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क्या होती है जीरो FIR, जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में PM मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली लड़की पर हुई दर्ज, सौरभ दास ने उठाए सवाल- 7 पॉइंट्स

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रोटेस्ट के दौरान पीएम मोदी के लिए कई बार आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल हुआ, जिसको लेकर अब नोएडा पुलिस ने एक लड़की के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की है.

Zero FIR Jantar Mantar Protest
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Zero FIR Jantar Mantar Protest

( Image Source:  ANI, X/@BeingPolitical1 )

दिल्ली के जंतर-मंतर पर भले ही छात्रों का प्रोटेस्ट खत्म हो गया हो लेकिन अब पुलिस उन लोगों के खिलाफ एक्शन मोड़ में दिखाई दे रही है, जिन्होंने प्रोटेस्ट के दौरान दंगा भड़काने की कोशिश और पीएम मोदी के खिलाफ जलत शब्दों का इस्तेमाल किया हो. सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो प्रोटेस्ट के दौरान सामने आए थे जिसमें पीएम मोदी को कुछ लड़कियों द्वारा भी गालियां दी गई थी.

वहीं उनमें से एक लड़की रुचिका सिंह के खिलाफ अब नोएडा पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर ली है. हालांकि जीरो एफआईआर को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने आपत्ति जताई है और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.

7 पॉइंट्स में जानें पूरा मामला

1. सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा "यदि किसी भी प्रकार की भाषा अपमानजनक थी, तो संबंधित व्यक्ति उस व्यक्ति के विरुद्ध दीवानी और आपराधिक मानहानि की कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है. हालांकि, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक न्याय प्रणाली का उपयोग करना अत्यंत निंदनीय है, और किसी को भी केवल आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए."

2. सौरभ दास ने कहा कि किसी के शब्द आपत्तिजनक या अनुचित लग सकते हैं, लेकिन हर ऐसे मामले में आपराधिक कानून का इस्तेमाल उचित नहीं है. उन्होंने कहा "भाषा गलत हो सकती है, और किसी को आपत्तिजनक लग सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक न्याय व्यवस्था लागू की जाए. इससे डर का माहौल बनता है. मुझे नहीं लगता कि यह किसी को भी स्वीकार्य है, खासकर युवा पीढ़ी को."

3. दास ने युवाओं से सार्वजनिक मंचों पर संयमित भाषा के इस्तेमाल की अपील भी की. उन्होंने कहा "मैं युवा पीढ़ी से अनुरोध करूंगा कि वे अपने द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों और आम तौर पर लोगों के खिलाफ की जाने वाली अपमानजनक टिप्पणियों या अपशब्दों के बारे में बहुत सावधान रहें."

4. उन्होंने कहा, "हालांकि, आपराधिक न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग सरासर अस्वीकार्य है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और ऐसा नहीं होना चाहिए. हम पुलिस से भी आग्रह करते हैं कि वे शांत रहें और किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न करें."

5. यह पूरा विवाद उस समय सामने आया जब नोएडा पुलिस ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के आरोप में एक महिला के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की.

6. पुलिस के अनुसार, गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर नोएडा के सेक्टर-168 निवासी रुचिका सिंह के खिलाफ एक्सप्रेसवे थाने में मामला दर्ज किया गया. शिकायत में आरोप लगाया गया कि 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई.

7. जीरो एफआईआर ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत किसी भी संज्ञेय अपराध की शिकायत देश के किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, चाहे घटना उस थाना क्षेत्र की सीमा में हुई हो या नहीं. प्रारंभिक कार्रवाई के बाद संबंधित मामला उस पुलिस स्टेशन को भेज दिया जाता है, जिसके अधिकार क्षेत्र में घटना हुई होती है.

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