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10 पॉइंट्स में समझें कैसे होते हैं Boomers, ये ट्रिक्स जान ली तो इनसे काम निकालना हो जाएगा आसान
हर पीढ़ी के बारे में कुछ तय धारणाएं बना दी जाती हैं, और Boomers भी इससे अछूते नहीं हैं. अक्सर उन्हें टेक्नोलॉजी से दूर, बदलाव से डरने वाला या पुराने ख्यालों में अटका हुआ समझ लिया जाता है. लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा अलग है.
( Image Source:
AI SORA )
Boomers यानी 1946 से 1964 के बीच जन्मी वह पीढ़ी, जिसने बदलते दौर को करीब से देखा और हर बदलाव के साथ खुद को ढाला है. अक्सर उन्हें टेक्नोलॉजी से दूर, पुराने विचारों वाला या बदलाव से घबराने वाला समझ लिया जाता है. लेकिन सच यह है कि इस पीढ़ी के पास एक्सपीरियंस, पेसेंस और रिश्तों को निभाने की खास समझ होती है, जो किसी भी टीम या संगठन के लिए बेहद कीमती साबित हो सकती है.
अगर आप Boomers के साथ काम करते हैं या उन्हें बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं, तो कुछ आसान बातें जान लेना ही काफी है. आइए 10 पॉइंट्स में समझते हैं कि Boomers आखिर हैं कौन और उनसे काम करने की सही ट्रिक्स क्या हैं.
Boomers की A-Z कुंडली
- Boomers को अक्सर टेक्नोफोबिक कहा जाता है. जबकि वे नई तकनीक अपनाने को तैयार रहते हैं, बस उसका मकसद साफ होना चाहिए.
- अक्सर बूमर्स को “पुराने जमाने का” कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. लोगों को लगता है कि वे नई सोच या आधुनिक तरीकों को अपनाने में पीछे हैं. लेकिन ऐसा सोचना पूरी तरह सही नहीं है. दरअसल, वे हर फैसले को जल्दबाज़ी में नहीं लेते, बल्कि सोच-समझकर कदम बढ़ाते हैं. वे ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय यह समझने की कोशिश करते हैं कि कोई फैसला लंबे समय में कितना सही रहेगा.
- लोग कहते हैं कि वे बदलाव का विरोध करते हैं. दरअसल वे सवाल इसलिए पूछते हैं क्योंकि उन्होंने पहले सिस्टम फेल होते देखे हैं.
- “फोन कॉल क्यों जरूरी है?” यह आम शिकायत है. Boomers के लिए आवाज से बात करना भरोसा और रिश्ता बनाने का जरिया है.
- यह माना जाता है कि वे Slack या नए टूल नहीं समझते हैं. वे सीखना चाहते हैं, बस उन्हें दिखाइए कि इससे काम कैसे बेहतर होगा.
- उन्हें जिद्दी और इनफ्लेक्सिबल कहा जाता है. हकीकत में वे स्टेबिलिटी और भरोसे को इंपोर्टेंस देते हैं.
- बूमर्स अपने काम में रिश्तों को तवज्जो देते हैं. उनके लिए प्रोफेशनल कनेक्शन सिर्फ काम नहीं, विश्वास पर टिके होते हैं.
- टीम में वे मेंटर की भूमिका निभा सकते हैं. उनका अनुभव नई पीढ़ी के लिए सीखने का मजबूत आधार बनता है.
- उन्हें लीड करते समय रिस्पेक्ट सबसे पहले दें. जब उन्हें महत्व मिलता है, तो वे पूरी वफादारी से साथ खड़े रहते हैं.
- परंपरा और इनोवेशन का बैलेंसउन्हें पसंद आता है. अगर बदलाव में उनका एक्सपीरियंस शामिल हो, तो वे उसे दिल से अपनाते हैं.




