Vijay की ‘सियासी फिल्म’ का क्लाइमेक्स! पांच दिन की डील, ड्रामा और डर के बाद CM बनेंगे थलापति, TVK ने कैसे छुआ बहुमत का आंकड़ा?
तमिलनाडु में चुनाव के बाद शुरू हुआ सत्ता का सस्पेंस आखिर खत्म हो गया. पांच दिनों तक चले समर्थन, बैकडोर बातचीत और राजनीतिक ड्रामे के बाद विजय की TVK को बहुमत मिल गया और अब विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. VCK और IUML के समर्थन ने पूरी बाजी पलट दी.
तमिलनाडु के सीएम बनने जा रहे विजय
Vijay Set To Become Tamil Nadu CM: तमिलनाडु की राजनीति में पिछले पांच दिनों से जो कुछ चल रहा था, वह किसी हाई-वोल्टेज पॉलिटिकल थ्रिलर से कम नहीं था. चुनावी नतीजों के बाद ऐसा लग रहा था कि अभिनेता से नेता बने विजय अब सीधे फोर्ट सेंट जॉर्ज पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल लेंगे... लेकिन असली लड़ाई चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि '118' के जादुई आंकड़े तक पहुंचने की थी.
108 सीटें जीतकर तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से 10 सीट दूर रह गई. यहीं से शुरू हुआ जोड़-तोड़, बैकडोर मीटिंग्स, रिसॉर्ट पॉलिटिक्स और देर रात तक चलने वाला सत्ता का खेल..
विजय के लिए जीत के बाद शुरू हुई असली परीक्षा
4 मई को चुनाव नतीजे आए तो विजय के समर्थकों में जश्न था. पहली बार चुनाव लड़कर TVK ने 108 सीटें जीत लीं. लोग इसे 'तमिलनाडु की राजनीति में नया सूर्योदय' कह रहे थे, लेकिन सत्ता का रास्ता अभी बाकी था. विजय को मुख्यमंत्री बनने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए था.
कांग्रेस ने सबसे पहले 5 विधायकों का समर्थन देकर संकेत दिया कि वह DMK से अलग रास्ता चुन सकती है. इसके बाद CPI और CPM भी विजय के साथ आ गए, लेकिन फिर भी आंकड़ा अधूरा था. पूरा खेल VCK प्रमुख थोल तिरुमावलवन के हाथ में अटक गया. उनके दो विधायक ही विजय को बहुमत तक पहुंचा सकते थे, लेकिन VCK लगातार चुप्पी साधे रही. यही चुप्पी तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा सस्पेंस बन गई.
चेन्नई में शुरू हुआ ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ का खेल
उधर AIADMK और DMK भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे थे. खबरें आने लगीं कि AIADMK के कुछ बड़े नेता विजय को समर्थन देकर सत्ता में हिस्सेदारी चाहते हैं. बदले में डिप्टी CM और कई मंत्रालयों की मांग रखी गई. इसी बीच एक और चौंकाने वाली चर्चा शुरू हुई- क्या DMK और AIADMK, दोनों पुराने दुश्मन, सिर्फ विजय को रोकने के लिए साथ आ सकते हैं? इन अटकलों के बीच AIADMK ने अपने विधायकों को पुडुचेरी के रिसॉर्ट में भेज दिया, ताकि कोई टूट-फूट न हो. तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' के दौर में पहुंच चुकी थी.
राज्यपाल के दरवाजे पर अटकी थी सरकार
विजय लगातार तीन दिनों तक राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मिले, लेकिन हर बार उनसे बहुमत साबित करने के लिए कहा गया. शुक्रवार रात तक TVK के पास सिर्फ 117 विधायकों का समर्थन था. यानी बहुमत से सिर्फ एक कदम दूर... पूरे तमिलनाडु में चर्चा थी कि क्या विजय मुख्यमंत्री बनने से चूक जाएंगे?
इसी बीच IUML ने टीवीके को समर्थन देने से इनकार कर दिया. इससे TVK खेमे में बेचैनी बढ़ गई. देर रात तक फोन कॉल, मीटिंग और बातचीत चलती रही. बताया गया कि TVK नेता लगातार VCK प्रमुख तिरुमावलवन से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे.
और फिर आया ‘क्लाइमेक्स’
शनिवार को आखिरकार VCK ने बिना शर्त समर्थन का ऐलान कर दिया. इसके तुरंत बाद IUML भी विजय के साथ आ गई. अब समीकरण साफ था:
- TVK – 107 (विजय दो सीटों से जीते थे. इसलिए एक ही सीट गिनी जाएगी)
- कांग्रेस – 5
- CPI – 2
- CPM – 2
- VCK – 2
- IUML – 2
कुल मिलाकर आंकड़ा 120 तक पहुंच गया. यानी बहुमत का जादुई नंबर पार... इसके बाद राज्यपाल ने विजय को तमिलनाडु का नया मुख्यमंत्री बनने का न्योता दे दिया और 13 मई तक विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा. शपथ ग्रहण समारोह 10 मई सुबह 10 बजे चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में होगा. इस पूरे घटनाक्रम ने विजय को एक बड़ा राजनीतिक सबक भी दिया. चुनाव जीतना आसान था, लेकिन सत्ता तक पहुंचने के लिए गठबंधन, धैर्य और राजनीतिक समझ की असली परीक्षा देनी पड़ी.
तमिलनाडु में अब एक नए दौर की शुरुआत हो रही है. सवाल सिर्फ इतना नहीं कि विजय मुख्यमंत्री बनेंगे, बल्कि यह भी कि क्या वे अपनी फिल्मी लोकप्रियता को स्थायी राजनीतिक ताकत में बदल पाएंगे? क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति में जनता तालियां तो जल्दी बजा देती है… लेकिन सत्ता लंबे समय तक सिर्फ उसी के पास रहती है, जो हर मोड़ पर राजनीतिक शतरंज जीतना जानता हो.




