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आरक्षण छोड़िए, महिला कर्मचारियों को लेकर दबाव में रहती हैं कंपनियां: Pvt Sec में Women Reservation कितना सही?

कॉरपोरेट सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर बहस तेज हो गई है, लेकिन इसके साथ कंपनियों पर बढ़ते दबाव की भी चर्चा हो रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्राइवेट सेक्टर में महिलाओं को आरक्षण देना कितना सही है?

आरक्षण छोड़िए, महिला कर्मचारियों को लेकर दबाव में रहती हैं कंपनियां: Pvt Sec में Women Reservation कितना सही?
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समी सिद्दीकी
By: समी सिद्दीकी3 Mins Read

Updated on: 5 April 2026 9:07 AM IST

Women Reservation: लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर बहस छिड़ी हुई है. सरकार चाहती है कि वह लोकसभा की सीटें बढ़ाकर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दे. इस बीच प्राइवेट और सरकारी क्षेत्रों में भी महिलाओं के आरक्षण की बात उठने लगी है.

मौजूदा वक्त में महिला आबादी का एक छोटा सा हिस्सा ही प्राइवेट या कॉरपोरेट सेक्टर्स में काम करता है. लेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि कॉरपोरेट सेक्टर में महिलाओं को आरक्षण देना कितना सही है? Economist Mitali Nikore का कहना है कि कंपनियों में महिलाओं को आरक्षण देना सही नहीं है. उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि कंपनियां महिलाओं की वजह से काफी प्रेशर में रहती हैं.

महिलाओं को नौकरी देने से क्यों कतराती हैं कंपनियां?

Mitali Nikore का कहना है कि महिलाएं सबसे ज्यादा इनफॉर्मल सेक्टर्स में काम करती हैं, जैसे घरों और खेतों में काम. इसके बाद महिलाओं की दूसरी सबसे बड़ी भागीदारी कॉरपोरेट सेक्टर्स में देखने को मिलती है. इन जगहों पर महिलाओं को बेहतर माहौल देने के लिए कंपनियों पर काफी दबाव रहता है.

उन्होंने बताया कि कंपनियों पर दबाव रहता है कि वे सुरक्षा का इंतजाम करें, मैटरनिटी लीव दें, पीरियड लीव दें. ट्रंप के आने के बाद इन सभी चीजों पर सवाल उठाए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि डाइवर्सिटी मानव अधिकारों का उल्लंघन है. आसान भाषा में समझें तो पुरुषों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि महिलाओं को ज्यादा तवज्जो दी जा रही है. यह भी कहा जा रहा है कि जेंडर के बजाय मेरिट को ज्यादा महत्व देना चाहिए.

ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि इन सभी दबावों के कारण कंपनियों में महिलाओं को नौकरी मिलने में समस्या आती है. साथ ही, अगर महिलाएं किसी कंपनी में काम करती भी हैं, तो कंपनी पर यह दबाव रहता है कि वह दोनों जेंडर्स को बराबर अधिकार दे सके. यह भी एक वजह है कि कॉरपोरेट सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी कम रहती है.

मिताली ने कहा कि हमें यह भी देखना होगा कि अमेरिका और भारत की सोसाइटी में कितना फर्क है. वहां महिलाएं अलग तरह की समस्याएं झेलती हैं और यहां अलग तरह की समस्याएं उनके सामने आती हैं. अमेरिका और भारत का सामाजिक ढांचा काफी अलग है.

कॉरपोरेट में क्या महिलाओं के लिए होना चाहिए आरक्षण?

मिताली का कहना है कि कॉरपोरेट सेक्टर में महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए. उनका मानना है कि किसी भी बिजनेस को चलाने के लिए टैलेंट की जरूरत होती है, जिसमें महिलाएं भी हो सकती हैं और पुरुष भी. सरकार की जिम्मेदारी इंडस्ट्री को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि ऐसा सिस्टम बनाना है जिसमें हर महिला और पुरुष वर्कफोर्स में हिस्सा ले सके. इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए.

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