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ये चिप करेगी जीवनदान का काम! हार्टअटैक से आने से पहले मिलेगा अलर्ट, जानें देसी बायोचिप के बारे में

दिल्ली की मिरांडा हाउस कॉलेज और DRDO ने मिलकर विकसित की “Made in India” BioFET चिप, जो सैनिकों को हार्ट अटैक से पहले अलर्ट देगी. पोर्टेबल सेंसर रक्त के बायोमार्कर को चेक कर समय पर चेतावनी देता है, जिससे जीवन बचाना आसान होगा.

ये चिप करेगी जीवनदान का काम! हार्टअटैक से आने से पहले मिलेगा अलर्ट,  जानें देसी बायोचिप के बारे में
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( Image Source:  Sora- AI )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी

Published on: 31 Jan 2026 9:37 AM

दिल्ली की मिरांडा हाउस कॉलेज ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सहयोग से एक 'Made in India' बायोलॉजिकल चिप विकसित की है, जो सैनिकों को हार्ट अटैक के संभावित खतरे से पहले ही चेतावनी दे सकती है. इस डिवाइस का नाम BioFET रखा गया है और यह रक्त सीरम का विश्लेषण कर महत्वपूर्ण बायोमार्कर में खतरनाक बदलाव को पहचानकर समय रहते अलर्ट देता है.

प्रोफेसर मोनिका तोमर, जिन्होंने इस रिसर्च का नेतृत्व किया, बताती हैं, 'हमने जो डिवाइस विकसित किया है, वह BioFET है, जो एक ही समय में रक्त के नमूने से तीन बायोमोलेक्यूल्स का पता लगा सकता है.' उन्होंने आगे कहा कि ये बायोमोलेक्यूल्स सीधे हृदयाघात (cardiac arrest) से जुड़े हैं और यदि यह तयशुदा स्तर से अधिक हों, तो गंभीर जोखिम का संकेत देते हैं.

सैनिकों के लिए क्यों है महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में पोस्टेड सैनिक शून्य से नीचे तापमान में रक्त गाढ़ा होने और अचानक क्लॉट बनने के उच्च जोखिम में रहते हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. प्रोफेसर तोमर कहती हैं, 'हम जानते हैं कि हमारे सैनिक ऐसे कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं. समय पर चेतावनी मिलने से उन्हें बेस कैंप या मिलिट्री हॉस्पिटल तक जल्दी पहुंचाया जा सकता है, जिससे जीवन बचाया जा सकता है.'

मुख्य लाभ-

  • अत्यधिक ठंड में शरीर की परिसंचरण प्रणाली पर असर.
  • रक्त में अचानक क्लॉटिंग से जानलेवा स्थिति.
  • सेंसर चेतावनी देता है कि कब क्लॉटिंग खतरनाक स्तर तक पहुंच रही है.
  • समय पर इलाज और मेडिकल इंटरवेंशन संभव.
  • पॉइंट-ऑफ-केयर और फील्ड उपयोग

BioFET ऑन-द-स्पॉट टेस्टिंग को सपोर्ट करता है, जिससे बड़ी लैब उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती. प्रोफेसर तोमर बताती हैं, 'रक्त सीरम को चिप पर लगाया जाता है जैसे ग्लूकोमीटर में लगाया जाता है, और डिवाइस की स्क्रीन बायोमार्कर के स्तर को सुरक्षा सीमा के साथ दिखाती है. यह डिवाइस पूरी तरह पोर्टेबल है.' हालांकि, उन्होंने तकनीकी सीमाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सेंसर सामान्य वातावरण में काम करता है और विश्वसनीय परिणाम के लिए नियंत्रित परिस्थितियों की जरूरत होगी.

विकास, टीम और इन-हाउस निर्माण

BioFET को तैयार करने में लगभग पांच साल लगे. प्रोफेसर तोमर ने बताया, 'दो से तीन साल लगातार रिसर्च और फिर DRDO के साथ दो साल की कड़ी मेहनत की गई.' प्रोटोटाइप पहले ही DRDO को ट्रायल के लिए सौंप दिया गया है. टीम ने निर्माण क्षमता कॉलेज परिसर में ही विकसित की. प्रोफेसर तोमर कहती हैं, 'हमने भारत में ही ऐसे उपकरण बनाए हैं और इसकी लागत 50–60 प्रतिशत तक कम हुई है.' इस परियोजना में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के छोटे छात्र और फैकल्टी टीम ने काम किया.

भविष्य में सुरक्षा और स्वास्थ्य में क्रांति

यदि फील्ड ट्रायल सफल रहते हैं और सेना इसे अपनाती है, तो BioFET सैनिकों की सुरक्षा और अत्यधिक परिस्थितियों में त्वरित मेडिकल निर्णय लेने में महत्वपूर्ण उपकरण साबित हो सकता है. प्रोफेसर तोमर कहती हैं, 'यह कार्य चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इससे सैनिकों के जीवन में बड़ा अंतर आ सकता है.

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