2001 से 2021 तक रामपुरहाट में रहा दबदबा, 2026 में हार... कौन थे TMC नेता और ममता के करीबी आशीष बनर्जी, सुसाइड नोट में क्या लिखा?
टीएमसी के 5 बार के विधायक और बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की मौत के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई है. उनका शव पार्टी ऑफिस में पाया गया, शव के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है.
Ashish Banerjee former tmc MLA
पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई. 16 अगस्त 2026 को बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित टीएमसी के पार्टी कार्यालय में उनका शव फंदे से लटका मिला. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घटनास्थल से एक कथित सुसाइड नोट मिलने की भी जानकारी सामने आई है. सुसाइड नोट में बनर्जी ने किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार से पूरी तरह इनकार किया है और कहा है कि वे अपने पूरे राजनीतिक करियर में कभी भी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे.
आशीष बनर्जी रामपुरहाट विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक रहे थे और ममता बनर्जी सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके थे. वह स्कूल शिक्षा, कृषि और आयुष जैसे विभागों के मंत्री रहे, जबकि 2021 में लगातार पांचवीं बार विधायक चुने जाने के बाद उन्हें विधानसभा का डिप्टी स्पीकर बनाया गया था.
कौन थे आशीष बनर्जी?
आशीष बनर्जी का जन्म 3 नवंबर 1951 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में हुआ था. उनके पिता का नाम असित बरन बनर्जी था और उनकी पत्नी का नाम सुस्मिता बनर्जी बताया जाता है. उन्होंने बर्दवान विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की. उन्होंने वहीं से बीए और एमए की पढ़ाई पूरी करने के बाद पीएचडी की डिग्री हासिल की.
चुनावी हलफनामे में भी उनकी पीएचडी और बर्दवान विश्वविद्यालय से एमए की शैक्षणिक योग्यता दर्ज है. राजनीति में सक्रिय होने से पहले आशीष बनर्जी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे। उन्होंने रामपुरहाट कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम किया था. इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा.
कैसा रहा राजनीतिक सफर?
आशीष बनर्जी ने 2001 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में रामपुरहाट सीट से पहली बार जीत दर्ज की. इसके बाद 2006 में भी उन्होंने इसी सीट पर जीत हासिल की. 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की और आशीष बनर्जी ने रामपुरहाट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की. 2016 में वह चौथी बार विधायक चुने गए और राज्य सरकार में मंत्री बने. 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने रामपुरहाट सीट पर लगातार पांचवीं जीत दर्ज की. इसके बाद उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा का डिप्टी स्पीकर बनाया गया.
रामपुरहाट में टीएमसी के मजबूत जनाधार के बीच वह लंबे समय तक पार्टी का प्रमुख चेहरा बने रहे. लंबे राजनीतिक करियर के दौरान आशीष बनर्जी ने पश्चिम बंगाल सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली. वह स्कूल शिक्षा और कृषि जैसे प्रमुख विभागों से जुड़े रहे. इसके अलावा आयुष विभाग की जिम्मेदारी भी उनके पास रही. विधानसभा के भीतर भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 2021 के बाद उन्हें डिप्टी स्पीकर का पद मिला, जिसके साथ वह राज्य की राजनीति में टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे.
कैसे 2026 में बदल गई तस्वीर?
रामपुरहाट में करीब ढाई दशक तक टीएमसी का दबदबा कायम रहा और आशीष बनर्जी लगातार पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतते रहे, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में उनकी लगातार जीत का सिलसिला टूट गया. उन्हें बीजेपी उम्मीदवार ध्रुबा साहा से हार का सामना करना पड़ा. चुनाव के बाद जून 2026 में आशीष बनर्जी ने बीरभूम जिला टीएमसी के चेयरमैन और जिला कोर कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था. रिपोर्टों के मुताबिक, इसके बाद वह पार्टी के सामान्य सदस्य के तौर पर काम करने की बात कह चुके थे.




