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25 साल का जलवा बरकरार! CCI सचिव पद पर राजीव प्रताप रूडी को मिली जीत, जानिए क्या है दिल्ली का कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया

दिल्ली के प्रतिष्ठित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के सचिव पद पर बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने चौथी बार जीत दर्ज की. 25 वर्षों से इस पद पर काबिज रूडी ने पूर्व सांसद संजीव बालियान को हराया. दलगत सीमाएं तोड़ते हुए उन्हें कांग्रेस, सपा, टीएमसी और निर्दलीय सांसदों का समर्थन मिला. यह जीत उनके अनुभव और नेटवर्क की बड़ी मिसाल है.

25 साल का जलवा बरकरार! CCI सचिव पद पर राजीव प्रताप रूडी को मिली जीत, जानिए क्या है दिल्ली का कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया
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( Image Source:  ANI )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार5 Mins Read

Updated on: 13 Aug 2025 6:47 AM IST

दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के सचिव पद के चुनाव में बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी ने बाज़ी मारी है. पिछले 25 वर्षों से इस पद पर काबिज रूडी ने पार्टी के ही पूर्व सांसद संजीव बालियान को परास्त किया है. यह जीत उनके लंबे राजनीतिक करियर की मजबूती को दर्शाती है. क्लब के सचिव पद का राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही स्तर पर बड़ा महत्व है, क्योंकि यह क्लब सांसदों के सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र है.

इस चुनाव में राजीव प्रताप रूडी को लगभग 100 से अधिक वोट मिले, जो राजनीतिक दलों की सीमाओं को पार करते हुए मिले. उनकी टीम में कांग्रेस, सपा, टीएमसी और निर्दलीय सांसद भी शामिल थे. रूडी ने कहा कि यह जीत पिछले दो दशकों की मेहनत का फल है और यह दर्शाती है कि सांसद राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर उन्हें समर्थन देते हैं.

क्या है कॉन्स्टीट्यूशन क्लब?

कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना फरवरी 1947 में की गई थी ताकि भारतीय संविधान सभा के सदस्यों को सामाजिक मेलजोल और क्लब सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें. स्वतंत्रता के बाद इसे सांसदों के क्लब के रूप में मान्यता मिली. इस क्लब के सदस्य वर्तमान और पूर्व सांसद ही हो सकते हैं, जो इसे एक खास राजनीतिक एवं सामाजिक मंच बनाता है. वर्तमान में लगभग 1300 सांसद इसके सदस्य हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, सोनिया गांधी समेत देश के कई बड़े नेता शामिल हैं.

क्लब के कायाकल्प की कहानी

1998-99 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी की पहल पर विजन कमेटी ने क्लब के कायाकल्प का काम किया. इसके बाद 2008 में क्लब के बायलॉज को मंजूरी मिली और 2009 में पहली बार गवर्निंग काउंसिल का चुनाव हुआ. तब से अब तक 2009, 2014, 2019 और अब 2024 में चौथी बार चुनाव हुआ है. इस प्रक्रिया ने क्लब को अधिक लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनाया है.

किसे मिलती है इस क्लब की सदस्यता?

क्लब की सदस्यता केवल पूर्व और वर्तमान सांसदों को मिलती है, और चुनाव में सिर्फ इन्हीं सदस्यों को वोट डालने का अधिकार होता है. इस चुनाव में राजनीतिक दलों के मतभेद कम हो जाते हैं, और सहयोगी चुनावी पैनल बनते हैं. इस बार बीजेपी के पैनल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी शामिल थे, जो इस तथ्य को रेखांकित करता है कि यहां दलगत राजनीति से परे एकजुटता देखने को मिलती है.

क्लब में क्या है सुविधाएं?

कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में सांसदों के लिए सुविधाजनक वातावरण तैयार किया गया है. इसमें कॉन्फ्रेंस रूम, आउटडोर कैफे, बिलियर्ड्स रूम, जिम, स्विमिंग पूल, यूनिसेक्स सैलून, बैडमिंटन कोर्ट आदि की व्यवस्था है. यह क्लब सांसदों के निजी और सामाजिक आयोजनों के लिए भी लोकप्रिय स्थल है. इसके जिम को दिल्ली के बेहतरीन जिमों में गिना जाता है, जिसका निर्माण बीसीसीआई के सहयोग से हुआ था.

इस बार 12 पदों के लिए हुए चुनाव

सचिव (प्रशासन) पद के अलावा इस बार 11 कार्यकारी सदस्य पदों पर भी चुनाव हुए. इनमें कई दिग्गज नेताओं ने हिस्सा लिया. खेल सचिव और संस्कृति सचिव पदों के लिए भी चुनाव हुए, जहां कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला. कई दावेदारों ने अंतिम समय पर उम्मीदवारी वापस ली, जिससे कुछ पद निर्विरोध चुने गए.

चुनाव की राजनीतिक और सामाजिक अहमियत

कॉन्स्टीट्यूशन क्लब का चुनाव केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सांसदों के बीच संवाद, सहयोग और राजनीतिक सामंजस्य का भी प्रतीक है. यह चुनाव इस बात की पुष्टि करता है कि संसद सदस्यों के बीच पारस्परिक सम्मान और समझ बनी हुई है, जो देश की राजनीति के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है. राजीव प्रताप रूडी की जीत इस भावना को और मजबूत करती है और उनके नेतृत्व को मान्यता देती है.

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