Begin typing your search...

डार्लिंग, डार्लिंग, मेरी डार्लिंग... वृंदावन के कथावाचक इंद्रदेव महाराज कौन,जिन पर रेप केस मामले में दर्ज हुई जीरो FIR? VIDEO

वृंदावन के कथावाचक स्वामी इंद्रदेव महाराज पर महिला ने दुष्कर्म, अश्लील वीडियो कॉल और धमकी देने के आरोप लगाए हैं. महाराष्ट्र में जीरो FIR दर्ज. इस खबर की पुष्टि स्टेट मिरर हिंदी नहीं करता.

डार्लिंग, डार्लिंग, मेरी डार्लिंग... वृंदावन के कथावाचक इंद्रदेव महाराज कौन,जिन पर रेप केस मामले में दर्ज हुई जीरो FIR? VIDEO
X
( Image Source:  @cpt2025-X )
सागर द्विवेदी
सागर द्विवेदी7 Mins Read

Updated on: 7 Nov 2026 9:20 PM IST

वृंदावन के चर्चित भागवत कथावाचक और निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी इंद्रदेव महाराज पर एक महिला ने दुष्कर्म, अश्लील वीडियो कॉल और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. इस मामले में महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर स्थित काशीमीरा पुलिस स्टेशन में जीरो FIR दर्ज की गई है. जिसके बाद और भी बवाल शुरु हो गया है और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की रिकार्डिंग की क्लिप वायरल हो रही है.

शिकायत के मुताबिक, महिला की मुलाकात अप्रैल 2023 में मुंबई के एक सत्संग कार्यक्रम के दौरान इंद्रदेव महाराज से हुई थी. इसके बाद उसने उनसे दीक्षा ली और अपनी पारिवारिक परेशानियां भी शेयर कीं. महिला का आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर उसे दिसंबर 2023 में वृंदावन स्थित सेवाधाम आश्रम बुलाया गया, जहां उसके साथ जबरदस्ती की गई. उसने बाद में अश्लील वीडियो कॉल और धमकियां मिलने का दावा भी किया है.

मामले ने धार्मिक और संत समाज में भी हलचल पैदा कर दी है. भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने महिला का साथ देते हुए पुलिस कार्रवाई की मांग उठाई है. वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा है कि पुलिस की आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद निरंजनी अखाड़ा और अखाड़ा परिषद की ओर से कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा. दूसरी तरफ आनंद अखाड़े के अध्यक्ष महंत शंकारानंद सरस्वती ने इंद्रदेव महाराज की संन्यास दीक्षा और अखाड़े से उनके जुड़ाव पर सवाल उठाए हैं. हालांकि, अभी मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और इन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है.

कैसे शुरू हुआ इंद्रदेव महाराज और महिला के बीच संपर्क?

शिकायत के अनुसार, बिहार मूल की महिला अप्रैल 2023 में मुंबई के सांताक्रूज में आयोजित एक सत्संग में पहुंची थी. यहीं उसकी मुलाकात डॉ. इंद्रदेव महाराज से हुई और उसने उनसे दीक्षा ली. महिला का कहना है कि बातचीत के दौरान उसने अपनी पारिवारिक समस्याओं के बारे में बताया था. आरोप है कि महाराज ने समस्याओं के समाधान का भरोसा देकर उससे संपर्क बनाए रखने को कहा. धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ती गई.

वृंदावन के सेवाधाम आश्रम में क्या हुआ?

महिला की शिकायत के मुताबिक, दिसंबर 2023 में वह अपनी बेटियों के साथ वृंदावन पहुंची और सेवाधाम आश्रम में रुकी. उसका आरोप है कि रात करीब 10:30 बजे उसे महाराज ने अपने कमरे में बुलाया. शिकायत में दावा किया गया है कि कमरे में पहुंचने के बाद दरवाजा बंद कर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए गए. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे दूसरे लोगों से इस बारे में कुछ बताने पर बहाना बनाने के लिए कहा गया था.

अश्लील वीडियो कॉल और धमकी देने का भी आरोप

महिला ने अपनी शिकायत में केवल आश्रम में हुई कथित घटना का ही जिक्र नहीं किया है. उसका आरोप है कि इसके बाद भी उसे अश्लील वीडियो कॉल किए गए और आपत्तिजनक गतिविधियों के लिए दबाव बनाया गया. शिकायत के मुताबिक, वीडियो कॉल की कुछ घटनाएं नवंबर 2025 और जनवरी 2026 में हुई थीं. महिला का दावा है कि विरोध करने पर उसे बदनाम करने और धमकाने की कोशिश की गई. इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और डिजिटल साक्ष्यों से होनी बाकी है.

महाराष्ट्र में कैसे दर्ज हुई जीरो FIR?

महिला का कहना है कि उसने पहले भी पुलिस से शिकायत करने की कोशिश की थी, लेकिन उसे कार्रवाई के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा. बाद में भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई उसके समर्थन में सामने आईं. उनकी अगुवाई में मीरा-भायंदर के काशीमीरा पुलिस स्टेशन में जीरो FIR दर्ज कराई गई. रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, 75, 79 और 351(2) लगाई गई हैं.

चूंकि शिकायत में कथित घटना का मुख्य स्थान वृंदावन बताया गया है, इसलिए मामले की जांच उत्तर प्रदेश के मथुरा पुलिस क्षेत्र से जुड़ती है. जीरो FIR दर्ज होने का मतलब है कि पुलिस क्षेत्राधिकार की बाधा के बिना शिकायत दर्ज कर सकती है और संबंधित क्षेत्र की पुलिस को आगे की जांच के लिए मामला भेज सकती है.

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने क्या कहा?

मामले पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि वह पूरे प्रकरण पर नजर रख रहे हैं. उनका कहना है कि संत समाज किसी भी अनैतिक गतिविधि का समर्थन नहीं करता. पुलिस की आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद निरंजनी अखाड़ा और अखाड़ा परिषद की ओर से स्वामी इंद्रदेव के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा.

आनंद अखाड़े ने इंद्रदेव महाराज की संन्यास दीक्षा पर उठाए सवाल

इस विवाद के बीच आनंद अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत शंकारानंद सरस्वती ने इंद्रदेव महाराज की संन्यास परंपरा और अखाड़े से उनके संबंधों पर सवाल उठाए हैं. उनके मुताबिक, इंद्रदेव ने आनंद अखाड़े से औपचारिक रूप से संन्यास दीक्षा नहीं ली थी. उन्हें कथावाचन के आधार पर धर्माचार्य की उपाधि दी गई थी. बाद में निरंजनी अखाड़े ने उन्हें महामंडलेश्वर बनाया. महंत शंकारानंद ने उनके धार्मिक और संगठनात्मक आचरण पर भी सवाल उठाए हैं. ये उनकी ओर से दिए गए बयान हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से उपलब्ध नहीं है.

इंद्रदेव महाराज ने आरोपों पर क्या कहा?

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. इंद्रदेव महाराज ने महिला की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने इसे धन उगाही की कोशिश करार दिया है. ऐसे में मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों के साथ आरोपी का पक्ष भी महत्वपूर्ण है. पुलिस जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य पेश होने के बाद ही आरोपों की सच्चाई पर कानूनी निष्कर्ष निकल सकेगा.

कौन हैं स्वामी इंद्रदेव महाराज?

डॉ. संत श्री इंद्रदेव महाराज वृंदावन के कथावाचक और श्रीमद्भागवत कथा वाचक के रूप में जाने जाते हैं. उनका संबंध सेवाधाम आश्रम से बताया जाता है. उपलब्ध परिचय के अनुसार, उन्होंने उत्तर प्रदेश के गुरुकुल में वेदांग, दर्शन, व्याकरण, महाभारत और आयुर्वेद की शिक्षा प्राप्त की. 6 जून 2016 को उन्हें पंचायती श्री निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया था. वे भागवत कथा, शिव महापुराण और अन्य धार्मिक विषयों पर प्रवचन करते हैं. फिलहाल उनके खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस जांच जारी है. इस पूरे विवाद में अब पुलिस की जांच रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और अखाड़ों का अगला संगठनात्मक कदम अहम होगा.

अगला लेख