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S*# एजुकेटर Seema Anand की बातों पर फिर छिड़ा घमासान? महिला-पुरुष की इंटीमेसी शर्म नहीं 'नेचुरल'

चरम सुख की एक्सपर्ट सीमा आनंद इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. उनका जादू कामुक लोगों पर धड़ल्ले से चल रहा है. ऐसे लोग उनकी हर शब्द को गंभीरता से लेने लगे हैं. S*# एजुकेटर सीमा आनंद के एक बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने इंटीमेसी और चरम सुख को लेकर कहा कि यह गंदा नहीं, बल्कि प्राकृतिक प्रक्रिया है. समर्थक इसे जागरूकता बता रहे हैं, विरोधी भारतीय संस्कृति से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं.

S*# एजुकेटर Seema Anand की बातों पर फिर छिड़ा घमासान? महिला-पुरुष की इंटीमेसी शर्म नहीं नेचुरल
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( Image Source:  Madhuri Sharma @WhiteD25208 )

भारत में जहां आज भी यौन क्रिया या विपरीत लिंगियों के बीच चरम सुख जैसे शब्दों को कान में फुसफुसाकर बोला जाता है. वहीं, कुछ लोग इस चुप्पी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. इन्हीं में से एक नाम है, सेक्स एजुकेटर सीमा आनंद. पिछले कुछ दिनों से S*# एजुकेटर सीमा आनंद ने इस विषय पर अपने बयानों से सोशल मीडिया पर भूचाल ला दिया है. उन्होंने कहा कि महिपा-पुरुष के बीच इंटीमेसी और चरम सुख कोई गंदी चीज नहीं, बल्कि एक नेचुरल सी बात है.

सीमा आनंद इतना क्या कहा, 'कुछ लोगों ने इसे जरूरी S*# संवाद बताया, तो कुछ ने संस्कृति और मर्यादा पर हमला करार दे दिया.' वहीं, माधवी शर्मा नाम की यूजन ने उनका एक सुपर हॉट फोटो एक्स पर शेयर सनसनी फैला दी. यूजर माधवी यहीं नहीं रुकी, उनके हवाले से लिखा, "सीमा आनंद का बयान - क्या कहा ऐसा जो बवाल बन गया? सीमा आनंद ने अपने एक इंटरव्यू/डिस्कशन में कहा कि 'इंटीमेसी' को शर्म और अपराधबोध से जोड़ना गलत है. अपोजिट S*# के बीच जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है."

S*# पर गलत जानकारी बड़ी समस्या

दरअसल, S*# एजुकेटर सीमा आनंद का जोर एजुकेशन बनाम टैबू पर था, न कि उकसावे पर, लेकिन बयान वायरल होते ही अलग-अलग अर्थ निकाले जाने लगे हैं.

सोशल मीडिया पर क्यों मची सनसनी?

चरम सुख की एक्सपर्ट सीमा आनंद का जैसे ही बयान क्लिप्स और कोट्स सोशल मीडिया पर आए, कुछ यूजर्स ने इसे आधुनिक सोच बताया. कुछ ने कहा “यह भारतीय संस्कारों के खिलाफ है.” ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर #SeemaAnand फिर से ट्रेंड करने लगा. डिबेट साफ है कि यूजर दो गुटों में बंट गए हैं. एक गुट भारतीय परंपरा की दुहाई दे रहा है तो दूसरा गुट जागरूकता बनाम असहजता व प्रगतिशील संवाद होने का दावा कर रहा है.

इस मुद्दे पर अब तक क्या-क्या कह चुकी हैं?

यह पहला मौका नहीं है जब सीमा आनंद चर्चा में आई हों. इससे पहले भी उन्होंने कामसूत्र को गलत समझे जाने की बात कही. सेक्स एजुकेशन को स्कूल लेवल पर जरूरी बताया. महिलाओं की इच्छाओं और अधिकारों पर खुलकर बात कर चुकी हैं. हर बार उनका स्टैंड यही रहा कि जानकारी डर से बड़ी होनी चाहिए.

कौन हैं सीमा आनंद?

सीमा आनंद पेशे से चरम सुख विशेषज्ञ और ऑथर हैं. भारतीय संस्कृति और ग्रंथों को आधुनिक संदर्भ में समझाने के लिए जानी जाती हैं. विदेशों में भी उनके टॉक्स और वर्कशॉप्स चर्चित रहे हैं. वह खुद को विवादित नहीं, बल्कि डायलॉग शुरू करने वाला व्यक्ति मानती हैं.

संस्कृति, समाज और बदलता नजरिया

सीमा आनंद के इन प्रयासों से भारत में कामसूत्र जैसे ग्रंथ को लेकर लोगों का नजरिया बदलने लगा है. फिर भी सेक्स पर खुली बात आज भी असहज मानी जाती है. इसको लेकर नई पीढ़ी सवाल कर रही है. पुरानी पीढ़ी सीमाएं खींच रही है. यही वजह है कि सीमा आनंद का बयान इसी टकराव की तस्वीर बन गया है.

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