Boat Safety Tips: बोटिंग का मजा न बने हादसा, जान लें लाइफ जैकेट, कैपेसिटी और क्रूज आउटिंग का सही समय
भारत में बोटिंग के दौरान लगातार हो रहे हादसे सुरक्षा की अनदेखी का बड़ा उदाहरण हैं. जानिए वो 7 जरूरी नियम जो आपकी एक छोटी सी ट्रिप को सुरक्षित बना सकते हैं.
हर व्यक्ति अपनी यात्रा को अलग-अलग तरीके से एंजॉय करता है. कुछ लोग पहाड़ों पर जाते हैं तो वहाँ ट्रैकिंग, बंजी जंपिंग या दूसरे एडवेंचर स्पोर्ट्स करके रोमांच महसूस करते हैं. वहीं जो लोग समुद्र किनारे, नदी या झील के पास घूमने जाते हैं, वे नाव की सवारी यानी बोटिंग को अपनी ट्रिप का सबसे यादगार हिस्सा बनाते हैं. भारत में कई ऐसे खूबसूरत पर्यटन स्थल हैं जहां बोटिंग किए बिना यात्रा अधूरी सी लगती है. लेकिन कई बार यह मजेदार बोटिंग का अनुभव अचानक मुसीबत में बदल जाता है.
हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम पर क्रूज पलटने का दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें कई लोगों की डूबकर मौत हो गई. इस हादसे की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. जिसमें एक मां और उसका बच्चा दिख रहे हैं. इस तस्वीर को देखकर हर किसी का दिल दहल गया है. इसी तरह कुछ समय पहले मथुरा में भी नाव डूबने से कई श्रद्धालु अपनी जान गंवा बैठे. देश में ऐसे हादसे बार-बार होते रहते हैं. असल समस्या यह है कि ज्यादातर भारतीय पर्यटकों को नाव पर चढ़ने से पहले जरूरी सुरक्षा नियमों की जानकारी ही नहीं होती. इसलिए समझाते हैं कि नाव या क्रूज की सवारी करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
1.नाव की सवारी
नदी, झील या समुद्र में बोट पर घूमना सचमुच एक इंट्रेस्टिंग और मजेदार होता है. पानी की लहरों पर चलते हुए चारों तरफ का नजारा देखना, हवा का झोंका महसूस करना यह सब बहुत अच्छा लगता है. लेकिन छोटी-सी लापरवाही भी इस अनुभव को खतरे में बदल सकती है. इसलिए पहले से तैयारी करके चलना बहुत जरूरी है.
2. कैपेसिटी पर ध्यान दें
नाव की कैपेसिटी की जानकारी हर सवारी को होनी चाहिए जब भी किसी भी क्रूज या बोट में बैठे तो नीचे की तरफ ध्यान दें की तरफ एक नंबर लिखा होता है. जो बताता है कि उसमें कितने लोग सुरक्षित तरीके से बैठ सकते हैं. साथ ही एक वाइट बॉर्डर भी बना होता है. जब लोग चढ़ते हैं तो अगर यह सफेद पट्टी पानी में डूबने लगे तो समझना चाहिए कि नाव पर ज्यादा भार हो गया है. बड़ी नावों या क्रूज पर भी साफ-साफ लिखा रहता है कि अधिकतम कितने यात्री बैठ सकते हैं. कभी भी तय संख्या से ज्यादा लोगों के साथ नाव में न चढ़ें. ज्यादा भीड़ होने से नाव का बैलेंस बिगड़ जाता है और पलटने का खतरा बढ़ जाता है.
3. मौसम की सही जानकारी लेना
मौसम की सही जानकारी लेनाबरगी हादसे में जब लोग क्रूज पर चढ़े थे तब मौसम सामान्य लग रहा था. लेकिन नदी के बीच में पहुंचते ही तेज हवा चलने लगी और क्रूज पलट गई. इसलिए नाव पर चढ़ने से पहले हमेशा मौसम की जानकारी जरूर ले लें. लोकल प्रशासन, नाव मालिक या मौसम ऐप से पता करें कि आगे आने वाले घंटों में हवा, बारिश या तूफान तो नहीं आने वाला. अगर मौसम खराब होने की आशंका हो तो यात्रा को टाल दें.
3. लाइफ जैकेट
सबसे जरुरी सुरक्षा नाव पर बैठने से पहले लाइफ जैकेट पहनना सबसे जरूरी काम है. भले ही आपको तैरना आता हो, फिर भी लाइफ जैकेट जरूर पहनें. लाइफ जैकेट पहनने के बाद उसे अच्छे से चेक कर लें कहीं कट-फट तो नहीं है, बकल ठीक से बंद हो रहा है या नहीं. पानी में गिरने, नाव के हिलने या तेज लहर आने पर लाइफ जैकेट आपको ऊपर तैरने में मदद करती है. यह आपकी जान बचाने वाली सबसे बड़ी सुरक्षा है.
4. नियमों का पालन करें
हर पर्यटन स्थल पर बोटिंग के अपने नियम होते हैं. कुछ जगहों पर गहरे पानी वाले इलाके, तेज धारा वाले हिस्से या प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने की मनाही होती है. वहां लिखे हुए बोर्ड पढ़ें या गाइड से पूछकर समझ लें. नियम तोड़ने से न सिर्फ अपनी जान खतरे में पड़ती है बल्कि दूसरों को भी परेशानी हो सकती है.
5. इमरजेंसी में क्या करना चाहिए?
यह पहले से जान लेंनाव पर चढ़ते ही ये बात ध्यान में रखें:
- अगर कोई हादसा हो जाए तो क्या करना चाहिए?
- नाव में लाइफ बोट, रस्सी या दूसरे बचाव के सामान कहां रखे हैं?
- नाव चलाने वाले व्यक्ति का कितना अनुभव है?
- ये छोटी-छोटी जानकारियां इमरजेंसी में बहुत काम आती हैं.
6. समय का ध्यान रखें
सूरज निकलने से पहले और सूरज डूबने के बाद नाव की सवारी न करें. अंधेरे में अगर कोई हादसा हो जाए तो बचाव कार्य करना बहुत मुश्किल हो जाता है. दिन के उजाले में ही नाव चलाना सबसे सुरक्षित होता है.
7. सीपीआर की जानकारी जरूर रखें
अगर कोई व्यक्ति पानी में डूब जाए और बाहर निकालने के बाद बेहोश हो तो सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देकर उसकी जान बचाई जा सकती है. यह आसान तकनीक है थोड़ी सी ट्रेनिंग लेकर आप इसे सीख सकते हैं. यात्रा पर निकलते समय यह ज्ञान साथ रखें.




