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गंभीर बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर हो विचार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 10 बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डॉग बाइट मामलों और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. बदलाव की मांग करने वाली याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

Stray Dogs Case
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Stray Dogs Case

देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने नवंबर 2025 के उस आदेश में बदलाव की मांग करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि नसबंदी के बाद आवारा कुत्तों को दोबारा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ा जाएगा. कोर्ट ने साफ किया कि आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती.

सुप्रीम कोर्टकी तीन सदस्यीय पीठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी ने सुनवाई के दौरान कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती मौजूदगी चिंताजनक स्थिति बन चुकी है. अदालत ने यह भी कहा कि वह उन घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती, जिनमें आवारा कुत्तों ने बच्चों समेत कई लोगों पर हमला किया है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 10 बड़ी बातें

1. अदालत ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिकों की जान की रक्षा राज्य सरकारों और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. इसलिए आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था जरूरी है.

2. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को Animal Birth Control (ABC) ढांचे को मजबूत करने के लिए समयबद्ध और निर्णायक कदम उठाने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह कार्यशील एबीसी सेंटर होना चाहिए. इन केंद्रों में प्रशिक्षित स्टाफ, सर्जिकल सुविधाएं, पशु चिकित्सा सेवाएं और जरूरी लॉजिस्टिक व्यवस्था उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा.

3. कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिलों की आबादी और भौगोलिक विस्तार को ध्यान में रखते हुए एबीसी केंद्रों की संख्या तय की जाए. जहां जरूरत ज्यादा हो, वहां अतिरिक्त केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित किया जा सके.

4. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, सार्वजनिक सभा स्थल और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर विशेष निगरानी रखी जाए.

5. अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे स्थानों पर विशेष कार्रवाई की जाए, जहां कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.

6. कोर्ट ने राज्यों को सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया है.

7. डॉग बाइट मामलों से निपटने के लिए प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करने को कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके.

8. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिया गया है कि वह राज्यों के साथ मिलकर हाईवे और एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए व्यापक योजना तैयार करे. इसके तहत विशेष परिवहन वाहन, सुरक्षित आश्रय स्थल और पशु कल्याण संगठनों के सहयोग से कुत्तों और अन्य जानवरों के सुरक्षित स्थानांतरण की व्यवस्था की जाएगी.

9. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश को लागू करने वाले अधिकारियों को कानूनी संरक्षण मिलेगा. इसके अलावा गंभीर बीमार और खतरनाक कुत्तों का मारने पर विचार हो.

10. अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी सद्भावनापूर्वक और अपने आधिकारिक कर्तव्यों के तहत कार्रवाई करते हैं तो उन्हें किसी प्रकार की कानूनी बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा.

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