'मैंने यूसुफ पठान को कभी कोई संदेश नहीं पहुंचाया', सौरव गांगुली ने तोड़ी चुप्पी; 5 Points में जानिए पूरा मामला
सौरव गांगुली ने उन खबरों को गलत बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने यूसुफ पठान से इस्तीफा देने के लिए कहा था. गांगुली ने साफ किया कि उन्होंने न तो ममता बनर्जी का कोई संदेश पहुंचाया और न ही राजनीति में उनकी कोई भूमिका है.
भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने उन रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने यूसुफ पठान से संपर्क कर उनसे अपने निर्वाचित पद से इस्तीफा देने को कहा था, ताकि ममता बनर्जी उपचुनाव में उस सीट से चुनाव लड़ सकें. गांगुली ने साफ शब्दों में कहा कि उनके बारे में लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने कहा कि न तो ममता बनर्जी ने कभी उनसे ऐसा कोई संदेश पहुंचाने को कहा और न ही उन्होंने यूसुफ पठान से इस विषय पर कोई बातचीत की.
पूर्व भारतीय कप्तान ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका राजनीतिक मामलों से कभी कोई संबंध नहीं रहा है. रिपोर्ट में किया गया दावा 'सच्चाई की अनदेखी' करते हुए प्रकाशित किया गया.
क्या है पूरा मामला? 5 पॉइंट्स में समझिए
- आखिर दावा क्या किया गया था? कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सौरव गांगुली ने यूसुफ पठान से संपर्क कर उन्हें अपनी संसदीय सीट छोड़ने का संदेश दिया था, ताकि ममता बनर्जी उस सीट से उपचुनाव लड़ सकें.
- गांगुली ने क्या कहा? गांगुली ने बयान जारी कर कहा कि यह आरोप पूरी तरह झूठा है और उन्होंने कभी भी ममता बनर्जी की ओर से कोई संदेश नहीं पहुंचाया.
- ममता बनर्जी का नाम क्यों आया? रिपोर्ट्स में बहारामपुर लोकसभा सीट को लेकर राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही थीं. इसी संदर्भ में यह दावा सामने आया था.
- यूसुफ पठान की क्या भूमिका है? यूसुफ पठान वर्तमान में एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं. रिपोर्ट में कहा गया था कि उनसे इस्तीफा देने को कहा गया, लेकिन गांगुली ने कहा कि ऐसी कोई बातचीत हुई ही नहीं.
- राजनीति से दूरी पर क्या बोले दादा? गांगुली ने स्पष्ट कहा कि वह कभी भी राजनीतिक मामलों में शामिल नहीं रहे हैं और किसी भी राजनीतिक दल या नेता के लिए मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाई है.
गांगुली ने क्या कहा?
गांगुली के मुताबिक, "यह आरोप लगाया गया था कि मैंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से यूसुफ पठान से संपर्क किया था और उनका संदेश पहुंचाया था कि उन्हें उक्त निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में अपने संवैधानिक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए ताकि ममता बनर्जी उपचुनाव में उस सीट से चुनाव लड़ सकें. यह दावा पूरी तरह गलत है. ममता बनर्जी ने मुझसे कभी भी यूसुफ पठान को उनका कोई संदेश देने का अनुरोध नहीं किया था. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आरोपों की पुष्टि करने का कोई प्रयास नहीं किया गया. मैं किसी भी स्तर पर किसी भी व्यक्ति के साथ राजनीतिक मामलों में कभी शामिल नहीं रहा."




