West Bengal: पहले दौर की वोटिंग से यूं ही गदगद नहीं BJP, दूसरे चरण में TMC के सामने कहां खड़ी?
बंगाल चुनाव 2026 के पहले चरण के बाद BJP का बढ़ा कॉन्फिडेंस, दूसरे चरण में TMC के लिए बढ़ी चुनौती, जानें आंकड़े और ग्राउंड रिपोर्ट्स का पूरा विश्लेषण
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की 152 सीटों पर मतदान के बाद से वहां का सियासी माहौल पहले से ज्यादा गरमा गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) का आत्मविश्वास अचानक सातवें आसमान पर दिख रहा है, लेकिन यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि कुछ ठोस संकेतों पर आधारित है. हाई वोटिंग प्रतिशत, बूथ स्तर की सक्रियता और कई इलाकों में अप्रत्याशित ट्रेंड्स ने BJP को यह भरोसा दिया है कि मुकाबला इस बार एकतरफा नहीं रहेगा. दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए भी यह चेतावनी है कि दूसरे चरण में लड़ाई पहले से ज्यादा कठिन होने वाली है. हालांकि, दूसरे चरण की 142 सीटों में से 18 सीटों पर ही 2021 में बीजेपी के विधायक चुने गए थे. ऐसे में सवाल उठता है. क्या पहले चरण के संकेत सच में बदलाव की आहट हैं या सिर्फ चुनावी शोर? या फिर बीजेपी की ओर से सियासी नैरेटिव को सेट करने की थ्योरी, जानें सबकुछ.
1. रिकॉर्ड वोटिंग ने बदला गेम
पहले चरण में कई सीटों पर 152 सीटों पर औसत मतदान करीब 93 फीसदी दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी ज्यादा है. कई सीटों पर तो 94 से 96 परसेंट तक वोटिंग होने की सूचना है. चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि हाई वोटिंग अक्सर एंटी-इन्कम्बेंसी या बदलाव की इच्छा का संकेत देती है. चुनाव आोग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में वोटिंग खास तौर पर ज्यादा रही, जहां BJP पिछले चुनाव में कमजोर रही थी.
2. बूथ मैनेजमेंट में BJP की आक्रामक रणनीति
बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार बूथ स्तर पर खास फोकस किया है. हर बूथ पर ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल लागू किया. लाभार्थी वोटरों तक कार्यकर्ताओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित की. केंद्रीय योजनाओं (PM आवास, उज्ज्वला) का प्रचार के बारे में मतदाताओं को जानकारियां दीं. इन रणनीतियों का असर यह हुआ कि कई ऐसे बूथ जहां पहले TMC का दबदबा था, वहां मुकाबला कड़ा हुआ है.
3. TMC की मजबूत पकड़ लेकिन दबाव भी
ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC अभी भी बंगाल की सबसे मजबूत पार्टी है. महिला वोट बैंक, अल्पसंख्यक समर्थन, ग्रामीण नेटवर्क, लाभार्थी योजनाएं की वजह से टीएमसी को चुनाव जीतने का पूरा भरोसा है. लेकिन पहले चरण में कुछ जगहों पर स्थानीय असंतोष और टिकट वितरण को लेकर नाराजगी भी सामने आई. यही वजह है कि दूसरे चरण में TMC को अपनी रणनीति और मजबूत करनी होगी.
4. हिंसा और ध्रुवीकरण का असर
पहले चरण में कई जगहों पर झड़प और हिंसा की खबरें सामने आईं. मुर्शिदाबाद, मेदिनीपुर, बीरभूम और कुछ अन्य इलाकों में तनाव देखने को मिला. विपक्ष द्वारा टीएमसी पर बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए गए. ऐसे माहौल में ध्रुवीकरण बढ़ता है, जिसका सीधा फायदा BJP को मिल सकता है, क्योंकि वह इसे कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में उठा रही है.
5. किन सीटों पर खास नजर?
दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान होना है. इनमें अधिकांश सीटें शहरी और इंस्ट्रियल खेत्र की हैं, राजनीतिक रूप से बेहद अहम हैं. इन सीटों पर शहरी और अर्ध-शहरी मतदाता ज्यादा है. पिछली बार TMC ने इस सीटों पर मजबूत जीत दर्ज की थी. लेकिन इस बार BJP की मजबूत तैयारी है. कहा जा रहा है कि बीजेपी ने टीएमसी के गढ़ में सेंध लगाने की हर संभव कोशिश की है, जो अभी जारी है. यहां BJP का लक्ष्य सिर्फ वोट बढ़ाना नहीं बल्कि जीत में बदलना है.
6. क्या कह रहे हैं ग्राउंड रिपोर्ट्स?
ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक पहली बार वोट डालने वाले युवा वोटर दूसरे चरण में निर्णायक साबित हो सकते हैं. महिलाओं में TMC की पकड़ बनी हुई है, लेकिन BJP भी सेंध लगा रही है. SC/ST वोट बैंक में BJP को फायदा मिलने की संभावना है.
7. क्या सच में BJP को बढ़त?
पहले चरण के आंकड़े BJP के लिए उत्साहजनक जरूर हैं, लेकिन यह अंतिम नतीजे की गारंटी नहीं है. बंगाल में हाई वोटिंग से बदलाव हो ही जाए, यह जरूरी नहीं. ऐसा इसलिए कि 2011, 2016 और 2021 और लोकसभा चुनाव में भी 80 से 85 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. सभी में TMC को बड़ी सफलती मिली.
स्थानीय मुद्दे हर सीट पर अलग
दरअसल, पहले चरण के बाद BJP का आत्मविश्वास यूं ही नहीं बढ़ा है. इसके पीछे आंकड़े, रणनीति और माहौल तीनों का योगदान है. लेकिन दूसरे चरण में TMC को कम आंकना बीजेपी की बड़ी गलती होगी. तृणमूल कांग्रेस के पास अभी भी मजबूत संगठन और वोट बैंक है. असली मुकाबला अब शुरू होता है, जहां हर सीट पर कांटे की टक्कर तय है. फिर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की पहचान जमीनी और फाइटर नेता की है.
TMC का गढ़, BJP की चुनौती
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में राज्य के सबसे अहम और प्रभावशाली जिलों में मतदान होना है. इस चरण में नादिया, नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, कोलकाता, हावड़ा, हुगली और पूर्व बर्दवान जैसे जिले शामिल हैं, जिनकी कुल 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. ये इलाके शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण मिश्रण के कारण राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं.
कोलकाता और आसपास का अर्बन बेल्ट लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां जोरदार चुनौती पेश की है. यही वजह है कि दूसरे चरण को चुनाव का “पावर सेंटर” माना जा रहा है. भारी सुरक्षा व्यवस्था और हाई-प्रोफाइल प्रचार के बीच इस चरण के नतीजे राज्य की सियासत की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.




