इमरजेंसी एक गलती, संजय पर कंट्रोलिंग; बाबरी विध्वंस देख फूट-फूट कर रोने लगीं थीं सोनिया, 10 पॉइंट में समझिए पूरा किस्सा
सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में इमरजेंसी, संजय गांधी, बाबरी मस्जिद विध्वंस और 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने समेत कई मुद्दों पर खुलकर बात की.
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं. अपनी आने वाली किताब Belonging- A Journey of Love के रिलीस से पहले उन्होंने ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' और भारतीय अखबार 'द हिंदू' को इंटरव्यू दिया है. इन इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने अपनी निजी जिंदगी से लेकर देश के इतिहास और मौजूदा राजनीति तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है.
उन्होंने 1975 में लगी इमरजेंसी को इंदिरा गांधी की गलती बताया और कहा कि संजय गांधी को नियंत्रण में रखा जाता तो इसके बाद हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था. वहीं बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान टीवी पर तस्वीरें देखकर रोने का जिक्र भी किया. उन्होंने राजीव गांधी की हत्या, इंदिरा गांधी के साथ अपने रिश्ते, 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने और मोदी सरकार के कार्यकाल पर भी बात की. आइए 10 Point में जानते हैं कि सोनिया गांधी ने क्या कुछ बताया है?
1. इमरजेंसी को बताया इंदिरा गांधी की गलती
सोनिया गांधी ने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से लगाई गई इमरजेंसी को गलती बताया. उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इंदिरा गांधी को भी बाद में अपनी गलती का एहसास हुआ था. सोनिया के मुताबिक, इंदिरा गांधी लोकतांत्रिक विचारों वाली थीं और इमरजेंसी का फैसला उन्हें खुद भी परेशान कर रहा था.
2. संजय गांधी को लेकर कही बड़ी बात
सोनिया गांधी ने कहा कि अगर संजय गांधी को नियंत्रण में रखा गया होता तो इमरजेंसी के दौरान हुए काफी नुकसान को रोका जा सकता था. उन्होंने बताया कि उस समय परिवार के भीतर भी इस फैसले को लेकर मतभेद थे. संजय गांधी इमरजेंसी लगाने के पक्ष में थे, जबकि राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी को चुनाव का इंतजार करने की सलाह दी थी.
3. राजीव गांधी इमरजेंसी के खिलाफ थे
सोनिया गांधी के मुताबिक, राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी से कहा था कि उन्हें अगला चुनाव आने तक इंतजार करना चाहिए. वहीं संजय गांधी का तर्क था कि विपक्ष उनकी मां को नुकसान पहुंचा सकता है और उसे रोकना जरूरी है. सोनिया ने बताया कि इस मुद्दे पर राजीव और इंदिरा गांधी के बीच तनाव भी हुआ था.
4. इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर क्या बोलीं?
सोनिया गांधी ने माना कि इमरजेंसी के दौरान लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगी थी और बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी Habeas Corpus का अधिकार भी निलंबित किया गया था. उन्होंने कहा कि यह सब संवैधानिक तरीके से किया गया था. हालांकि, उन्होंने इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र का एक गलत दौर माना.
5. बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय रो पड़ी थीं सोनिया
सोनिया गांधी ने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना को भी याद किया. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने टीवी पर मस्जिद को गिराए जाने की तस्वीरें देखीं तो वह रो पड़ी थीं. उनके मुताबिक, उसी समय उन्हें एहसास हुआ कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके साथियों के सपनों वाले धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए अब लंबी लड़ाई लड़नी होगी.
6. कांग्रेस की गलतियों को भी माना जिम्मेदार
बाबरी मस्जिद विध्वंस और बीजेपी की हिंदुत्व राजनीति के उभार पर बात करते हुए सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी की कमियों को भी स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कई मायनों में जरूरत से ज्यादा निश्चिंत रही और उसका रवैया कुछ हद तक लापरवाह था. उन्होंने माना कि पार्टी की कुछ विफलताओं ने भी बीजेपी और उसकी हिंदुत्व राजनीति के उभार में भूमिका निभाई.
7. इंदिरा गांधी की हत्या का आंखों देखा दर्द साझा किया
सोनिया गांधी ने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के दिन को याद किया. उन्होंने बताया कि गोली चलने की आवाज सुनकर वह उनके कार्यालय की तरफ दौड़ी थीं. वहां इंदिरा गांधी खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थीं. सोनिया ने बताया कि वह उन्हें कार से अस्पताल ले जाते समय लगातार संभालने और होश में लाने की कोशिश कर रही थीं.
8. राजीव गांधी की हत्या के बाद का डर बताया
सोनिया गांधी ने राजीव गांधी की हत्या से पहले परिवार के भीतर बने डर का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि सुरक्षा को लेकर परिवार हमेशा चिंतित रहता था. राहुल और प्रियंका को स्कूल से निकाल लिया गया था और उन्हें सामान्य बच्चों की तरह बाहर घूमने की आजादी नहीं थी. सोनिया ने कहा कि उनके मन में हमेशा यह डर रहता था कि अगला निशाना राजीव गांधी होंगे.
9. 2004 में प्रधानमंत्री बनने से क्यों किया इनकार?
सोनिया गांधी ने 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के अपने फैसले पर भी बात की. उन्होंने कहा कि उनके मन में यह बात बिल्कुल साफ थी कि वह प्रधानमंत्री नहीं बनेंगी. यह उनके स्वभाव के मुताबिक नहीं था. उन्होंने बताया कि उन्हें कभी प्रधानमंत्री बनने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं रही.
10. मोदी सरकार और बीजेपी-RSS पर साधा निशाना
सोनिया गांधी ने मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस दौरान देश के लोकतंत्र, संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुंचा है. उनके मुताबिक, सरकार के जाने के बाद भी संस्थाओं को दोबारा मजबूत करने में समय और मेहनत लगेगी. उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं का सरकार के खिलाफ आवाज उठाना उन्हें उम्मीद देता है.




