Begin typing your search...

पहले लाल, फिर नीला और अब भगवा! Writers’ Building से लेकर सड़कों तक, बंगाल में हर सरकार क्यों बदल देती है रंग?

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही सिर्फ सरकार नहीं, रंग भी बदल जाते हैं. लेफ्ट का लाल, Mamata Banerjee का नीला-सफेद और अब चर्चा बीजेपी के भगवा रंग की है. Writers' Building से लेकर सड़कों तक, बंगाल की राजनीति रंगों के जरिए अपनी पहचान बनाती रही है.

Bengal Election 2026 BJP vs TMC Phase 1 Voting, Mamata Banerjee
X

West Bengal Politics Colour Change History: पश्चिम बंगाल की राजनीति सिर्फ नीतियों और नारों में नहीं बदलती… यहां सत्ता बदलते ही रंग भी बदल जाता है. कोलकाता की ऐतिहासिक इमारत Writers' Building इस बदलाव की सबसे बड़ी गवाह रही है, जहां हर सरकार ने अपने रंग से सत्ता की पहचान तय की.

लाल दौर: विचारधारा का रंग

करीब 34 साल तक Left Front की सत्ता में बंगाल पूरी तरह 'लाल' था. सरकारी दफ्तर, दीवारें, सार्वजनिक जगहें—हर जगह लाल रंग सिर्फ पेंट नहीं, बल्कि कम्युनिस्ट विचारधारा की छाप था. कोलकाता में उस दौर में लाल रंग एक विजुअल पॉलिटिक्स बन चुका था, जिसे देखकर ही सत्ता का अंदाजा लग जाता था.

नीला-सफेद बदलाव: ममता का नया सिग्नेचर

2011 में Mamata Banerjee की एंट्री के साथ ही बंगाल की रंगत बदल गई. उन्होंने लाल रंग को हटाकर पूरे राज्य को 'नीला-सफेद' में रंग दिया. सत्ता का केंद्र Nabanna शिफ्ट किया गया. कोलकाता की सड़कों, पुलों और सरकारी इमारतों को नए रंग में ढाला गया. यहां तक कि ममता की सफेद-नीली साड़ी भी इस बदलाव का प्रतीक बन गई. उनका संदेश साफ था, “आसमान ही सीमा है.” हालांकि, इस रंग परिवर्तन पर टैक्सपेयर्स के पैसे खर्च करने को लेकर आलोचना भी हुई.

अब क्या केसरिया की बारी?

2026 चुनाव नतीजों से पहले माहौल गरम है. BJP की बढ़ती ताकत और एग्जिट पोल के संकेत एक नए बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं. अगर सत्ता परिवर्तन होता है, तो सवाल उठता है कि क्या बंगाल अब 'केसरिया' रंग में रंगेगा? यह सिर्फ रंग नहीं होगा, बल्कि एक नई राजनीतिक पहचान और विचारधारा का प्रतीक बनेगा. बंगाल की खासियत यही है कि यहां सत्ता का बदलाव सिर्फ सरकार नहीं बदलता, बल्कि शहर की 'विजुअल पहचान' भी बदल देता है.

बंगाल में राजनीति का इतिहास नीतियों से ज्यादा रंगों में दिखता है. अब 4 मई के नतीजे तय करेंगे कि क्या बंगाल की सड़कों पर एक बार फिर नया रंग चढ़ेगा? लाल से नीला… और शायद अब केसरिया... बंगाल की राजनीति हमेशा रंग बदलती रही है और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है.

Politicsविधानसभा चुनाव 2026ममता बनर्जी
अगला लेख