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20 की उम्र में अहमदनगर के बेटे ने ली सियासत में ENTRY! कहानी अजीत पवार के A टू Z दबदबे की

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत हो गई. उनके साथ प्लेन में 5 लोग और सवार थे.

20 की उम्र में अहमदनगर के बेटे ने ली सियासत में ENTRY! कहानी अजीत पवार के A टू Z दबदबे की
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( Image Source:  ANI, X/@shreyadhoundial )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 28 Jan 2026 12:35 PM IST

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत हो गई. उनके साथ प्लेन में 5 लोग और सवार थे. बारामती में लैंडिंग के दौरान उनका प्लेन क्रैश हुआ था. हादसा इतना भयानक था कि प्लेन पूरा जलकर खाक हो गया और चारों-तरफ धुंआ-धुंआ था. अजित पवार राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए बारामती जा रहे थे.

महाराष्ट्र की राजनीति का ताकतवर चेहरा

महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार एक ऐसा नाम थे, जिसने दशकों तक सत्ता और संगठन दोनों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी. वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार के भतीजे थे. अजित पवार ने साल 1982 में राजनीति में कदम रखा और जल्द ही महाराष्ट्र की सियासत में अपनी पहचान बनाई. अपने चाचा शरद पवार के साथ मिलकर उन्होंने पहले कांग्रेस और बाद में उससे अलग होकर बनी एनसीपी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.

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अहमदनगर में जन्मे

अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हुआ था. वे एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं और अपने चाचा शरद पवार से ही राजनीति की प्रेरणा मिली. समर्थकों के बीच वे ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा देओली प्रवर में हुई और माध्यमिक शिक्षा महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड से पूरी की, हालांकि उनकी औपचारिक पढ़ाई यहीं तक सीमित रही.

20 साल में पॉलिटिक्स में एंट्री

अजित पवार ने महज 20 साल की उम्र में 1982 में राजनीति में कदम रखा और सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा. 1991 में वे पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और करीब 16 वर्षों तक इस पद पर रहे. उसी साल वे बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी और बाद में महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे. 1992-93 में वे कृषि और बिजली राज्य मंत्री बने और इसके बाद 1995 से 2014 तक बारामती से लगातार विधानसभा चुनाव जीतते रहे.

कई मंत्रालयों की संभाली जिम्मेदारी

अपने राजनीतिक सफर में अजित पवार ने कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन जैसे अहम मंत्रालयों को संभाला. जल संसाधन मंत्री के तौर पर उन्होंने कृष्णा घाटी और कोकण सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी निभाई. 2009 के चुनाव के बाद वे उप मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन यह मौका 2010 में मिला. 2013 में सिंचाई घोटाले से जुड़े विवाद के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा, हालांकि बाद में क्लीन चिट मिलने के बाद उन्होंने फिर से सत्ता में वापसी की और अपनी राजनीतिक ताकत साबित की.

शरद पवार सरकार में भी मिली अहम जिम्मेदारी

साल 1993 में जब शरद पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, तब अजित पवार को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली. इसके बाद वे लगातार सत्ता और संगठन में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आते रहे. अजित पवार का राजनीतिक कद 2010 में और ऊंचा हुआ, जब कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में उन्हें महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बनाया गया.

इस दौरान वे राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे. राजनीति के साथ-साथ अजित पवार का सहकारिता क्षेत्र में भी गहरा प्रभाव रहा. वे महाराष्ट्र की कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रियों से जुड़े रहे और पुणे डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन के पद पर भी काम किया था.

जुलाई 2023 से फिर उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी

अजित पवार जुलाई 2023 से एक बार फिर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत रहे. इस भूमिका में उन्होंने राज्य की राजनीति में एक बार फिर अपनी निर्णायक मौजूदगी दर्ज कराई. चार दशकों से अधिक के राजनीतिक अनुभव के साथ अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति का एक कुशल रणनीतिकार और मजबूत प्रशासक माना गया.

पांच बार बने डिप्टी सीएम

अजित पवार को बीते 13 वर्षों में उन्हें पांचवीं बार उप मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इसके साथ ही वे महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक गैर-लगातार उप मुख्यमंत्री रहने वाले नेता भी बन चुके हैं. सत्ता में उनकी वापसी की क्षमता और राजनीतिक पकड़ उन्हें राज्य की राजनीति में अलग पहचान देती है.

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