कौन थे Sir Sobha Singh, जिनके नाम पर है ट्रस्ट, RSS से जुड़े संगठनों से किराए को लेकर लंबा विवाद, जानें कहां तक पहुंचा मामला
सर शोभा सिंह पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और कुछ अन्य संस्थाओं के खिलाफ लंबे समय से किराया न देने को लेकर याचिका दायर कराई गई थी. मामला तीस हजारी कोर्ट में चल रहा है.
Sir Shobha Singh Trust
आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और कुछ अन्य संस्थाओं के खिलाफ सर शोभा सिंह पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई होगी. ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास स्थित सर शोभा सिंह बिल्डिंग के चार हिस्सों का लंबे समय से किराया नहीं दिया गया और परिसर पर बिना अनुमति कब्जा बना हुआ है. विवादित परिसर में इमारत की दो मंजिलों में फैले चार कमरे शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल बीएमएस अपने दिल्ली मुख्यालय के तौर पर कर रहा है.
यही इमारत कभी भारतीय जनसंघ का कार्यालय हुआ करती थी. ट्रस्ट के मुताबिक, चारों हिस्सों से जुड़े अलग-अलग मामले अदालत में लंबित हैं. 2021 में दाखिल याचिका में ट्रस्ट ने कहा था कि संबंधित पक्ष करीब 15 सालों से किराया नहीं दे रहे हैं और परिसर का उपयोग निर्धारित अनुमति के बिना किया जा रहा है.
किन हिस्सों को लेकर क्या-क्या मामले?
ट्रस्ट ने देशराज गुप्ता के खिलाफ तीन हिस्सों और जगदीश प्रसाद माथुर के खिलाफ एक हिस्से को लेकर मामले दर्ज किए हैं. देशराज गुप्ता और जगदीश प्रसाद माथुर दोनों का निधन हो चुका है. देशराज, दिल्ली के पूर्व मेयर हंसराज गुप्ता के बेटे थे. हंसराज के तीन अन्य बेटे शिव राज, राजेंद्र और महेंद्र को भी अभियुक्त बनाया गया है. इनमें शिव राज का निधन हो चुका है, जबकि राजेंद्र दिल्ली के पूर्व मेयर और मंत्री रह चुके हैं. इन मामलों में भारतीय मजदूर संघ भी अभियुक्त है. अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, अन्य अभियुक्तों में से कोई अदालत में पेश नहीं हुआ है. ऐसे में फिलहाल बीएमएस ही इस कानूनी विवाद में अपना पक्ष रख रहा है.
क्या थी बीएमएस की पेशकश?
बीएमएस के वकील आदर्श तिवारी ने बताया कि संगठन ने इस साल 28 जनवरी को बकाया किराया चुकाने की पेशकश की थी. उन्होंने कहा "हमारा मामला मजबूत है. किराए की एक निश्चित राशि बकाया है और हम उसका भुगतान करेंगे." वहीं, ट्रस्ट के वकील आनंद सिंह ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
कबसे नहीं मिला किराया?
ट्रस्ट का कहना है कि जनवरी 2006 के बाद से उसे किरायेदारों की ओर से कोई किराया नहीं मिला. 28 फरवरी 2021 तक बकाया रकम 1.27 लाख रुपये से अधिक बताई गई थी. ट्रस्ट की याचिका के मुताबिक, संबंधित किरायेदारी करीब 1951 में हंसराज गुप्ता के नाम पर शुरू हुई थी. हंसराज गुप्ता कारोबारी भी थे और परिसर का इस्तेमाल उनके निजी कार्यालय के तौर पर किया जाना था. यह कार्यालय बीएमएस और जनसंघ से जुड़े उनके कामकाज से भी संबंधित था.
कब मिला था आखिरी बार किराया?
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, 2013 में चार हिस्सों में से एक का मासिक किराया 849.20 रुपये था. ट्रस्ट का कहना है कि 2005 तक किराया और मकान कर का भुगतान किया गया था. एक हिस्से के लिए आखिरी दर्ज भुगतान 1,281 रुपये का था, जो 24 जनवरी 2006 को चेक के जरिए प्राप्त हुआ था. 23 अप्रैल 2013 को ट्रस्टी प्रेमिंदर सिंह ने 54,393 रुपये के बकाये की मांग करते हुए नोटिस भेजा था. इसमें दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 की धारा 6ए का हवाला दिया गया था, जिसके तहत हर तीन साल में किराए में 10 फीसदी बढ़ोतरी का प्रावधान है. इस गणना के आधार पर जून 2013 में एक हिस्से का मासिक किराया 772 रुपये बताया गया.
नोटिस में क्या कहा गया?
14 अगस्त 2020 को ट्रस्ट ने गुप्ता के चारों बेटों और बीएमएस को नोटिस भेजा. इसमें 2.48 लाख रुपये के बकाये के साथ 15 फीसदी ब्याज का भुगतान करने को कहा गया था. नोटिस में परिसर को मूल स्थिति में लाने और उसे खाली करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया था. याचिका के अनुसार, 14 जुलाई 2020 को किए गए स्थल निरीक्षण में पता चला कि गुप्ता परिवार के पास अब परिसर का कब्जा नहीं था और वहां केवल बीएमएस का कब्जा था.
कब हुई थी बीएमएस की स्थापना?
भारतीय मजदूर संघ की स्थापना 1955 में दत्तोपंत ठेंगड़ी ने की थी. जब भारतीय जनसंघ ने इस इमारत से अपना कामकाज शुरू किया था, तब वह एक छोटा संगठन था. 1967 के बाद जनसंघ को कुछ राज्यों में गठबंधन सरकारों का हिस्सा बनने के साथ राजनीतिक विस्तार मिला.
कौन थे सर शोभा सिंह?
सर शोभा सिंह का जन्म 5 मार्च 1888 को हदाली गांव, जिला खुशाब में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है. वह ब्रिटिश भारत के प्रमुख सिविल ठेकेदार, रियल एस्टेट डेवलपर और बिल्डर थे. उन्हें नई दिल्ली के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। वह प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह के पिता भी थे. उन्होंने सर शोभा सिंह पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना मार्च 1961 में 5,000 रुपये के शुरुआती दान के साथ की थी. 1911 में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर करने के बाद नई दिल्ली के निर्माण की जिम्मेदारी जिन प्रमुख लोगों को मिली, उनमें शोभा सिंह और उनके पिता सुजान सिंह भी शामिल थे.
इंडिया गेट, संसद भवन, साउथ ब्लॉक, कनॉट प्लेस और मॉडर्न स्कूल समेत कई ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में उनका योगदान रहा. नई दिल्ली के निर्माण में योगदान और ब्रिटिश सरकार के प्रति उनकी सेवाओं के लिए उन्हें 'सर' और 'सरदार बहादुर' जैसी उपाधियां प्रदान की गई थीं. 18 अप्रैल 1978 को नई दिल्ली में 90 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था.




