ममता बनर्जी की भतीजी ने की आत्महत्या, क्या बंगाल शिक्षक भर्ती रद्द होने की वजह से डिप्रेशन में थीं? जानिए पूरा मामला
पश्चिम बंगाल के बीरभूम में 28 वर्षीय बृष्टि मुखर्जी की मौत हो गई, जिनका नाम शिक्षक भर्ती मामले में नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों की सूची में शामिल था. वह ममता बनर्जी की रिश्तेदार थीं.
Mamata Banerjee
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में मंगलवार को 28 वर्षीय बृष्टि मुखर्जी की मौत हो गई. बृष्टि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रिश्तेदार थीं. शिक्षक भर्ती मामले में नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों की सूची में उनका नाम भी शामिल था.
बृष्टि के पिता निहार मुखर्जी ममता बनर्जी के मामा के बेटे हैं. वह रामपुरहाट के कुसुंबा गांव के रहने वाले हैं. वे स्थानीय स्तर पर तृणमूल कांग्रेस से भी जुड़े हुए हैं. बृष्टि ने बोलपुर के एक अपर प्राइमरी स्कूल में नॉन-टीचिंग स्टाफ के तौर पर नौकरी हासिल की थी.
क्या है पूरा मामला?
- मार्च 2023 में शिक्षक भर्ती मामले की जांच और अदालत के फैसले के बाद करीब 26 हजार शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं. आरोप था कि इन नियुक्तियों में अनियमितता, पक्षपात और पैसों के लेनदेन के जरिए लोगों को नौकरी दी गई थी.
- इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा. बृष्टि का नाम उन कर्मचारियों की सूची में 608वें स्थान पर था, जिनकी नौकरी इस फैसले के बाद चली गई.
- परिवार की ओर से पहले बताया गया था कि बृष्टि ने नौकरी ज्वाइन करने के एक दिन बाद ही स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था. हालांकि, अदालत के फैसले के बाद से वह मानसिक दबाव में थीं. ऐसा उनके करीबियों का कहना है.
- बृष्टि की मौत की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब पश्चिम बंगाल का बहुचर्चित स्कूल भर्ती घोटाला एक बार फिर चर्चा में है.
- 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन के आरोप लगे थे.
- इस मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, सत्तारूढ़ दल से जुड़े कुछ नेताओं और स्कूल सर्विस कमीशन तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था. मामले की जांच के दौरान कई लोगों के नाम आरोपपत्र में भी शामिल किए गए.
- सुप्रीम कोर्ट ने पहले योग्य शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को समायोजित करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 31 दिसंबर तक की समयसीमा तय की थी. इसके बाद सोमवार को अदालत ने इस समयसीमा को बढ़ाकर 31 मई कर दिया.
बृष्टि की मौत के बाद अब भर्ती घोटाले में नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों की स्थिति और अदालत के फैसले के असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. फिलहाल उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की जांच और आगे की जानकारी का इंतजार है.
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