहत के बारे में क्या संकेत देती है? स्लीप एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बार-बार अलार्म बजने पर भी बिस्तर छोड़ने में दिक्कत होना इस बात का इशारा है कि आपका शरीर पूरी तरह से आराम नहीं कर पा रहा है. अच्छी नींद सिर्फ घंटों की गिनती नहीं, बल्कि सुबह बिना अलार्म के तरोताजा महसूस करने से जुड़ी होती है.
सुबह उठने के लिए कई अलार्म लगाना आजकल बहुत से लोगों की आम आदत बन चुकी है. पहला अलार्म बंद करते ही दूसरा बजने लगता है, फिर तीसरा और कभी-कभी चौथा भी. यह सिर्फ सुबह उठने की परेशानी नहीं, बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी भी हो सकती है.
स्लीप एक्सपर्ट्स का मानना है कि बार-बार अलार्म की मदद से उठना इस बात का साइन है कि आपका शरीर पूरी तरह से आराम नहीं कर पा रहा है.
कई अलार्म क्यों होते हैं खतरे की घंटी?
जब हम अलार्म की आवाज से अचानक नींद से उठते हैं, तो दिमाग को गहरी नींद की अवस्था से झटका लगता है. इसे स्लीप इनर्शिया कहा जाता है. इस स्थिति में व्यक्ति को सुस्ती, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी और दिमागी धुंध महसूस होती है. कई बार यह असर घंटों तक बना रह सकता है. अगर आपको रोज़ उठने के लिए एक से ज्यादा अलार्म की जरूरत पड़ती है, तो यह नींद की कमी या खराब स्लीप क्वालिटी का संकेत हो सकता है.
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कितनी नींद है जरूरी?
नींद की जरूरत उम्र के हिसाब से बदलती है, लेकिन ज्यादातर वयस्कों के लिए 7 से 8.5 घंटे की नींद को आदर्श माना जाता है. बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो 5 घंटे से कम नींद में भी ठीक से काम कर पाते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग लगातार 7 घंटे से कम सोते हैं, उनमें थकान, मूड स्विंग, याददाश्त कमजोर होना और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं.
नींद पूरी न होने के कारण समस्याएं
सिर्फ कई अलार्म ही नहीं, बल्कि कुछ और लक्षण भी बताते हैं कि आपकी नींद अधूरी है. जैसे अगर आपको पूरी रात सोने के बाद भी नींद आ रही है, तो यह एक समस्या है. इसके अलावा, फोकस करने या बातें याद रखने में दिक्कत आना. इतना ही नहीं, अगर आप दिनभर चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं या मूड खराब रहता है, तो इसका मतलब है कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है.
अच्छी नींद किसे कहते हैं?
हेल्दी नींद का मतलब है: बिना अलार्म के अपने आप जाग जाना,सुबह उठते ही फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस करना, दिनभर एनर्जी का स्तर बना रहना, ज्यादा कैफीन के बिना काम कर पाना. जब नींद संतुलित होती है, तो शरीर की सर्कैडियन रिदम सही तरीके से काम करती है, जिससे शारीरिक और मानसिक सेहत बेहतर रहती है.
बेहतर नींद के लिए क्या करें
नींद सुधारने के लिए बड़े बदलाव नहीं, छोटे कदम काफी हैं. रोज़ एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें, वीकेंड पर भी. सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाएं, शाम के बाद चाय-कॉफी कम करें, बेडरूम को शांत, अंधेरा और ठंडा रखें, सोने से पहले हल्की किताब पढ़ें या ध्यान करें अगर पूरी नींद लेने के बावजूद भी सुबह थकान महसूस होती है, तो स्लीप एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है. कई बार इंसोमनिया, स्लीप एपनिया या अनियमित स्लीप पैटर्न जैसी समस्याएं नींद की गुणवत्ता को बिगाड़ देती हैं.





