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क्यों नहीं मिलेगा प्योर पेट्रोल, E10 और E20 के बीच विकल्प, एथेनॉल पर सरकार ने FAQ से दिया हर जवाब

सरकार ने साफ किया है कि अब प्योर पेट्रोल और E10 का विकल्प नहीं मिलेगा. जानिए E20, एथेनॉल ब्लेंडिंग, माइलेज, इंजन, कीमत, किसानों और विदेशी मुद्रा बचत पर FAQ के 10 बड़े जवाब.

क्यों नहीं मिलेगा प्योर पेट्रोल, E10 और E20 के बीच विकल्प, एथेनॉल पर सरकार ने FAQ से दिया हर जवाब
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अगर आप पेट्रोल पंप पर जाकर अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि आपको पहले की तरह प्योर पेट्रोल, E10 या E20 में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प मिलेगा, तो ऐसा मत सोचिए. अब ऐसा संभव नहीं होगा. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में E20 पेट्रोल को ही मानक ईंधन बनाया जा रहा है. इसके पीछे सिर्फ पर्यावरण की चिंता नहीं, बल्कि कच्चे तेल के आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय बढ़ाना और ऊर्जा सुरक्षा जैसे बड़े आर्थिक लक्ष्य भी जुड़े हैं. प्योर पेट्रोल और एथेनॉल पर सरकार को FAQ से समझिए पूरी कहानी.

दरअसल, देश में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है. पहले E5, फिर E10 और अब E20 तक पहुंचने का सफर. इसे भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. सरकार का दावा है कि इससे भारत की आयातित तेल पर निर्भरता घटेगी, जबकि कृषि क्षेत्र को नया बाजार मिलेगा.

हालांकि आम लोगों के मन में माइलेज, इंजन की सेहत, पुराने वाहनों की सुरक्षा और ईंधन की कीमत को लेकर कई सवाल बने हुए हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि E20 लागू करने का फैसला केवल पर्यावरणीय कारणों से नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स, आर्थिक व्यवहार्यता और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है.

सरकार का दावा है कि इससे प्रदूषण घटेगा, किसानों की आय बढ़ेगी, विदेशी मुद्रा बचेगी और भविष्य में देश की ऊर्जा सुरक्षा तथा ईंधन आपूर्ति अधिक मजबूत होगी.आइए FAQ के जरिए जाने 10 सबसे महत्वपूर्ण सवालों के जवाब.

Ethanol Blending Programme E20 Fuel Petrol Ministry FAQ

E10 और E20 पर सरकार के FAQ में मिले 10 बड़े जवाब

नहीं. इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है और न ही भारत ने इसे जल्दबाजी में अपनाया है. करीब 100 वर्ष पहले हेनरी फोर्ड ने अपनी प्रसिद्ध मॉडल-टी कार को इथेनॉल पर चलने योग्य बनाया था. आज अमेरिका और ब्राजील जैसे देश दशकों से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं. भारत में भी इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम 2003 में शुरू हुआ था और पिछले दो दशकों में कई चरणों में इसका विस्तार किया गया. इसलिए E20 नीति लंबे परीक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और चरणबद्ध सरकारी योजना का परिणाम है, न कि अचानक लिया गया निर्णय.

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देशभर के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर प्योर पेट्रोल, E10 और E20 तीनों की अलग सप्लाई चेन और भंडारण व्यवस्था बनाना बेहद महंगा और जटिल है. इसलिए सरकार ने लॉजिस्टिक्स आसान रखने, लागत घटाने और पूरे देश में एक समान ईंधन उपलब्ध कराने के लिए E20 को मानक पेट्रोल बनाने का फैसला किया है.

सरकार का मानना है कि E20 से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी. साथ ही गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा. इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, कृषि क्षेत्र को फायदा मिलेगा और भारत आयातित तेल पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम कर सकेगा.

सरकार का कहना है कि ऑटोमोबाइल कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों ने व्यापक परीक्षणों के बाद E20 को अधिकांश पुराने वाहनों के लिए सुरक्षित माना है. वाहन निर्माता की सर्विस गाइड का पालन करने और नियमित रखरखाव कराने पर किसी बड़े तकनीकी नुकसान की आशंका नहीं बताई गई है.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि E20 इस्तेमाल करने पर कुछ वाहनों में 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है. हालांकि, सरकार का कहना है कि बेहतर दहन, कम प्रदूषण, ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता घटने जैसे दीर्घकालिक फायदे इस मामूली कमी की भरपाई करते हैं.

सरकार के अनुसार एथेनॉल की खरीद तय कीमत पर होती है, जो लगभग 71-72 रुपये प्रति लीटर है. इसलिए E20 तैयार करने की कुल लागत सामान्य पेट्रोल के बराबर पड़ती है. यही कारण है कि उपभोक्ताओं को इसकी कीमत में कोई बड़ा अंतर दिखाई नहीं देता.

सरकार के अनुसार E20 को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने से पहले विभिन्न मौसम और सड़क परिस्थितियों में वैज्ञानिक परीक्षण किए गए. इन परीक्षणों के आधार पर इसे सुरक्षित ईंधन माना गया है. नियमित सर्विस और निर्माता के दिशा-निर्देशों का पालन करने पर किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है.

सरकार ने बताया कि मारुति, हीरो सहित कई कंपनियों ने व्यापक परीक्षण किए हैं. इन परीक्षणों में इंजन के पुर्जों में असामान्य घिसावट, जंग या खराबी के प्रमाण नहीं मिले. इसलिए सामान्य उपयोग और नियमित सर्विस के साथ E20 को सुरक्षित ईंधन माना गया है.

एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, मक्का और अन्य कृषि फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को अपनी उपज का अतिरिक्त बाजार मिलता है. सरकार का दावा है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से हर साल हजारों करोड़ रुपये सीधे किसानों और कृषि आधारित उद्योगों तक पहुंच रहे हैं.

पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने से कच्चे तेल का आयात घटता है. इससे भारत को कम विदेशी तेल खरीदना पड़ता है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है. सरकार का कहना है कि यह कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आयात बिल कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है.

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