UPI charges: पहले मुफ्त की आदत डालो, फिर शुल्क लगाओ- ऐसे डिजिटल इंडिया में जोंक मोड में चल रहा बिजनेस मॉडल
UPI पर ₹2000 से ऊपर शुल्क की चर्चा के बीच जानें, बैंक-से-बैंक UPI फ्री है या नहीं, वॉलेट-मर्चेंट नियम क्या हैं और सरकार की नई नीति से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा.
पहले मुफ्त का लालच, फिर धीरे-धीरे खून चूसने की आदत - यही तो भारत का नया स्टार्टअप मंत्र बन गया है. जियो ने फ्री नेट से जोंक की तरह चिपकाया, फिर रिचार्ज ने जेब खाली की. Swiggy-Zomato ने फ्री डिलीवरी का जाल फेंका, अब प्लेटफॉर्म फीस पर पल रहे हैं. अब बारी है UPI की. जिस Digital India ने नारा दिया था - फ्री, फास्ट, सिक्योर, वही अब ₹2000 से ऊपर MDR का इंजेक्शन लगाने की तैयारी में है. सरकार कहती है ग्राहक से नहीं लेंगे, पर दुकानदार देगा तो वसूलेगा किससे? आखिर जोंक तो आखिर में खून आम आदमी का ही पीती है.
जोंक क्या है, UPI से क्यों जोड़ा जा रहा है?
यहां पर साफ कर दें कि 'जोंक' एक परजीवी जीव है जो दूसरों का खून चूसकर जीवित रहता है. हाल ही में संसद में डिजिटल भुगतान से जुड़ा एक नया बिल पेश हुआ है. विपक्ष और आलोचकों का आरोप है कि इस नए नियम से आम जनता के यूपीआई लेनदेन पर भारी टैक्स या चार्ज लगाया जा सकता है. इसी वजह से विरोध जताने के लिए यूपीआई चार्ज की तुलना खून चूसने वाली जोंक से की जा रही है. हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि आम लोगों के लिए यूपीआई बिल्कुल मुफ्त रहेगा.
दरअसल, भारत में कई बार यही मॉडल चला है. पहले सस्ता या मुफ्त करके आदत लगाओ, फिर जब लोग उसी पर निर्भर हो जाएं तो धीरे धीरे शुल्क लगाओ. मोबाइल कॉल और SMS पहले महंगे थे, फिर फ्री कॉलिंग देकर आदत लगाई, बाद में रिचार्ज महंगा किया.
मोबाइल इंटरनेट में 4G आने पर बहुत सस्ता डेटा दिया, आदत बनने के बाद प्लान महंगे हुए. इसी तरह बैंकिंग और ATM को पहले आसान बनाया, बाद में फ्री लिमिट के बाद चार्ज, SMS अलर्ट, डेबिट कार्ड फीस आई.
फिर Paytm जैसे वॉलेट ने कैशबैक से आदत लगाई, बाद में वॉलेट लोडिंग और दूसरी सेवाओं पर चार्ज आया. Netflix, Prime ने सस्ते ऑफर से ग्राहक बनाए, बाद में दाम बढ़ाए. Zomato, Swiggy ने डिस्काउंट और फ्री डिलीवरी से आदत लगाई, बाद में डिलीवरी फीस, प्लेटफॉर्म फीस बढ़ी. बाद में Ola, Uber ने सस्ते किराए से आदत लगाई, बाद में कई तरह की फीस बढ़ी.
लेकिन, UPI का मामला इन सबसे थोड़ा अलग है. UPI कोई प्राइवेट कंपनी नहीं है. ये NPCI का पेमेंट सिस्टम है जो सरकार और RBI के साथ चलता है. इसलिए ये कहना कि एक कंपनी ने जाल बिछाया है, सही नहीं है. यहां सवाल सिस्टम को फ्री रखना कितने दिन टिकाऊ है, इसका है.
अब तक UPI में क्या व्यवस्था रही है?
2016 से आज तक आम आदमी के लिए UPI फ्री है. आप अपने बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पैसा भेजते हैं, चाहे दोस्त को या दुकानदार को, तो आपसे और दुकानदार से कोई MDR नहीं लिया जाता. 2020 में सरकार ने कानून बनाकर UPI और RuPay डेबिट कार्ड को Zero-MDR कर दिया था. NPCI ने बार बार कहा है कि बैंक अकाउंट से बैंक अकाउंट वाले सामान्य UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं है और ग्राहक से कोई पैसा नहीं लिया जाता.
अब क्या होने वाला है, सीधे आम भाषा में समझिए.
अभी तक कुछ भी नया चार्ज लागू नहीं हुआ है. आपके बैंक खाते से UPI आज भी फ्री है. जो होने वाला है वो 3 स्टेप में होगा.
पहला स्टेप - कानून बनना.
सरकार ने Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 लोकसभा में पास करा दिया है. ये बिल Payment and Settlement Systems Act के Section 10A को बदलता है. अभी तक कानून कहता था UPI पर चार्ज नहीं ले सकते. नया कानून कहता है सरकार तय करेगी किस पेमेंट मोड को फ्री रखना है और किस पर फीस लग सकती है. ये बिल अभी राज्यसभा में जाना है, फिर राष्ट्रपति के पास. मतलब अभी सिर्फ रास्ता खोला गया है, चार्ज का फैसला नहीं हुआ है.
दूसरा स्टेप - कमेटी तय करेगी.
वित्त मंत्रालय ने खुद कहा है कि एक बार कानून पास हो गया तो UPI and Services Steering Committee जिसको NPCI हेड करता है, वो तय करेगी कि MDR लगना है या नहीं, कितना लगना है. सरकार ने साफ कहा है कि अगर लगेगा भी तो तुरंत नहीं, और आम आदमी पर नहीं.
तीसरा स्टेप - कैसा चार्ज लग सकता है. अंदरखाने जो प्रस्ताव है वो ये है.
1. 2000 रुपये से ऊपर के सिर्फ merchant payment पर, यानी दुकानदार को दिए गए पैसे पर.
2. व्यक्ति से व्यक्ति को भेजना, जैसे दोस्त को, परिवार को, वो पूरी तरह फ्री रहेगा.
3. दर बहुत कम होगी, 0.25 प्रतिशत से 0.4 प्रतिशत के बीच. क्रेडिट कार्ड में 2 से 3 प्रतिशत लगता है, उसके मुकाबले ये 10 गुना कम है.
4. सिर्फ बड़े व्यापारियों पर लागू होगा. छोटे दुकानदार, किराना, चाय-पानी वाले इसके बाहर रहेंगे.
5. वॉलेट वाला पुराना नियम वैसे ही रहेगा, वॉलेट से 2000 से ऊपर merchant को देने पर 1.1 प्रतिशत तक interchange fee.
तो आपके लिए असल में क्या बदलेगा?
अगले 3 से 6 महीने में कुछ नहीं बदलेगा. सरकार खुद कह रही है कि ये long term sustainability के लिए enabling provision है, immediate charge नहीं.
अगर 2027 में लागू भी होता है तो आप जब 5000 रुपये का फोन खरीदेंगे और UPI करेंगे तो आपको 5000 ही देना है. दुकानदार के खाते में 0.25 प्रतिशत यानी 12.5 रुपये कटकर 4987.50 आयेगा. दुकानदार वो 12.5 रुपये आपसे सीधे नहीं मांग सकता, नियम यही होगा.
पर प्रैक्टिकल बात ये है कि बड़ा ब्रांड वो खर्च झेल लेगा, छोटा दुकानदार अगर दायरे में आ गया तो वो दो काम कर सकता है. पहला, 2000 से ऊपर UPI लेने से मना कर देगा और कैश मांगेगा. दूसरा, सामान का दाम 10-20 रुपये बढ़ा देगा. इसलिए घूम फिर कर जेब पर हल्का असर आप पर ही आएगा.
सरकार क्यों ऐसा करना चाहती है?
हर महीने 1500 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन हो रहे हैं. इसका सर्वर, सिक्योरिटी, फ्रॉड रोकने का खर्च बैंक उठा रहे हैं. बैंकों ने कई बार कहा है कि जीरो MDR से घाटा हो रहा है. इसलिए सरकार चाहती है कि थोड़ा खर्च बड़ा व्यापारी उठाए ताकि सिस्टम चलता रहे और बैंक UPI को सपोर्ट करते रहें.
आपको क्या करना चाहिए?
घबराने की जरूरत नहीं है. सामान्य बैंक से बैंक UPI फ्री ही रहने वाला है. अगर आप वॉलेट में पैसा रखकर पेमेंट करते हैं तो 2000 से ऊपर दुकान पर वॉलेट से पेमेंट करने से बचें, सीधे बैंक अकाउंट से करें. और बड़ी खरीदारी पर दुकानदार अगर एक्स्ट्रा चार्ज मांगे तो आप मना कर सकते हैं, क्योंकि नियम के हिसाब से ग्राहक से चार्ज नहीं लेना है.
Wallet, Merchant और Bank to Bank में अंतर क्या है?
सामान्य Bank to Bank UPI payment में पैसा सीधे आपके बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में जाता है. जैसे दोस्त को 5000 रुपये भेजना. ये आम तौर पर ग्राहक के लिए फ्री है.
Merchant transaction में आप किसी दुकान, कंपनी या व्यापारी को UPI से भुगतान करते हैं. जैसे 10000 का सामान खरीदना. यहाँ व्यापारी से पेमेंट प्रोसेसिंग या इंटरचेंज जैसी लागत वसूली की व्यवस्था हो सकती है. ये जरूरी नहीं कि वही शुल्क ग्राहक से सीधे लिया जाए.
Wallet या PPI transaction में पैसा सीधे बैंक खाते से नहीं, बल्कि Paytm जैसे प्रीपेड वॉलेट या PPI से आता है. इसमें अलग नियम और शुल्क व्यवस्था लागू हो सकती है. खासकर 2000 रुपये से ऊपर के कुछ wallet से merchant को किए गए ट्रांजैक्शन पर 1.1 प्रतिशत तक interchange fee का प्रावधान रहा है.
इसलिए UPI पर चार्ज कहना अधूरा है. असली सवाल है पैसा बैंक खाते से आया, wallet से आया या merchant को भुगतान किया गया.
2000 रुपये वाला चार्ज असल में क्या है?
ये चार्ज आपके सामान्य UPI पर नहीं है. अगर आप वॉलेट में रखा पैसा जैसे PhonePe Wallet, Paytm Wallet से किसी दुकानदार के QR पर 2000 से ऊपर का पेमेंट करते हैं, तो उस पर 1.1 प्रतिशत तक interchange fee लग सकती है. बैंक खाते से सीधे UPI करने पर ये फीस नहीं लगती.
सरकार कौन सी नई नीति लाने वाली है?
अब सरकार ने Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 लोकसभा में पास कराया है. ये बिल Payment and Settlement Systems Act 2007 के Section 10A में बदलाव करता है. पहले कानून कहता था कि UPI जैसे नोटिफाइड मोड पर कोई चार्ज नहीं ले सकता. अब नया प्रस्ताव कहता है कि सरकार नोटिफिकेशन से तय करेगी कि कौन सा पेमेंट मोड फ्री रहेगा और किस पर चार्ज लग सकता है.
मतलब सरकार ने अपने पास एक रास्ता खोल लिया है. वित्त मंत्रालय ने सफाई दी है कि अगर MDR लाया भी गया तो सिर्फ चुनिंदा merchant transactions पर, 2000 से ऊपर, और बहुत ही कम दर पर लगेगा. जो चर्चा चल रही है उसके मुताबिक 2000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर बड़े व्यापारियों से 0.25 प्रतिशत से 0.4 प्रतिशत MDR लिया जा सकता है. एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजना फ्री ही रहेगा. एक प्रस्ताव ये भी है कि ये सिर्फ बड़े merchants पर लगे, छोटे दुकानदारों को छूट मिले. RBI गवर्नर ने भी कहा है कि Someone has to pay, UPI चलाने का खर्च कोई तो उठाएगा.
चार्ज किसकी जेब से जाएगा?
कागज पर चार्ज ग्राहक से नहीं, व्यापारी से लिया जाएगा. जैसे क्रेडिट कार्ड में दुकानदार बैंक को 2 प्रतिशत देता है, वैसे ही UPI में दुकानदार 0.25 प्रतिशत देगा. आपको 10000 का सामान 10000 में ही मिलेगा.
पर जमीन पर क्या होता है? बड़ा व्यापारी ये खर्च अपने मुनाफे में एडजस्ट कर लेगा. छोटा व्यापारी अगर इसके दायरे में आया तो कई बार कहेगा कि UPI पर 2000 से ऊपर लोगे तो 1 प्रतिशत एक्स्ट्रा दो या कैश लाओ. ये प्रैक्टिस कार्ड में पहले से होती है. तो सीधे जेब आपकी नहीं कटेगी, पर अप्रत्यक्ष रूप से सामान महंगा होने या UPI लेने से मना करने के रूप में असर आप पर ही आएगा. सरकार इसीलिए कह रही है कि UPI free for users, merchants may face nominal fee.
तो क्या ये वही पुराना बिजनेस मॉडल है?
आधा हाँ, आधा ना. हां इसलिए क्योंकि मॉडल वही है, पहले हर महीने 500 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन फ्री करके पूरे देश को UPI का आदी बनाओ, ecosystem खड़ा करो, फिर उसी ecosystem के रखरखाव के नाम पर पैसा वसूलना शुरू करो.
ना इसलिए क्योंकि UPI Jio या Swiggy जैसा प्राइवेट मुनाफा मॉडल नहीं है. UPI का खर्च आज बैंक और सरकार सब्सिडी से उठा रहे हैं. हर ट्रांजैक्शन पर सर्वर, फ्रॉड चेक, सेटलमेंट का खर्च है. सरकार का तर्क है कि सिस्टम को लंबे समय तक चलाना है तो उसके लिए फीस का रास्ता खुला रखना पड़ेगा.
सार ये है कि आज की तारीख में आपके बैंक खाते से UPI करना पूरी तरह फ्री है. 2000 वाला 1.1 प्रतिशत चार्ज सिर्फ वॉलेट से दुकान पर पे करने पर है. भविष्य में अगर नया कानून लागू हुआ तो 2000 से ऊपर दुकान पर UPI करने पर दुकानदार से 0.25 से 0.4 प्रतिशत कट सकता है, आपसे सीधे नहीं. पर दुकानदार वो पैसा कहीं न कहीं घुमाकर आपसे ही निकालेगा, यही वो पेंच है जिस पर बहस चल रही है.




