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“किसी को तो जवाबदेह होना पड़ेगा”, ऑनलाइन अश्‍लीलता और आपत्तिजनक कंटेंट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल - 10 बड़ी बातें

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अश्लील, अभद्र और ‘एंटी-नेशनल’ कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स और चैनल्स को जवाबदेह बनाना जरूरी है. CJI सूर्य कांत ने टिप्पणी की कि केवल चैनल बनाकर मनमर्जी कंटेंट डालना स्वीकार्य नहीं. अदालत ने सेल्फ-रेग्युलेशन मॉडल को अपर्याप्त बताते हुए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष रेगुलेटरी बॉडी बनाने की जरूरत पर जोर दिया. सरकार ने बताया कि नए दिशानिर्देश जल्द अंतिम रूप में तैयार किए जा रहे हैं.

“किसी को तो जवाबदेह होना पड़ेगा”, ऑनलाइन अश्‍लीलता और आपत्तिजनक कंटेंट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल - 10 बड़ी बातें
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( Image Source:  sci.gov.in )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह3 Mins Read

Updated on: 28 Nov 2025 8:17 AM IST

ऑनलाइन कंटेंट की तेजी से बढ़ती दुनिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक ज़िम्मेदारी के टकराव पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त टिप्पणी की. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति अपना चैनल बनाकर मनमर्जी का कंटेंट अपलोड कर दे और किसी के प्रति जवाबदेह न रहे - यह स्वीकार्य नहीं हो सकता. कोर्ट ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ओछे, अभद्र और समाज-विरोधी कंटेंट के प्रसार पर चिंता जाहिर की और कहा कि “किसी न किसी को जवाबदेह होना ही पड़ेगा.”

CJI और जस्टिस जॉयमलया बागची की बेंच ने यह भी स्पष्ट कहा कि मौजूदा सेल्फ-रेगुलेशन मॉडल पर्याप्त नहीं है, और ऐसे मामलों में एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और स्वायत्त नियामक संस्था की आवश्यकता है. यह सुनवाई मूल रूप से पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहाबादिया और अन्य के खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ी थी, लेकिन कोर्ट ने मुद्दे का दायरा बढ़ाकर भारत में ऑनलाइन अश्लीलता, आपत्तिजनक और 'एंटी-नेशनल' कंटेंट पर व्यापक दिशा-निर्देशों की ज़रूरत पर जोर दिया. आइए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की 10 बड़ी बातें जान लते हैं.

  1. कोई भी चैनल बनाकर मनमानी सामग्री डाल दे और किसी को जवाबदेह न रहना पड़े - यह व्यवस्था अस्वीकार्य है, जिम्मेदारी तय होना ज़रूरी है.
  2. मौजूदा सेल्फ-रेगुलेशन मॉडल पर्याप्त नहीं, इससे प्रभावी सुधार नहीं दिखा; एक निष्पक्ष, स्वायत्त और स्वतंत्र रेगुलेटरी अथॉरिटी की ज़रूरत है.
  3. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभद्र, अश्लील और समाज-विरोधी कंटेंट बिना रोक-टोक फैल रहा है, जिसे तत्काल प्रभाव से नियंत्रित किया जाना चाहिए.
  4. कोर्ट को चिंता है कि कई कंटेंट “एंटी-नेशनल” भी होते हैं, पर निर्माता या प्लेटफॉर्म इसके परिणाम की जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं.
  5. आपत्तिजनक कंटेंट वायरल होने में कुछ ही सेकंड लगते हैं, और जब तक अधिकारी कार्रवाई करें, नुकसान पहले ही हो चुका होता है.
  6. एटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल ने कहा - सरकार नए दिशा-निर्देश तैयार कर रही है और सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श जारी है.
  7. केंद्र ने बताया - मुद्दा केवल “अश्लीलता” तक सीमित नहीं, बल्कि “विकृत और भड़काऊ यूज़र जनरेटेड कंटेंट” तक विस्तृत है.
  8. सुप्रीम कोर्ट ने कहा - अभिव्यक्ति की आज़ादी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे विकृति या सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंचाने का हथियार नहीं बनने दिया जा सकता.
  9. न्यायालय ने पूछा - अगर सेल्फ-रेगुलेशन प्रभावी है तो इतनी शिकायतें और उल्लंघन लगातार क्यों हो रहे हैं, जवाबदेही कहां है?
  10. अदालत की सलाह - सरकार पहले ड्राफ्ट गाइडलाइंस सार्वजनिक करे, फिर न्यायिक और विषय विशेषज्ञों की समिति बनाकर अंतिम ढांचा तैयार किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट
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