Bengal Election Phase 2: क्या दूसरे चरण की 142 सीटें बंगाल की सत्ता की चाबी बनेंगी?
बंगाल चुनाव 2026 के दूसरे चरण की 142 सीटें सत्ता की चाबी बन सकती हैं, TMC और BJP के बीच कांटे की टक्कर में तय होगा किसका होगा बंगाल.
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा और अंतिम चरण अब पूरे राज्य की सियासी दिशा तय करने वाला निर्णायक मोड़ बन चुका है. पहले चरण में 152 सीटों पर हुई करीब 92.9% की रिकॉर्ड वोटिंग ने चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है. अब 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान होना है, और यही चरण यह तय करेगा कि राज्य में सत्ता किसके हाथ में जाएगी. ये सीटें दक्षिण बंगाल और कोलकाता के उन इलाकों में फैली हुई हैं, जिन्हें लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है. यही वजह है कि इस चरण को “फाइनल बैटल” कहा जा रहा है, जहां एक तरफ TMC अपने किले को बचाने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इस किले में सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर चुकी है.
इस बार क्यों बदली हुई है लड़ाई?
अगर 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें, तो इन 142 सीटों पर Trinamool Congress का जबरदस्त दबदबा था. पार्टी ने 123 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि BJP केवल 18 सीटों पर सिमट गई थी और एक सीट इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के खाते में गई थी. यह आंकड़ा सिर्फ एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि TMC की मजबूत जमीनी पकड़ का प्रमाण है. हालांकि, इस बार परिस्थितियां बदली हुई नजर आ रही हैं. BJP 2021 में राज्य में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी और उसने उत्तर बंगाल में मजबूत प्रदर्शन किया था. अब उसकी नजर दक्षिण बंगाल के उस किले पर है, जहां से TMC की असली ताकत आती है. BJP की रणनीति साफ है. अगर दक्षिण बंगाल में सेंध लग गई, तो सत्ता का रास्ता खुल सकता है.
142 सीटों पर क्या है सियासी गणित?
दूसरे चरण की 142 सीटें आठ प्रमुख चुनावी जिलों में फैली हुई हैं. कोलकाता उत्तर, कोलकाता दक्षिण, हावड़ा, नदिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और पूर्व बर्धमान. इन जिलों का सीट वितरण भी बेहद अहम है और यही इसे “मिनी बंगाल” बनाता है. कोलकाता उत्तर और दक्षिण मिलाकर 11 सीटें हैं, जबकि हावड़ा में 16, नदिया में 17, उत्तर 24 परगना में 33, दक्षिण 24 परगना में 31, हुगली में 18 और पूर्व बर्धमान में 16 सीटें आती हैं. इन इलाकों में शहरी, ग्रामीण, औद्योगिक और सीमावर्ती सभी तरह के वोटर मौजूद हैं. यही विविधता चुनाव को और जटिल बनाती है, क्योंकि यहां कोई एक फैक्टर नहीं, बल्कि कई स्तरों पर वोटिंग पैटर्न तय होता है.
क्या बड़े चेहरे की वह यह चरण हो गया है हाई-प्रोफाइल?
दूसरे चरण को हाई-प्रोफाइल बनाने में सबसे बड़ी भूमिका बड़े नेताओं की मौजूदगी निभा रही है. भवानीपुर सीट इस चुनाव का केंद्र बिंदु बन गई है, जहां मुख्यमंत्री Mamata Banerjee का मुकाबला BJP के नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari से है. यह मुकाबला सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि पूरे चुनाव का प्रतीक बन चुका है.
इसके अलावा TMC के कई दिग्गज नेताओं की साख भी दांव पर है, जिनमें फिरहाद हकीम, चंद्रिमा भट्टाचार्य, शशि पांजा, अरूप बिस्वास, ब्रात्य बसु और सुजीत बसु शामिल हैं. BJP की तरफ से भी मजबूत उम्मीदवार उतारे गए हैं, जिनमें स्वपन दासगुप्ता और रूपा गांगुली जैसे नाम प्रमुख हैं. इससे साफ है कि यह चरण सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की जंग भी है.
भवानीपुर सीट सबसे बड़ा रणक्षेत्र कैसे?
भवानीपुर सीट इस चुनाव की सबसे चर्चित और निर्णायक सीट बन चुकी है. यहां मुकाबला व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बेहद अहम है. 2021 में नंदीग्राम सीट पर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को करीब 1,900 वोटों से हराया था, जिसके बाद यह मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है.
इस बार स्थिति और जटिल हो गई है, क्योंकि चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद भवानीपुर में करीब 51,000 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 21% है. यह बदलाव TMC के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी ने यहां करीब 58,800 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी.
अब ममता बनर्जी खुद इस सीट पर फोकस कर रही हैं - पदयात्राएं, स्थानीय बैठकों और गैर-बंगाली वोटरों को साधने की कोशिशें तेज हो गई हैं. वहीं Amit Shah भी यहां BJP के प्रचार की कमान संभाले हुए हैं, जिससे यह मुकाबला और भी हाई-वोल्टेज बन गया है.
क्या पहले चरण ने ‘लहर’ का दे दिया संकेत?
पहले चरण में हुई 92.9% की रिकॉर्ड वोटिंग को लेकर सियासी दावे तेज हो गए हैं. प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इसे “बदलाव की लहर” का संकेत बताया है और कहा है कि यह रुझान दूसरे चरण में भी दिखेगा. BJP का मानना है कि ज्यादा वोटिंग का मतलब एंटी-इंकंबेंसी और बदलाव की चाह है.
दूसरी ओर, ममता बनर्जी इसे अपने पक्ष में जनता के समर्थन का संकेत मान रही हैं. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वोटिंग इसलिए हुई क्योंकि लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए वोट देने निकले हैं. उन्होंने NRC जैसे मुद्दों को भी उठाया और इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की.
TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि पहले चरण में पार्टी ने “शतक” लगा दिया है और BJP में घबराहट है. यानी दोनों ही पार्टियां इस रिकॉर्ड वोटिंग को अपने-अपने पक्ष में देख रही हैं.
क्या BJP TMC के किले को भेद पाएगी?
यह चुनाव का सबसे बड़ा सवाल है. 2021 में जहां TMC ने इन 142 सीटों पर 123 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा था, वहीं BJP को सिर्फ 18 सीटों से संतोष करना पड़ा था. लेकिन इस बार BJP ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में है. पार्टी का दावा है कि अगर निष्पक्ष माहौल मिला, तो वह दो-तिहाई बहुमत तक पहुंच सकती है. BJP नेताओं का कहना है कि जनता बदलाव चाहती है और यही रुझान पहले चरण में दिख चुका है. वहीं TMC का भरोसा अपने मजबूत संगठन और पिछले रिकॉर्ड पर है. पार्टी का दावा है कि वह न सिर्फ अपना किला बचाएगी, बल्कि सीटों की संख्या और बढ़ाएगी.
क्या दूसरा चरण तय करेगा सरकार का भविष्य?
दूसरे चरण की 142 सीटें सिर्फ चुनाव का एक हिस्सा नहीं, बल्कि पूरे राज्य की सत्ता का भविष्य तय करने वाली निर्णायक कड़ी हैं. यहां का वोटिंग पैटर्न यह तय करेगा कि TMC अपनी पकड़ बनाए रखेगी या BJP बड़ा उलटफेर कर पाएगी.इन सीटों की खासियत यह है कि यहां हर तरह का वोट बैंक मौजूद है. शहरी मध्यम वर्ग, ग्रामीण मतदाता, औद्योगिक बेल्ट और अल्पसंख्यक समुदाय. यही विविधता चुनाव को बेहद जटिल और रोमांचक बनाती है.
साफ है कि दूसरे चरण का नतीजा ही यह तय करेगा कि बंगाल में सत्ता की कुर्सी किसके पास जाएगी. TMC के लिए यह अपने गढ़ को बचाने की लड़ाई है, जबकि BJP के लिए यह सबसे बड़ा मौका है सत्ता के करीब पहुंचने का. ऐसे में 29 अप्रैल की वोटिंग सिर्फ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति का भविष्य लिखने वाली तारीख साबित हो सकती है.




