16वीं सदी में मुगल साम्राज्य तेजी से पूरे भारत को अपने कब्जे में ले रहा था. अधिकांश राजपूताना राज्य अकबर के सामने झुक गए थे. लेकिन मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप ने सत्ता के सामने स्वाभिमान को चुना. उन्होंने अकबर के प्रस्ताव को ठुकराते हुए अपने राज्य और आजादी के लिए संघर्ष जारी रखा. महाराणा प्रताप ने महलों और आराम को छोड़कर जंगलों में रहने का निर्णय लिया. भील आदिवासियों के साथ मिलकर उन्होंने मुगलों के खिलाफ लगातार लड़ाई लड़ी. उनकी शारीरिक क्षमता और हथियारों की ताकत उन्हें युद्ध में असाधारण बनाती थी.